मोदी बोले- भारत ने दुनिया को शून्य दिया, कभी रॉयल्टी नहीं मांगी : ब्लूमबर्ग फोरम में कहा- पावर दूसरों को सशक्त बनाने के लिए हो; 100+ देशों को वैक्सीन दी
नई दिल्ली.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने दुनिया को शून्य दिया, लेकिन इसके बदले कभी रॉयल्टी नहीं मांगी। भारत की ताकत का इस्तेमाल सिर्फ अपनी तरक्की के लिए नहीं, बल्कि दूसरे देशों को आगे बढ़ाने के लिए भी होना चाहिए। मंगलवार को दिल्ली में पहली बार आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए मोदी ने भारत की डिजिटल तकनीक, सस्ती दवाओं, वैक्सीन आपूर्ति और आर्थिक सुधारों का जिक्र किया।
करीब 25 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज, भुगतान प्रणाली और तकनीक भी दबाव बनाने के साधन बनते जा रहे हैं। ऐसे माहौल में देशों के बीच भरोसा सबसे अहम है। भारत खुद को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में पेश कर रहा है।

मोदी के संबोधन की 8 बड़ी बातें
1. ‘पावर दूसरों को सशक्त बनाने के लिए हो’
मोदी ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। तकनीक, ज्ञान और संसाधनों का लाभ कुछ लोगों तक सीमित रहने के बजाय ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने अपनी बात को ‘Power to Empower’ का नाम दिया। यानी शक्ति का इस्तेमाल दूसरों को सक्षम बनाने, नए अवसर पैदा करने और देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
2. कोविड के दौरान 100 से ज्यादा देशों को वैक्सीन दी
प्रधानमंत्री ने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने 100 से अधिक देशों तक वैक्सीन पहुंचाई। उनके मुताबिक, भारत अपनी क्षमताओं को केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रखता, बल्कि ग्लोबल साउथ और साझेदार देशों के साथ भी साझा करता है।
उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और CoWIN प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि भारत की तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल दूसरे देशों की जरूरतों के मुताबिक नए समाधान विकसित करने में होना चाहिए।

3. ‘दुनिया को भरोसेमंद साझेदारों की जरूरत’
मोदी ने कहा कि दुनिया एक संकट से उबरने की कोशिश करती है, तभी दूसरी चुनौती सामने आ जाती है। सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज, पेमेंट सिस्टम और तकनीक अब कई बार दबाव बनाने के साधन बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संकट के समय आपूर्ति जारी रहने, किए गए वादे निभाने और साझेदार देशों के साथ खड़े रहने का भरोसा जरूरी है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत इसी सोच के साथ वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका निभाना चाहता है।
4. सरकार का काम नागरिकों को सक्षम बनाना
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के पास अधिकार होते हैं, लेकिन उसका उद्देश्य नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना होना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। मोदी ने सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने वाली व्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे सरकार और नागरिकों के बीच सीधा संपर्क बना है।
5. भारत की GDP ग्रोथ 7.8%, विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर पार
आर्थिक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की विकास दर 7.8% रही। उन्होंने बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है।
प्रधानमंत्री ने GST, दिवाला कानून और श्रम कानूनों में बदलाव को आर्थिक सुधारों का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “रिफॉर्म्स हमारे लिए मजबूरी नहीं, हमारा संकल्प हैं।”
6. सस्ते मोबाइल डेटा से छोटे शहरों तक पहुंचे अवसर
मोदी ने कहा कि 2014 के बाद मोबाइल डेटा को किफायती बनाने पर जोर दिया गया। इससे छोटे शहरों के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा, युवाओं को ऑनलाइन कोर्स और छोटे दुकानदारों को नए ग्राहकों तक पहुंचने के अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि भारत में कनेक्टिविटी ने केवल लोगों को नहीं जोड़ा, बल्कि अवसरों को भी आपस में जोड़ा है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सड़क किनारे सामान बेचने वाला और बड़ा कार शोरूम, दोनों एक ही डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं।
7. स्टार्टअप अब छोटे शहरों तक पहुंचे
प्रधानमंत्री ने भारत की स्टार्टअप यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में नवाचार के अवसर पहले से अधिक लोगों तक पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि भारत में अब 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं और इनमें से करीब आधे छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं।
मोदी के मुताबिक, जब नई तकनीक और उद्यम शुरू करने के अवसर ज्यादा लोगों तक पहुंचते हैं, तो नए विचार और समाधान भी सामने आते हैं।
8. भारत ‘लोकतंत्र की जननी’
प्रधानमंत्री ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताते हुए कहा कि देश में अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर बहस होती है और नागरिक विभिन्न विचारों पर चर्चा करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी तकनीकी और आर्थिक क्षमताओं को अपने तक सीमित रखने के बजाय दूसरे देशों के साथ साझा करने में विश्वास करता है। उनके मुताबिक, देश की प्रगति का उद्देश्य दुनिया के साथ और दुनिया के लिए आगे बढ़ना है।
2018 में शुरू हुआ था ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की शुरुआत 2018 में ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के लिए सरकारों, उद्योग जगत, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है।
इस साल फोरम का आठवां संस्करण 13 से 15 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। भारत पहली बार इसकी मेजबानी कर रहा है। इस वर्ष की थीम है- ‘A World in Play: Defining the New Levers of Power’, यानी बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोतों को परिभाषित करना।

वैश्विक कारोबारी और नीति-निर्माता भी शामिल
फोरम में ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, इटली के पूर्व प्रधानमंत्री मारियो द्रागी, अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो और उद्योग जगत की कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की घोषणा की गई थी।
तीन दिन के इस आयोजन में वैश्विक व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और बदलते आर्थिक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
भारत की भूमिका पर जोर, अब वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग की बात
प्रधानमंत्री के संबोधन का केंद्रीय संदेश यह रहा कि किसी देश की आर्थिक और तकनीकी ताकत का महत्व इस बात से तय होना चाहिए कि उससे कितने लोगों और देशों को लाभ मिलता है। शून्य, वैक्सीन आपूर्ति, डिजिटल भुगतान और सस्ती दवाओं के उदाहरण देकर उन्होंने भारत को सहयोग और भरोसे के साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया।
फोरम में वैश्विक नेताओं और कारोबारियों के बीच होने वाली चर्चाओं का फोकस अब इस बात पर रहेगा कि बदलती तकनीक, व्यापार और संसाधनों के बीच आर्थिक विकास के अवसर कैसे बढ़ाए जाएं और देशों के बीच भरोसे को कैसे कायम रखा जाए।
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