MP में निकाय चुनाव लड़ना अब महंगा : महापौर की जमानत राशि 32 हजार, नपा अध्यक्ष के लिए 24 हजार; चुनावी खर्च का अलग बैंक खाता जरूरी
News Affair Team
Sat, Sep 26, 2026
भोपाल.
मध्यप्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनाव से पहले चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के लिए अब पहले की तुलना में ज्यादा जमानत राशि जमा करनी होगी। संशोधित प्रावधानों में चुनावी खर्च का हिसाब रखने के लिए उम्मीदवारों को अलग बैंक खाता खोलना भी अनिवार्य किया गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन संबंधी आदेश और नगरीय निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के निर्वाचन व्यय के लेखा-संधारण एवं प्रस्तुति संबंधी आदेश दर्ज हैं।
महापौर के लिए 32 हजार रुपए जमानत राशि
संशोधित व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग पदों के लिए जमानत राशि इस तरह तय की गई है-
नगर परिषद पार्षद: 1,600 रुपए
नगरपालिका परिषद पार्षद: 4,800 रुपए
नगर निगम पार्षद: 8,000 रुपए
नगर परिषद अध्यक्ष: 16,000 रुपए
नगरपालिका परिषद अध्यक्ष: 24,000 रुपए
नगर निगम महापौर: 32,000 रुपए
महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित जमानत राशि की 50% राशि जमा करने का प्रावधान है।
2022 के नगरीय निकाय चुनाव में महापौर की जमानत राशि 20 हजार, नगरपालिका अध्यक्ष की 15 हजार, नगर परिषद अध्यक्ष की 10 हजार और नगर निगम पार्षद की 5 हजार रुपए थी।
नामांकन के लिए कम से कम 7 दिन
नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी नियम स्पष्ट किए गए हैं। निर्वाचन के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख की सूचना प्रकाशित होने के बाद कम से कम सात दिन की अवधि रखी जाएगी। सातवां दिन सार्वजनिक अवकाश होने पर उसके अगले कार्यदिवस को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख माना जाएगा।
इसके अलावा किसी एक पद के लिए उम्मीदवार द्वारा एक से ज्यादा नामांकन-पत्र जमा किए जाने पर एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन-पत्र स्वीकार नहीं करेगा।
चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता
महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से जुड़े लेन-देन के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग और स्वतंत्र बैंक खाता खोलना होगा। नामांकन-पत्र दाखिल करते समय इस खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। चुनाव से जुड़ी आय और खर्च का रिकॉर्ड इसी खाते के जरिए रखना होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने 2025 में नगरीय निकायों के महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों के निर्वाचन व्यय के लेखा-संधारण एवं प्रस्तुति से संबंधित अलग आदेश भी जारी किया था।
नामांकन से मतगणना तक खर्च का हिसाब
उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक हुए चुनावी खर्च का लेखा प्रस्तुत करना होगा। खर्च से संबंधित बिल, रसीद और अन्य जरूरी दस्तावेज भी सुरक्षित रखने होंगे।
निर्धारित अवधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ निर्वाचन नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में राज्य निर्वाचन आयोग उम्मीदवार को निर्धारित अवधि के लिए चुनाव लड़ने से निरर्हित भी कर सकता है।
महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया
संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने से जुड़ी प्रक्रिया का भी उल्लेख है। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम और मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
यदि महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद मृत्यु, त्यागपत्र, निर्वाचन निरस्त होने या किसी अन्य कारण से रिक्त होता है तो इसकी सूचना निर्धारित समय-सीमा में जिला निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।
इतनी होगी चुनावी खर्च की सीमा
उम्मीदवारों के लिए निर्धारित चुनावी खर्च की सीमा भी पद और निकाय की आबादी के आधार पर अलग-अलग है।
नगर निगम महापौर
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर: 35 लाख रुपए
10 लाख से कम आबादी वाले शहर: 15 लाख रुपए
नगर निगम पार्षद
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर: 8.75 लाख रुपए
10 लाख से कम आबादी वाले शहर: 3.75 लाख रुपए
नगरपालिका अध्यक्ष
1 लाख से अधिक आबादी: 2.50 लाख रुपए
50 हजार से अधिक आबादी: 1.50 लाख रुपए
50 हजार से कम आबादी: 1 लाख रुपए
नगर परिषद पार्षद: 75 हजार रुपए
अलग बैंक खाते और निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करने संबंधी व्यवस्था का उद्देश्य चुनावी आय-व्यय का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना है।
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