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22nd October 2026

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WWII में 1,000 पोलिश बच्चों को भारत ने दी थी शरण; अब रक्षा और कारोबार में साझेदारी बढ़ाने की तैयारी

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News Affair Team

Thu, Oct 22, 2026

नई दिल्ली.

दूसरे विश्व युद्ध में जब पोलैंड के हजारों बच्चे बेघर हो गए थे, तब भारत ने उनके लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे। जामनगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी ने करीब 1,000 पोलिश बच्चों को न सिर्फ शरण दी, बल्कि उन्हें परिवार जैसा माहौल, शिक्षा और इलाज भी उपलब्ध कराया। पोलैंड आज भी उन्हें ‘गुड महाराजा’ कहकर याद करता है।

गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की दिल्ली में हुई मुलाकात में इसी ऐतिहासिक रिश्ते की झलक दिखाई दी। करीब 16 साल बाद भारत आए टस्क के दौरे में अब दोनों देशों का फोकस रक्षा सहयोग, कारोबार दोगुना करने और अंतरिक्ष-तकनीक में साझेदारी बढ़ाने पर है।

जब भारत ने बेघर पोलिश बच्चों के लिए खोले दरवाजे

1939 में जर्मनी और सोवियत संघ के हमलों के बाद पोलैंड पर कब्जा हो गया। युद्ध के कारण हजारों पोलिश नागरिकों को अपना घर छोड़ना पड़ा। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की भी थी। ऐसे मुश्किल दौर में भारत ने पोलिश शरणार्थियों को आश्रय दिया।

1942 में तत्कालीन नवानगर रियासत के महाराजा दिग्विजयसिंहजी ने जामनगर के पास बालाचड़ी में करीब 1,000 पोलिश बच्चों के रहने का इंतजाम किया। बच्चों को भोजन, शिक्षा और इलाज जैसी सुविधाएं दी गईं। उन्हें अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर भी मिला।

महाराजा के इस मानवीय कदम के कारण पोलैंड में उन्हें ‘डोब्री महाराजा’ यानी ‘गुड महाराजा’ कहा जाने लगा। भारत में पोलिश शरणार्थियों को कोल्हापुर रियासत के वलीवडे शिविर में भी आश्रय मिला, जहां करीब 5,000 पोलिश शरणार्थी रहे। वहां उनके लिए स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं।

दूसरा विश्व युद्ध 1945 में खत्म हुआ और इसके बाद शरणार्थी अपने देश लौटने लगे। 1948 तक ज्यादातर पोलिश शरणार्थी वापस जा चुके थे। महाराजा के योगदान को सम्मान देते हुए वारसॉ में 1989 में उनके नाम पर ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ बनाया गया। उन्हें पोलैंड के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल ‘कमांडर्स क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से भी सम्मानित किया गया।

16 साल बाद भारत आए टस्क, साथ में 100 कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। इससे पहले वे 2010 में भारत आए थे। इस यात्रा में उनके साथ करीब 100 पोलिश कंपनियों का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया है।

पोलैंड का लक्ष्य 2030 तक भारत के साथ सालाना कारोबार दोगुना करना है। दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्तों को विस्तार देने के लिए नई साझेदारियों, निवेश और बाजार के अवसरों पर जोर दिया जा रहा है।

रक्षा से अंतरिक्ष तक, चार क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की तैयारी

1. रक्षा उपकरणों का संयुक्त उत्पादन

भारत और पोलैंड रक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसमें रक्षा उपकरणों की डिजाइनिंग, विकास और उत्पादन शामिल हो सकता है। इसके लिए तकनीकी सहयोग के साथ संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा से जुड़े प्रबंध भी अहम होंगे।

2. 2030 तक कारोबार दोगुना करने का लक्ष्य

करीब 100 कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों के लिए अहम मानी जा रही है। कंपनियां भारतीय बाजार में निवेश और साझेदारी के अवसर तलाशेंगी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता भी भविष्य में कारोबार बढ़ाने के नए अवसर खोल सकता है।

3. अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और उद्योगों पर फोकस

भारत और पोलैंड के बीच अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक और बैटरी रिसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं। पोलैंड खाद्य प्रसंस्करण, खनन और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भी अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है।

टस्क नई दिल्ली में भारत-पोलैंड व्यापार मंच में शामिल होंगे। इसके बाद 23 अक्टूबर को वे बेंगलुरु जाएंगे, जहां तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों और कारोबारियों से मुलाकात करेंगे।

4. यूक्रेन में शांति और वैश्विक सहयोग

पोलैंड भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है। यूक्रेन में शांति की कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दे भी दोनों देशों के संवाद का हिस्सा हैं। ऐसे में यह यात्रा ऐतिहासिक मित्रता के साथ मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।

इतिहास की विरासत, भविष्य की साझेदारी

‘गुड महाराजा’ की कहानी भारत-पोलैंड संबंधों का वह मानवीय पक्ष सामने लाती है, जो युद्ध और संकट के समय दिखाई दिया था। अब दोनों देश रक्षा, कारोबार और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। टस्क की यह यात्रा पुराने भरोसे को आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

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