इंटरनेशनल डेस्क.
यूरोप के छह देशों में महंगी पढ़ाई, बेरोजगारी, बढ़ते किराए और सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। फ्रांस से लेकर इटली, स्पेन और ग्रीस तक छात्र, कर्मचारी और ट्रेड यूनियन प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगह आंदोलन हिंसक हो गए। दुकानों में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस से झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं।
फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद करीब 1800 लोगों की गिरफ्तारी की खबर है। अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ कार्यालयों में आग लगा दी, जबकि इटली में छात्र संगठनों ने स्कूलों की स्थिति और महंगाई के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। ग्रीस में छात्र आवास की कमी और महंगे किराए के विरोध में संसद के सामने टेंट लगाकर बैठे हैं। इन आंदोलनों के पीछे मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन महंगी होती जिंदगी, शिक्षा का खर्च और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता कई देशों में एक जैसी दिखाई दे रही है।
फ्रांस: 140 शहरों में प्रदर्शन, 1800 गिरफ्तार
वजह: महंगाई, स्कूलों की खराब हालत और शिक्षकों की कमी
फ्रांस में 17 अक्टूबर को 140 शहरों में प्रदर्शन हुए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। इनमें छात्र संगठनों के साथ ट्रेड यूनियन और कर्मचारी भी शामिल थे।
पेरिस, मार्सेई और बोर्डो समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। लीमोज में 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने और कई गाड़ियों को जलाए जाने की खबर है।
18 अक्टूबर तक करीब 1800 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की सूचना थी। 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और दमकलकर्मियों के घायल होने की भी खबर सामने आई।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने हिंसा की निंदा की। सरकार का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का फायदा उठाया।
अल्बानिया: भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट के कार्यालयों में आग
वजह: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगी पढ़ाई
अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा के खिलाफ कई महीनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शुरुआत में दक्षिणी तट पर प्रस्तावित लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना को लेकर सवाल उठे थे। यह परियोजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ी बताई जाती है। विरोधियों ने पर्यावरण पर असर और फैसलों में पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई थी। बाद में आंदोलन में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति और शिक्षा के बढ़ते खर्च जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए।
13 अक्टूबर:
राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग तेज हुई। छात्रों और आम लोगों ने शिक्षा मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
17 अक्टूबर:
प्रदर्शन हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके। कारों और कूड़ेदानों में आग लगाई गई तथा सड़कों पर अवरोध खड़े किए गए। सुप्रीम कोर्ट के कुछ कार्यालयों, बैंकों और डाकघर समेत कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबर है। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान पहली बार रबर की गोलियां भी चलाई गईं।
इटली: महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक, स्कूलों की हालत पर हड़ताल का ऐलान
वजह: कम वेतन, महंगा रहन-सहन और सरकारी शिक्षा व्यवस्था
इटली में छात्रों और कर्मचारियों का विरोध बढ़ती महंगाई, कम आय और खराब सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन कमाई में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो रही। महंगे मकानों और किराए ने भी परेशानी बढ़ाई है।
17 अक्टूबर:
मिलान में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। कुछ नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और दूसरी वस्तुएं फेंकीं। दुकानों के शीशे तोड़े गए, सामान लूटने और सड़कों पर मेज-कुर्सियां रखकर रास्ता रोकने की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ जगह आगजनी की खबर मिली।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा की और हालात पर चर्चा के लिए सरकारी बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। स्कूलों की स्थिति और शिक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर 30 अक्टूबर को हड़ताल का ऐलान भी किया गया है।
