प्रेमानंद महाराज के 25 साल के शिष्य की संदिग्ध मौत : गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से गिरा; कमरे में खून लगा ग्राइंडर मिला
News Affair Team
Sat, Sep 26, 2026
वृंदावन.
संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह वृंदावन के वाराह घाट इलाके में स्थित गुरु कृपा कुंज की चार मंजिला इमारत में रहते थे। शुक्रवार सुबह वह इमारत की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में घटना आत्महत्या की ओर इशारा कर रही है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। घटनास्थल से संदिग्ध सामान मिला है और फॉरेंसिक टीम ने भी जांच की है।

CCTV में चौथी मंजिल से गिरते दिखे रसिक
सीओ वृंदावन संदीप सिंह के मुताबिक, पुलिस को एक CCTV फुटेज मिला है, जिसमें रसिक दुलारी शरण बिल्डिंग से नीचे गिरते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, घटना से पहले उनके साथ क्या हुआ और उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, इसकी जांच जारी है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर फॉरेंसिक टीम से साक्ष्य जुटाए हैं। कमरे से मिले सामान की भी जांच की जा रही है।
कमरे में मिला खून लगा ग्राइंडर
पुलिस की जांच में रसिक के कमरे से एक ग्राइंडर मिलने की बात सामने आई है, जिस पर खून के निशान बताए गए हैं। उनके शरीर पर भी गंभीर चोटें मिली थीं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कमरे में मिले सामान का घटना से क्या संबंध है। इस बिंदु पर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
करीब 50 शिष्य और सेवादार रहते हैं बिल्डिंग में
गुरु कृपा कुंज बिल्डिंग प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम से जुड़ी बताई जा रही है। यहां आश्रम से जुड़े करीब 50 शिष्य और सेवादार रहते हैं। रसिक दुलारी को कुछ महीने पहले इसी बिल्डिंग में रहने के लिए कमरा मिला था। वह बिजली का काम जानते थे और आश्रम में इसी तरह की सेवा से जुड़े थे।
दो साल पहले ली थी दीक्षा
रसिक दुलारी शरण का मूल नाम दीपक लोधी था। वह मध्यप्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद अपना नाम रसिक दुलारी शरण रखा था। परिवार के मुताबिक, दीपक दो भाई और एक बहन में बीच के थे। उनकी मां और बहन समेत परिवार के लोग सूचना मिलने के बाद मथुरा पहुंचे।

मां का आरोप- दो साल से बेटे से मुलाकात नहीं हुई
दैनिक भास्कर के मुताबिक, रसिक की मां लौंग बाई ने कहा कि उन्होंने करीब दो साल पहले बेटे से आखिरी बार बात की थी। उनका कहना है कि परिवार पहले भी वृंदावन आया था, लेकिन बेटे से मुलाकात नहीं हो पाई। परिवार ने इस मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि परिवार की ओर से दिए गए आरोपों और शिकायत की भी जांच की जा रही है।
बहनोई का दावा- आश्रम पहुंचने के बाद भी मिलने नहीं दिया
दैनिक भास्कर के मुताबिक, रसिक के बहनोई सोनू पटेल ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार रात में वृंदावन पहुंचा, लेकिन काफी देर तक उनकी मुलाकात रसिक से जुड़े लोगों से नहीं कराई गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने परिवार की शिकायत को जांच में शामिल किया है और घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है।
मोबाइल डेटा से पता लगाएगी पुलिस, आखिरी बातचीत किससे हुई
एसपी सिटी राजीव कुमार के मुताबिक, परिवार की ओर से शिकायत दी गई है और उसके आधार पर जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले रसिक दुलारी की किस-किस से बातचीत हुई थी।
इसके लिए उनके मोबाइल फोन और डेटा की जांच की जा रही है। पुलिस घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी खंगाल रही है।
आत्महत्या या कोई और वजह? जांच के बाद तस्वीर साफ होगी
फिलहाल पुलिस ने मौत को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। CCTV फुटेज में बिल्डिंग से गिरने की घटना सामने आई है, लेकिन उससे पहले की परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं।
पुलिस आत्महत्या की आशंका के साथ अन्य संभावनाओं को भी जांच रही है। पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
18 मई से नए आश्रम में रह रहे प्रेमानंदजी

संत प्रेमानंद महाराज पहले केली कुंज आश्रम में रहते थे, लेकिन 18 मई को केली कुंज छोड़ दिया। तब से यमुना विहार कुंज आश्रम में रहते हैं। यह आश्रम केली कुंज से यमुना के रास्ते 3 किलोमीटर और सड़क मार्ग से 18 किलोमीटर दूर है। महाराजजी राधा अष्टमी पर केली कुंज आश्रम आए थे। उन्होंने राधा रानी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया और दोपहर तक रहे। इसके बाद नए आश्रम चले गए। तब से वह केली कुंज नहीं आए।
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