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22nd October 2026

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गंगनहर बंद होते ही दिखी गंदगी; 17 करोड़ लोगों ने फेंके पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन

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हरिद्वार में गंगा घाटों पर 4,500 टन कचरे का ढेर : गंगनहर बंद होते ही दिखी गंदगी; 17 करोड़ लोगों ने फेंके पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन

News Affair Team

Thu, Oct 22, 2026

हरिद्वार.

जिस गंगा में डुबकी लगाकर श्रद्धालु पुण्य कमाने की कामना करते हैं, उसी के घाटों पर 4,500 मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है। गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद पानी का प्रवाह कम हुआ तो घाटों और किनारों पर फैले पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन की गंदगी साफ नजर आने लगी।

जिला प्रशासन के मुताबिक, हर साल करीब 17 करोड़ लोगों के गंगा में आने के दौरान यह कचरा जमा हुआ है। हालात को देखते हुए नगर निगम ने 7 नवंबर तक दिन-रात सफाई अभियान शुरू किया है। कचरा हटाने के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से भी सहयोग मांगा गया है।

गंगनहर बंद हुई तो सामने आई गंदगी

हरिद्वार में दशहरे के आसपास हर साल गंगनहर की वार्षिक बंदी की जाती है। दिवाली से पहले नहर में फिर से पानी छोड़ा जाता है। इस अवधि में नहर की सफाई और मरम्मत का काम होता है। पानी कम होने के बाद घाटों और किनारों पर जमा कचरा सामने आ जाता है।

इस बार भी बुधवार से शुरू हुई बंदी के बाद घाटों के आसपास और रेलिंग पर बड़ी मात्रा में पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन बिखरी दिखाई दी। इन्हें हटाने के लिए नगर निगम की टीमें लगातार काम कर रही हैं।

पूजा-पाठ के बाद गंगा में छोड़ देते हैं पुराने कपड़े

हरिद्वार में देशभर से श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक गतिविधियों के दौरान कुछ लोग पुराने कपड़े और अनुपयोगी सामग्री नदी या घाटों पर छोड़ देते हैं। इससे गंदगी बढ़ती है। प्लास्टिक और पॉलीथीन जलीय जीवों के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं।

सराय प्लांट में अलग होगा कचरा, कपड़ों का भी होगा इस्तेमाल

घाटों से निकाले जा रहे कचरे को ज्वालापुर स्थित सराय कूड़ा ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जा रहा है। यहां कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जाएगा। दोबारा इस्तेमाल योग्य सामग्री निजी कंपनियों को बेची जाएगी, जबकि पुराने कपड़ों से भी उपयोगी उत्पाद तैयार करने की योजना है। इस प्रक्रिया से कचरे के निस्तारण के साथ उपयोगी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल में लाने की कोशिश की जा रही है।

सामाजिक संस्थाएं भी सफाई में देंगी साथ

मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने बताया कि गंगनहर बंद होने के बाद स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। कई सामाजिक संस्थाओं ने भी इसमें भाग लेने पर सहमति जताई है।

उन्होंने कहा कि गंगा को स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे पुराने कपड़े गंगा में न डालें और कचरा निर्धारित स्थानों पर ही जमा करें।

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