पाकिस्तानी PM की धमकी-पानी रोका तो युद्ध मानेंगे : UN में शहबाज बोले- कश्मीर गले की नस; भारत ने कहा- आतंकवाद जारी रहा तो परिणाम भुगतने होंगे
न्यूयॉर्क.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सिंधु नदी के पानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत की ओर से पानी रोकने की कोई भी कोशिश पाकिस्तान के लिए युद्ध की कार्रवाई मानी जाएगी।
शहबाज ने अपने भाषण में कश्मीर को पाकिस्तान के लिए बेहद अहम मुद्दा बताते हुए इसे ‘गर्दन की नस’ कहा। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का भी जिक्र किया और पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को लेकर अपनी सरकार का पक्ष रखा।
इसके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकियों को कहीं भी सुरक्षित पनाह नहीं मिलेगी। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने पर इसके परिणाम भुगतने होंगे।

सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा उठाया
शहबाज शरीफ ने कहा कि भारत ने 2025 के संघर्ष के बाद सिंधु जल संधि को एकतरफा रोक दिया, जबकि पाकिस्तान के अनुसार ऐसा करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान के रुख को समर्थन मिला है।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। भारत ने हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की भूमिका का आरोप लगाया था।
शहबाज ने कश्मीर को दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि इसका समाधान जरूरी है।
ट्रम्प की भूमिका का भी जिक्र
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के प्रयासों से दोनों देशों के बीच बड़ा सैन्य टकराव टला।
ट्रम्प ने भी शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शहबाज के भाषण से जुड़ा करीब 87 सेकेंड का वीडियो बिना किसी टिप्पणी के शेयर किया।
भारत ने PoK और आतंकवाद का मुद्दा उठाया
शहबाज के भाषण के जवाब में भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों और वहां के लोगों की स्थिति का मुद्दा उठाया।
भारत ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रिकॉर्ड का भी जिक्र किया। गहलोत ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा और पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी गतिविधियां जारी रहने पर इसके परिणाम होंगे।
उन्होंने 9/11 हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में रहने का भी उल्लेख किया और आतंकवाद पर पाकिस्तान के दावों को उसके पिछले रिकॉर्ड के संदर्भ में देखने की बात कही।
पाकिस्तान की राजनीति और धार्मिक असहिष्णुता पर भी जवाब
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की शासन व्यवस्था में सेना की भूमिका का मुद्दा उठाया। उन्होंने पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों की स्थिति पर सवाल करते हुए वहां के संवैधानिक बदलावों का भी उल्लेख किया।
भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति और धार्मिक असहिष्णुता का मुद्दा भी उठाया। गहलोत ने ईशनिंदा कानूनों, कट्टरता और नफरत से जुड़ी घटनाओं का हवाला दिया।
उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार को लेकर पाकिस्तान के विपक्ष में इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म 47 सरकार’ शब्द का भी जिक्र किया।
क्या है ‘फॉर्म 47 सरकार’
‘फॉर्म 47 सरकार’ पाकिस्तान में विपक्ष और खासकर PTI समर्थकों की ओर से शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला राजनीतिक शब्द है।
फॉर्म 47 पाकिस्तान चुनाव आयोग का आधिकारिक दस्तावेज है, जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के संकलित चुनाव परिणाम दर्ज होते हैं। फरवरी 2024 के आम चुनाव के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया था कि फॉर्म 47 में दर्ज आंकड़े मतदान केंद्रों के फॉर्म 45 से मेल नहीं खाते और नतीजों में हेरफेर की गई।
हालांकि ये चुनावी धांधली के आरोप राजनीतिक विवाद का विषय रहे हैं। भारत ने UN में शहबाज सरकार का जिक्र करते हुए इसी राजनीतिक आरोप के संदर्भ में ‘फॉर्म 47 सरकार’ शब्द का इस्तेमाल किया।
इस्लामोफोबिया से लेकर गाजा तक कई मुद्दे उठाए
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में इस्लामोफोबिया का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ कथित भेदभाव, नफरत और धार्मिक स्थलों पर हमलों पर चिंता जताई। भारत का नाम लेते हुए उन्होंने RSS से प्रभावित विचारधारा पर भी आरोप लगाए।
उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों की स्थिति का जिक्र करते हुए स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की मांग दोहराई। सऊदी अरब पर हूती हमलों की निंदा करते हुए उन्होंने सऊदी सुरक्षा को पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण बताया।
शहबाज ने अफगानिस्तान की जमीन से TTP और BLA जैसे संगठनों की गतिविधियों का मुद्दा उठाते हुए अफगान सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब को खुला रखने की अपील
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि इन रास्तों को खुला रखा जाना चाहिए, क्योंकि इनके बंद होने का असर पश्चिम एशिया से बाहर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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