पत्नी के शरीर में पुरुषों वाले XY क्रोमोसोम : शादी के दो साल बाद खुला राज; हैरान कर देने वाली मेडिकल कहानी
News Affair Team
Sun, Mar 15, 2026
भोपाल.
शादी… परिवार… भविष्य के सपने… और बच्चों की किलकारियां।
भोपाल के एक डिफेंस अधिकारी और उनकी पत्नी की जिंदगी भी कुछ इसी सामान्य रास्ते पर चल रही थी। साल 2023 में अरेंज मैरिज हुई, परिवार खुश था, रिश्ते मजबूत हो रहे थे और जिंदगी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी।
लेकिन दो साल बाद जब दंपती ने बच्चे के बारे में सोचना शुरू किया और डॉक्टर के पास पहुंचे, तो मेडिकल जांच में जो सच सामने आया… उसने दोनों की दुनिया हिला दी।
जांच में पता चला कि महिला के शरीर में सामान्य महिलाओं की तरह XX क्रोमोसोम नहीं, बल्कि पुरुषों वाले XY क्रोमोसोम मौजूद हैं।
बाहरी रूप से वह पूरी तरह सामान्य महिला थीं। लेकिन शरीर के अंदर ओवरी नहीं थीं… उनकी जगह अविकसित अंडकोष मौजूद थे।
यह सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं था।
यह कहानी है हिम्मत, रिश्तों और स्वीकार करने की ताकत की।
शादी के दो साल बाद शुरू हुआ इलाज
भोपाल में रहने वाले इस दंपती की शादी साल 2023 में हुई थी। उस समय पत्नी की उम्र करीब 20 साल थी।
दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य चल रहा था। परिवार के बीच भी सब कुछ ठीक था। लेकिन शादी के करीब दो साल बाद भी जब संतान नहीं हुई, तो दोनों चिंतित होने लगे।
उन्होंने परिवार को बिना बताए निजी तौर पर डॉक्टर से सलाह लेने का फैसला किया।
भोपाल के एक बड़े निजी अस्पताल में जब शुरुआती जांच हुई, तो डॉक्टरों ने कुछ असामान्य संकेत देखे और आगे की जांच की सलाह दी।
फिर जो रिपोर्ट आई… उसने दंपती को गहरे सदमे में डाल दिया।
रिपोर्ट में सामने आया चौंकाने वाला सच
जांच में पता चला कि महिला के शरीर में महिलाओं वाले XX क्रोमोसोम नहीं हैं।
उनके शरीर में मौजूद थे पुरुषों वाले XY क्रोमोसोम।
यह सुनते ही दंपती पूरी तरह टूट गए।
करीब डेढ़ महीने तक दोनों इस मानसिक सदमे से बाहर नहीं निकल पाए।
पति को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें…
पत्नी खुद को समझ नहीं पा रही थीं।
लेकिन यहीं से इस कहानी का दूसरा पहलू शुरू होता है।
पति ने संभाला हालात, एम्स जाने का फैसला
काफी सोचने और समझने के बाद डिफेंस अधिकारी ने हिम्मत दिखाई।
उन्होंने अपनी पत्नी को समझाया कि यह किसी की गलती नहीं है। यह एक दुर्लभ मेडिकल स्थिति है, जिसका इलाज संभव है।
इसके बाद उन्होंने बेहतर इलाज के लिए एम्स भोपाल जाने का फैसला किया।
एमआरआई जांच में सामने आई असली स्थिति
एम्स भोपाल में डॉक्टरों ने विस्तृत जांच कराई।
एमआरआई रिपोर्ट में पता चला कि महिला के पेट के निचले हिस्से में, जहां सामान्य रूप से ओवरी होती है, वहां कम विकसित अंडकोष मौजूद हैं।
ये अंडकोष लगभग निष्क्रिय थे।
यही वजह थी कि शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बहुत कम था और सामान्य ब्लड टेस्ट में कोई बड़ी असामान्यता दिखाई नहीं दे रही थी।
यानी शरीर बाहर से महिला जैसा था… लेकिन अंदर की जैविक संरचना अलग थी।
जिंदगी भर नहीं आए पीरियड्स
इस केस की एक और अहम बात यह थी कि महिला को कभी मासिक धर्म नहीं आया था।
परिवार और खुद महिला को लगता था कि शायद उम्र बढ़ने के साथ पीरियड्स शुरू हो जाएंगे।
शुरुआत में इस समस्या को लेकर कुछ दवाएं भी ली गईं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
