मस्क की Starlink से आगे निकली OneWeb : सुनील मित्तल बोले- 5 साल पहले किया था आवेदन, नेटवर्क भी तैयार
नई दिल्ली.
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की तैयारी के बीच भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि उनकी कंपनी की सैटेलाइट सेवा Eutelsat OneWeb, एलन मस्क की Starlink के मुकाबले मंजूरी की कतार में आगे है। मित्तल के मुताबिक, कंपनी ने करीब पांच साल पहले आवेदन किया था और उसका ग्राउंड नेटवर्क भी पिछले तीन साल से तैयार है। जरूरी मंजूरियां मिलते ही कंपनी सेवाएं शुरू करने के लिए तैयार है।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बुधवार को मित्तल से Starlink को लेकर मस्क के हालिया आरोपों पर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि OneWeb को मंजूरी मिलने में देरी हुई है, जबकि कंपनी लंबे समय से तैयारी कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी कंपनी को Starlink से कुछ दिन पहले मंजूरी मिल सकती है।

मस्क ने भारतीय उद्योगपतियों पर लगाए थे आरोप
Starlink के संस्थापक एलन मस्क ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया था कि भारत में कुछ बड़े उद्योगपति उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। मस्क का कहना था कि ऐसा बाजार पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।
इन आरोपों के बीच भारत सरकार ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की मंजूरी प्रक्रिया में पक्षपात के दावों को खारिज किया है। सरकार के मुताबिक, Starlink, Reliance Jio और Bharti से जुड़ी सैटेलाइट सेवाओं के लिए सुरक्षा जांच और दूसरी नियामकीय प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
5 साल से सैटेलाइट, 3 साल से तैयार है ग्राउंड नेटवर्क
मित्तल ने कहा कि OneWeb ने जरूरी मंजूरियों के लिए करीब पांच साल पहले आवेदन किया था। कंपनी का ग्राउंड नेटवर्क तीन साल से तैयार है और उसके सैटेलाइट भी लंबे समय से भारत में सेवा शुरू करने की तैयारी का हिस्सा हैं।
उनके मुताबिक, भारत में सैटेलाइट कनेक्टिविटी की दिशा में काफी काम हो चुका है। अंतिम मंजूरियां मिलने के बाद कंपनी दूरदराज के उन इलाकों में भी इंटरनेट सेवाएं पहुंचाने की क्षमता रखती है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना मुश्किल है।
हालांकि, नेटवर्क तैयार होने का मतलब यह नहीं है कि व्यावसायिक सेवा तत्काल शुरू हो सकती है। इसके लिए जरूरी सरकारी मंजूरियों और लागू नियामकीय शर्तों को पूरा करना होगा।
सैटेलाइट इंटरनेट से दूरदराज के इलाकों को फायदा
सैटेलाइट इंटरनेट में अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाती है। यह तकनीक पहाड़ी इलाकों, जंगलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और दूर बसे गांवों में उपयोगी हो सकती है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना महंगा और कठिन होता है।
भारत में इस क्षेत्र में Starlink, OneWeb और Reliance Jio से जुड़ी सेवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कंपनियों की तैयारी और नियामकीय मंजूरियों के आधार पर ही यह तय होगा कि सेवाएं कब और किन क्षेत्रों में शुरू हो पाएंगी।
मित्तल ने डिजिटल सेवाओं पर टैक्स घटाने की मांग भी की
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में मित्तल ने डिजिटल वस्तुओं और टेलीकॉम सेवाओं पर टैक्स कम करने की जरूरत भी बताई। उनका कहना था कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाता है और इस क्षेत्र में निवेश तथा सेवाओं के विस्तार को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए समय रहते नियम बनाने पर भी जोर दिया। मित्तल के मुताबिक, AI तकनीक तेजी से विकसित हो रही है और इसके साथ सुरक्षा से जुड़े सवाल भी बढ़ रहे हैं। नियम ऐसे होने चाहिए जो संभावित जोखिमों को नियंत्रित करें, लेकिन नई तकनीक और इनोवेशन के विकास में अनावश्यक बाधा न बनें।
IN-SPACe और टेलीकॉम मंजूरियों की भूमिका
भारत में निजी कंपनियों की अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत करने में IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) की अहम भूमिका है। वहीं सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के व्यावसायिक संचालन के लिए टेलीकॉम से जुड़ी मंजूरियां, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी शर्तें भी महत्वपूर्ण हैं।
Starlink को 2025 में नियामकीय प्रक्रिया के अहम चरणों में मंजूरी मिली थी, लेकिन मंजूरी के अलग-अलग चरणों को व्यावसायिक सेवा शुरू होने के बराबर नहीं माना जा सकता। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की वास्तविक शुरुआत संबंधित शर्तें पूरी होने पर निर्भर करेगी।
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