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11th March 2026

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काशी ने ‘ऑक्सीजन बैंक’ बनाकर दुनिया को दिखाया हरियाली का दम

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एक घंटे में 2.45 लाख पौधे, चीन का रिकॉर्ड टूटा : काशी ने ‘ऑक्सीजन बैंक’ बनाकर दुनिया को दिखाया हरियाली का दम

News Affair Team

Sun, Mar 1, 2026

वाराणसी.

काशी… जहां हर गली में इतिहास है, हर घाट पर आस्था है और हर सुबह गंगा किनारे जिंदगी की नई शुरुआत होती है। अब उसी काशी ने एक नया इतिहास लिख दिया है, इस बार धर्म या दर्शन में नहीं, बल्कि पर्यावरण में।

सिर्फ एक घंटे में 2,45,103 पौधे। जी हां, आपने सही पढ़ा। एक घंटे में ढाई लाख के करीब पौधे लगाकर वाराणसी ने दुनिया का रिकॉर्ड तोड़ दिया। और यह रिकॉर्ड पहले चीन के नाम था।

अब यह रिकॉर्ड काशी के नाम है। और जगह है—सुजाबाद-डोमरी।

चीन पीछे छूटा, काशी आगे निकल गई

इससे पहले यह रिकॉर्ड चीन के नाम था। साल 2018 में वहां एक घंटे में 1,53,981 पौधे लगाए गए थे। लेकिन रविवार को काशी ने इस आंकड़े को बहुत पीछे छोड़ दिया।

गिनती हुई—2,45,103 पौधे। और यह सिर्फ आंकड़ा नहीं था, यह एक संदेश था—कि भारत अब पर्यावरण के मोर्चे पर भी विश्व रिकॉर्ड बना सकता है।

रिकॉर्ड को प्रमाणित करने के लिए Guinness World Records की टीम मौके पर मौजूद थी। टीम के एडजुडिकेटर ऋषि नाथ राइट खुद इस पूरे अभियान की निगरानी कर रहे थे।े

उन्होंने साफ कहा—रिकॉर्ड टूट चुका है। और उसी दिन सर्टिफिकेट भी दे दिया गया।

जहां रिकॉर्ड बना, वह गांव भी खास है

डोमरी… वाराणसी से करीब 12 किलोमीटर दूर एक गांव। यह कोई साधारण गांव नहीं है। इसे साल 2018 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में गोद लिया था।

करीब 750 परिवारों वाला यह गांव अब नगर निगम का हिस्सा बन चुका है। और अब यही गांव विश्व रिकॉर्ड का गवाह बन गया।

350 बीघा जमीन पर बन रहा है ‘शहरी जंगल’

डोमरी में 350 बीघा जमीन पर एक ‘शहरी वन’ विकसित किया जा रहा है। इसे सिर्फ जंगल नहीं, बल्कि ‘ऑक्सीजन बैंक’ कहा जा रहा है। सोचिए, एक ऐसी जगह जहां हजारों पेड़ होंगे।

जहां हवा साफ होगी। जहां आने वाली पीढ़ियां सांस ले सकेंगी। यह सिर्फ पौधारोपण नहीं है। यह भविष्य में निवेश है।

मियावाकी तकनीक: 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं पेड़

इस पूरे अभियान में एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया—मियावाकी तकनीक। यह तकनीक जापान के वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी ने विकसित की थी।

इसकी खासियत क्या है?

  • पेड़ 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं

  • जंगल 30 गुना ज्यादा घना होता है

  • 2–3 साल में जंगल खुद से जीवित रहने लगता है

  • कम जगह में ज्यादा पेड़ उगाए जा सकते हैं

इस तकनीक में अलग-अलग ऊंचाई वाले पौधे एक साथ लगाए जाते हैं। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है। और जैव विविधता बढ़ती है।

सुबह से जुट गए हजारों लोग, बना जनआंदोलन

यह सिर्फ प्रशासन का कार्यक्रम नहीं था। यह जनभागीदारी का उदाहरण था। सुबह से हजारों लोग डोमरी पहुंच गए। नगर निगम कर्मचारी, स्कूल और कॉलेज के छात्र, आर्मी और PAC के जवान , CISF और गोरखा रेजिमेंट के सैनिक और आम नागरिक।

हर किसी के हाथ में एक पौधा था। हर कोई इतिहास का हिस्सा बनना चाहता था। और आखिरकार इतिहास बन गया।

27 तरह के पेड़, सिर्फ हरियाली नहीं, अर्थव्यवस्था भी

इस शहरी वन में सिर्फ पेड़ नहीं लगाए गए। यह एक इकोनॉमिक मॉडल भी है। कुल 27 प्रकार के देशी पौधे लगाए गए- पीपल, शीशम, अर्जुन, सागौन, आम, अमरूद, महुआ, नींबू, शहतूत, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा।

इनमें कई पौधे औषधीय हैं। कुछ फल देंगे। कुछ लकड़ी देंगे। यानी यह जंगल भविष्य में आय का स्रोत भी बनेगा।

आधुनिक तकनीक से होगा संरक्षण

पौधे लगाना आसान है। लेकिन उन्हें बचाना मुश्किल। इसलिए नगर निगम ने आधुनिक व्यवस्था की है-

  • 10,827 मीटर पाइपलाइन

  • 10 बोरवेल

  • 360 स्प्रिंकलर

  • स्मार्ट सिंचाई सिस्टम

  • 4 किलोमीटर का पाथवे

ताकि पौधे सुरक्षित रहें। और जंगल विकसित हो सके।

‘ऑक्सीजन बैंक’ क्यों कहा जा रहा है?

इस शहरी वन को ‘ऑक्सीजन बैंक’ कहा जा रहा है। क्योंकि यह आने वाले वर्षों में लाखों लोगों को स्वच्छ हवा देगा। यह गंगा किनारे पर्यावरण को मजबूत करेगा।

और शहर के तापमान को भी नियंत्रित करेगा। आज जब दुनिया प्रदूषण से जूझ रही है, ऐसे में यह पहल उम्मीद की किरण है।

काशी ने दुनिया को क्या संदेश दिया?

यह रिकॉर्ड सिर्फ एक संख्या नहीं है। यह एक सोच है। यह संदेश है कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। कि शहर भी जंगल बना सकते हैं। कि नागरिक और प्रशासन मिलकर इतिहास बना सकते हैं।

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