असल कारण यह था कि शरीर में ओवरी मौजूद ही नहीं थीं।
एम्स की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने संभाला केस
एम्स भोपाल में इस केस को मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने संभाला।
इस टीम में शामिल थे:
यूरोलॉजी विभाग
बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग
एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञ
काउंसलिंग टीम
महिला सबसे पहले ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहुंचीं, जहां विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच की।
डॉक्टरों को जांच में यह भी पता चला कि महिला के निजी अंगों के अंदर अविकसित पुरुष अंग भी मौजूद था।
दो चरणों में की गई सर्जरी
डॉक्टरों ने पति-पत्नी की सहमति से दो चरणों में सर्जरी करने का निर्णय लिया।
पहला चरण
पहले चरण में माइक्रो प्लास्टिक सर्जरी के जरिए विकसित छोटे पुरुष अंग को हटाया गया।
इस प्रक्रिया में डॉक्टरों ने बहुत सावधानी बरती।
केवल ऊपरी हिस्सा हटाया गया
उससे जुड़ी नसों को सुरक्षित रखा गया
ताकि भविष्य में शरीर की संवेदनशीलता बनी रहे।
दूसरा चरण
दूसरे चरण में डॉक्टरों ने पेट के अंदर मौजूद अविकसित अंडकोष को सर्जरी के माध्यम से निकाल दिया।
यह सर्जरी बेहद जटिल थी, लेकिन विशेषज्ञों की टीम ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस कहानी का सबसे मजबूत किरदार
इस पूरी कहानी में सबसे खास बात रही पति का साथ।
जब मेडिकल सच्चाई सामने आई तो बहुत से रिश्ते टूट सकते थे। लेकिन इस डिफेंस अधिकारी ने अपनी पत्नी का साथ नहीं छोड़ा।
उन्होंने:
पत्नी को मानसिक रूप से संभाला
इलाज के लिए प्रेरित किया
हर सर्जरी के दौरान साथ रहे
आखिर में दोनों ने फैसला किया कि वे जीवनभर पति-पत्नी के रूप में साथ रहेंगे।
अब संतान का क्या?
डॉक्टरों के अनुसार इस स्थिति में दंपती के लिए प्राकृतिक रूप से संतान होना संभव नहीं है।
लेकिन दंपती ने निराश होने के बजाय एक नया रास्ता चुना है।
उन्होंने फैसला किया है कि भविष्य में एक बच्चे को गोद लेंगे।
हर महीने ऐसे कई केस आते हैं
एम्स भोपाल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव सिंह बताते हैं कि ऐसे मामलों के लिए एम्स में विशेष ट्रांसजेंडर क्लीनिक चलाया जा रहा है।
हर महीने बड़ी संख्या में मरीज यहां आते हैं।
लेकिन इनमें से लगभग 10 से 12 मरीजों की ही सर्जरी हो पाती है।
सर्जरी के मामलों का अनुपात
डॉ. अभिनव सिंह के अनुसार:
करीब 60% केस मेल से फीमेल परिवर्तन के होते हैं
जबकि लगभग 40% केस फीमेल से मेल परिवर्तन के होते हैं
यह अनुपात समय के साथ बदल भी सकता है।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है।
इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
लोगों में बढ़ती मेडिकल जागरूकता
विशेषज्ञ इलाज की उपलब्धता
सरकारी संस्थानों पर भरोसा
निजी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी बहुत महंगी होती है।
लेकिन एम्स में यह काफी कम खर्च में संभव है।
सर्जरी से पहले जरूरी है काउंसलिंग
एम्स भोपाल में इस तरह के मामलों में सिर्फ सर्जरी नहीं की जाती।
मरीज और उनके परिवार को विस्तृत काउंसलिंग दी जाती है।
डॉक्टर उन्हें यह समझने में मदद करते हैं कि:
उनकी स्थिति क्या है
इलाज के विकल्प क्या हैं
आगे की जिंदगी कैसे बेहतर बनाई जा सकती है
इसके साथ ही हार्मोन थेरेपी के जरिए शरीर को अंदर से संतुलित किया जाता है।
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