स्पेन: बुजुर्ग महिला को घर से निकाले जाने के बाद आवास संकट पर गुस्सा
वजह: महंगा किराया, बेदखली और रोजगार की कमी
स्पेन में घरों की बढ़ती कीमतों और किरायेदारों को बेदखल किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन तेज हुए हैं। मैड्रिड में 87 वर्षीय मारिकार्मेन अबास्कल को उस घर से निकाल दिया गया, जहां वह करीब 70 साल से रह रही थीं।
बताया गया कि मकान खरीदने वाले निवेश फंड ने किराया 230% बढ़ाने की मांग की थी। वह इतनी बड़ी बढ़ोतरी का खर्च नहीं उठा सकीं। बाद में उनकी मौत हो गई। इस घटना ने आवास संकट को लेकर लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया।
3 अक्टूबर:
मैड्रिड समेत 50 से ज्यादा शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने किराया कम करने, बेदखली पर रोक लगाने और किरायेदारों के अधिकार मजबूत करने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ने और 6 अक्टूबर को सरकार की ओर से 21 नवंबर को समय से पहले चुनाव कराने की घोषणा किए जाने की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, चुनाव की घोषणा और आवास संकट के विरोध प्रदर्शनों के बीच सीधे संबंध की पुष्टि अलग से जरूरी है।
ग्रीस: संसद के सामने टेंट लगाकर बैठे छात्र
वजह: हॉस्टल की कमी, महंगा किराया और पढ़ाई का बढ़ता खर्च
ग्रीस में छात्र आवास की कमी और महंगे रहन-सहन को लेकर विरोध कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि किराया, बिजली, भोजन और आने-जाने का खर्च बढ़ने से पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
13 अक्टूबर:
एथेंस के सिंटाग्मा स्क्वायर में छात्रों ने संसद के सामने टेंट लगाकर प्रदर्शन शुरू किया। भारी बारिश के बावजूद छात्र वहां डटे रहे।
उनकी मांग है कि सरकार अधिक छात्रावास बनाए और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को रहने के लिए ज्यादा मदद दे। छात्रों ने कहा कि आवास और पढ़ाई के खर्च से जुड़ी समस्याओं पर ठोस कदम उठाए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
बेल्जियम: सरकारी खर्च में कटौती और शिक्षा सुधार के खिलाफ प्रदर्शन
वजह: बजट नीतियां, शिक्षा में बदलाव और कर्मचारियों के हित
बेल्जियम में ट्रेड यूनियन और छात्र संगठन अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। ट्रेड यूनियन बजट में खर्च घटाने की योजनाओं का विरोध कर रहे हैं, जबकि छात्र शिक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों से चिंतित हैं।
1 अक्टूबर:
फ्रेंच भाषी क्षेत्र में छात्रों ने शिक्षा में कटौती और नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। उन्हें आशंका है कि इन बदलावों से पढ़ाई महंगी हो सकती है और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेना मुश्किल हो सकता है।
9 अक्टूबर:
दो बड़े ट्रेड यूनियनों ने सरकार की बजट योजनाओं के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन किया। यूनियनों का कहना है कि खर्च घटाने वाले फैसलों का असर कर्मचारियों, पेंशन पाने वालों और कम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है। वेतन, टैक्स और काम के घंटों से जुड़े प्रस्तावों पर भी नाराजगी है।
इसके बाद 12 अक्टूबर को ब्रुसेल्स में झड़पें हुईं और 17 अक्टूबर को पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच फिर टकराव की खबर आई। कुछ जगह पत्थरबाजी और वाहनों में आग लगाने की घटनाएं भी सामने आईं।
छह देशों में अलग-अलग मुद्दे, लेकिन चिंता एक जैसी
यूरोप के इन छह देशों में विरोध के कारण पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। फ्रांस में शिक्षा और महंगाई, अल्बानिया में भ्रष्टाचार, इटली में कम आय और महंगे रहन-सहन, स्पेन में आवास संकट, ग्रीस में छात्रावासों की कमी और बेल्जियम में सरकारी बजट व शिक्षा सुधार प्रमुख मुद्दे हैं।
लेकिन इन सबके बीच एक साझा चिंता उभरती है, बढ़ते खर्च के मुकाबले आमदनी और सार्वजनिक सुविधाओं का साथ नहीं देना। खासकर युवाओं के लिए पढ़ाई पूरी करना, नौकरी पाना और अपने दम पर घर लेना कठिन होता जा रहा है।