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कैंची धाम में अब ‘ध्यान की कुटिया’ : मेडिटेशन सेंटर, ‘ॐ’ आकार का ग्लास ब्रिज और मल्टीलेवल पार्किंग भी

News Affair Team

Sat, Feb 21, 2026

देहरादून / नैनीताल.

पहाड़ों के बीच, शिप्रा नदी की कल-कल के पास, जहां लोग सिर्फ दर्शन के लिए नहीं—सुकून के लिए आते हैं… वही है Kainchi Dham।

अब इस तपोभूमि में भक्तों को मिलेगा ध्यान और साधना के लिए समर्पित ठिकाना। यानी अब पेड़ के नीचे जगह ढूंढने या भीड़ से बचने की जुगत नहीं—सीधा मेडिटेशन सेंटर।

900 वर्ग मीटर में बनेगी ‘ध्यान कुटिया’

मंदिर परिसर से लगी पर्यटन विभाग की जमीन पर करीब 900 वर्ग मीटर क्षेत्र में मेडिटेशन सेंटर का निर्माण हो रहा है। काम की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) के पास है। डिजाइन हट (कुटिया) के आकार का है—ताकि प्राकृतिक और आध्यात्मिक माहौल बना रहे।

हरियाली से घिरा यह केंद्र एक समय में लगभग 30 श्रद्धालुओं को बैठकर ध्यान करने की सुविधा देगा। डिजाइन ऐसा कि बाहर की आवाज कम से कम अंदर पहुंचे और श्रद्धालु एकाग्र हो सकें।

अभी तक क्या स्थिति थी?

हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इस धाम की स्थापना 1960 के दशक में Neem Karoli Baba ने शिप्रा नदी के किनारे की थी। लेकिन इतने बड़े श्रद्धा केंद्र में अब तक ध्यान-साधना के लिए कोई अलग समर्पित स्थान नहीं था।

लोग मंदिर परिसर, सीढ़ियों या पेड़ों के नीचे बैठकर ध्यान करते थे। भीड़, आवाजाही और लगातार चलने वाली गतिविधियों के कारण कई बार साधना में व्यवधान आता था।अब यह कमी दूर की जा रही है।

CBDD योजना के तहत 17.59 करोड़ का विकास

कैंची धाम का यह विकास कार्य केंद्र सरकार की चैलेंज बेस्ड डिवोशनल डेस्टिनेशन (CBDD) योजना के तहत हो रहा है। कुल 17.59 करोड़ रुपये की लागत से यहां कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं:

  • मेडिटेशन सेंटर

  • डिस्पेंसरी

  • पाथवे

  • हाईटेक शौचालय

  • पुलिस चौकी

अधिशासी अभियंता रत्नेश सक्सेना के अनुसार, इन सुविधाओं के पूरा होने से श्रद्धालुओं को अधिक व्यवस्थित और बेहतर अनुभव मिलेगा और धाम का आध्यात्मिक व पर्यटन महत्व बढ़ेगा।

अचानक तबीयत बिगड़ी तो? डिस्पेंसरी तैयार

पहाड़ों की यात्रा आसान नहीं होती। लंबा सफर, मौसम का बदलाव, भीड़—कई बार श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ जाती है।

नई डिस्पेंसरी बनने से प्राथमिक इलाज और दवाओं की सुविधा तुरंत मिल सकेगी। खासकर दूर-दराज से आने वालों के लिए यह बड़ी राहत होगी।

शिप्रा नदी पर ‘ॐ’ आकार का ग्लास ब्रिज

अब कहानी में थोड़ा रोमांच भी जोड़ लीजिए। शिप्रा नदी पर 36 मीटर लंबा और 2 मीटर चौड़ा ग्लास ब्रिज बनाया जा रहा है। खास बात—इसका आकार ‘ॐ’ जैसा होगा।

डिजाइन ‘स्टेट ऑफ द आर्ट’ थीम पर है। इसमें:

  • एंटी-स्लिप सतह

  • मजबूत रेलिंग

  • व्यू-पॉइंट

पुल से गुजरते समय श्रद्धालुओं को नीचे बहती नदी और घाटी का साफ दृश्य दिखेगा। यह ब्रिज मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत बनाया जा रहा है और जून 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। आस्था और एडवेंचर—दोनों का संगम।

पार्किंग का भी बड़ा इंतजाम

कैंची धाम में सबसे बड़ी दिक्कतों में से एक—यातायात और पार्किंग। भीड़ के दिनों में गाड़ियां लंबी कतारों में खड़ी रहती हैं।

अब (G+3) मंजिला मल्टीलेवल कार पार्किंग बन रही है। इसकी पुनरीक्षित लागत 4081.39 लाख रुपये है।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक:

  • 340 पाइलों का काम पूरा

  • 89 कॉलम तैयार

  • ग्राउंड फ्लोर स्लैब पर काम जारी

  • कुल भौतिक प्रगति लगभग 45%

इसके पूरा होने के बाद ट्रैफिक दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

क्यों खास है कैंची धाम?

यह धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली के पास स्थित है। शांत पहाड़, हरियाली, नदी का संगीत—और बाबा की तपोभूमि।

देश ही नहीं, विदेश से भी लोग यहां आते हैं। कई मशहूर हस्तियां भी यहां दर्शन कर चुकी हैं। यह जगह सिर्फ मंदिर नहीं, आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है।

क्या बदलेगा?

  • मेडिटेशन सेंटर से साधना का अनुभव व्यवस्थित होगा।

  • ग्लास ब्रिज से आकर्षण बढ़ेगा।

  • पार्किंग और पाथवे से व्यवस्था सुधरेगी।

  • डिस्पेंसरी से सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

यानी कैंची धाम अब सिर्फ श्रद्धा का स्थान नहीं, बल्कि योजनाबद्ध स्पिरिचुअल टूरिज्म मॉडल बनता दिख रहा है।

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