एमपी में गैस का ‘गायब’ सिलेंडर : होटल का मेन्यू बदला, घरों में ठंडी रसोई, लोग बोले– “बुकिंग है, सिलेंडर नहीं”
News Affair Team
Sun, Mar 15, 2026
भोपाल.
“भाई साहब, सिलेंडर आया क्या?”
“नहीं आया…”
“कल आ जाएगा?”
“पता नहीं…”
मध्य प्रदेश के कई शहरों में इन दिनों यही सबसे आम बातचीत है। किसी चाय की दुकान पर जाइए, किसी होटल में जाइए, या किसी मोहल्ले की गली में — हर जगह चर्चा एक ही है… रसोई गैस का संकट।
हालात ये हैं कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में गैस सिलेंडर के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। होटल-रेस्टॉरेंट वाले मेन्यू बदलने को मजबूर हैं, ठेले-रेहड़ी वाले काम बंद कर रहे हैं और कई घरों में चूल्हा जलाने के लिए लोग इंडक्शन या कोयले का सहारा लेने लगे हैं।
कहानी सिर्फ एक सिलेंडर की नहीं है…
कहानी है उस सिस्टम की, जो अचानक लड़खड़ा गया है।


6 दिन से होटल-रेस्टॉरेंट को नहीं मिला कॉमर्शियल सिलेंडर
सबसे ज्यादा संकट होटल और रेस्टॉरेंट इंडस्ट्री पर है।
एमपी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी कहते हैं:
“भोपाल में पिछले 6 दिनों से किसी भी होटल या रेस्टॉरेंट को एक भी कॉमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिला है। शुरुआत में हमने किसी तरह मैनेज किया, लेकिन अब गैस का स्टॉक खत्म होने लगा है।”
इसका असर अब सीधे ग्राहकों पर दिखने लगा है।
कई होटल ने मेन्यू छोटा कर दिया है
कुछ ने तंदूरी और डीप फ्राई डिश बंद कर दी हैं
कई छोटे ढाबे और रेहड़ी पूरी तरह बंद हो गए हैं
भोपाल के एक ढाबा संचालक ने बताया,
“पहले रोज 8-10 सिलेंडर लग जाते थे। अब एक भी नहीं मिल रहा। लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना पड़ रहा है।”
50 हजार से ज्यादा होटल-रेस्टॉरेंट प्रभावित
मध्य प्रदेश में होटल इंडस्ट्री का अनुमान है कि इस संकट से करीब 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट प्रभावित हो रहे हैं।
अगर गैस की सप्लाई जल्दी सामान्य नहीं हुई तो:
होटल उद्योग को करोड़ों का नुकसान हो सकता है
हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर असर पड़ सकता है
एक होटल मालिक कहते हैं,
“गैस नहीं होगी तो खाना कैसे बनेगा? ग्राहक आएगा तो क्या देंगे?”
अब घरों में भी सिलेंडर के लिए मारामारी
कॉमर्शियल सिलेंडर की समस्या तो थी ही, अब घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भी हालात बिगड़ने लगे हैं।
प्रदेश के कई शहरों में यह स्थिति है, बुकिंग के बाद भी सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा, एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं और डिलीवरी की तारीख बार-बार बदल रही है। भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद रियाज बताते हैं,
“तीन दिन से घर में गैस खत्म है। एजेंसी के कई चक्कर लगाए लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। मजबूरी में इंडक्शन चूल्हा खरीदना पड़ा।”
रियाज कहते हैं कि गैस की इस परेशानी ने उनके परिवार का बजट भी बिगाड़ दिया।
8 घंटे लाइन में खड़े रहे लोग
भोपाल के कई गैस एजेंसियों के बाहर ऐसे दृश्य दिख रहे हैं जो शायद आपने वर्षों से नहीं देखे होंगे। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, सब हाथ में खाली सिलेंडर लिए घंटों लाइन में खड़े हैं।
शनिवार को भोपाल में कई लोगों को 8 घंटे धूप में खड़े रहने के बाद सिलेंडर मिला। एक बुजुर्ग महिला ने कहा,
“पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। बुकिंग करते थे और सिलेंडर घर आ जाता था।”
उज्जैन में छुट्टी के दिन भी खुली गैस एजेंसी
संकट को देखते हुए उज्जैन प्रशासन अलर्ट मोड पर है। रविवार को छुट्टी के बावजूद महाकाल गैस एजेंसी खोली गई ताकि लोगों को राहत मिल सके। एजेंसी संचालक भगवान दास एरन बताते हैं-
“घरेलू गैस की सप्लाई लगातार जारी है। लोग जरूरत के अनुसार सिलेंडर लेने आ रहे हैं। कॉमर्शियल गैस के बारे में फिलहाल कोई नया आदेश नहीं मिला है।”
ग्वालियर प्रशासन का दावा: गैस की कमी नहीं
जहां एक तरफ प्रदेश के कई शहरों में संकट की खबरें हैं, वहीं ग्वालियर प्रशासन का कहना है कि वहां स्थिति सामान्य है। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा,
“जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खाद्य विभाग की टीम लगातार एजेंसियों का निरीक्षण कर रही है।”
उन्होंने गैस एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि स्टॉक की जानकारी पारदर्शी रखें, उपभोक्ताओं को सही जानकारी दें और डिलीवरी में अनियमितता न करें। कलेक्टर ने लोगों से घबराने या अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।
ग्वालियर में इंडक्शन और कोयले की मांग बढ़ी
गैस संकट का असर बाजार पर भी दिखने लगा है। ग्वालियर के व्यापारियों के अनुसार, इंडक्शन चूल्हों की बिक्री 20% बढ़ गई है। वहीं कोयले और लकड़ी की मांग भी बढ़ी है। कई शादियों में अब डीजल भट्ठियों, लकड़ी और कोयले पर खाना पकाया जा रहा है। एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार बताते हैं, “पिछले तीन दिनों में जितने इंडक्शन बिके हैं, उतने पहले महीने भर में भी नहीं बिकते थे।”
एजेंसियों के चक्कर काटते लोग
भोपाल के बोगदा पुल क्षेत्र में रहने वाली शीबा खान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने बताया,
“मैं एक हफ्ते से गैस एजेंसी के चक्कर लगा रही हूं। मोबाइल पर 13 मार्च को सिलेंडर डिलीवर होने का मैसेज आया था, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला।”
जब वह एजेंसी पहुंचीं तो उन्हें कहा गया कि नवीन नगर जाकर पूछिए। शीबा कहती हैं, “मैं 3-4 महीने में एक सिलेंडर लेती हूं, लेकिन अब उसके लिए भी मोहल्ले और रिश्तेदारों पर निर्भर होना पड़ रहा है।”
कंट्रोल रूम बनाया गया
लोगों की परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम बनाया है। अगर आपको गैस सिलेंडर मिलने में परेशानी हो रही है तो इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
📞 7247560709
📞 7000878489
प्रशासन की अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और समस्या होने पर सीधे कंट्रोल रूम को सूचना दें।
छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा असर
इस गैस संकट का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिनकी रोजी-रोटी गैस पर निर्भर है। जैसे, चाय वाले, समोसा-कचौड़ी वाले, ढाबा संचालक और स्ट्रीट फूड विक्रेता।
भोपाल के एक चाट वाले ने बताया,
“अगर गैस नहीं होगी तो दुकान कैसे चलेगी? रोज की कमाई बंद हो गई है।”
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