UP को मिला नया कार्यवाहक DGP : राजीव कृष्ण को मिली उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान; अखिलेश बोले- ये क्या प्रदेश चलाएंगे
News Affair Team
Sun, Jun 1, 2025
लखनऊ.
उत्तर प्रदेश को नया कार्यवाहक पुलिस प्रमुख मिल गया है। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया है। वह प्रदेश के पांचवें लगातार कार्यवाहक डीजीपी बने हैं। इससे पहले तक प्रशांत कुमार यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जो आज सेवानिवृत्त हो गए।
शनिवार रात करीब 9 बजे राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इसके बाद वे डीजीपी आवास पहुंचे और निवर्तमान डीजीपी प्रशांत कुमार से औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने रविवार को मीडिया से संवाद करने की बात कही है।

कौन हैं राजीव कृष्ण?
राजीव कृष्ण उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा के तेज-तर्रार और भरोसेमंद अफसरों में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी के करीबी माने जाने वाले राजीव को यूपी की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल पुलिस भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने सफलता से पूर्ण किया।
जन्म: 26 जून, 1969
स्थायी निवास: नोएडा
वर्तमान पद: विजिलेंस डायरेक्टर व पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन
परिवार: पत्नी मीनाक्षी सिंह IRS अफसर, वर्तमान में CBDT में डिप्टी सेक्रेटरी; साले राजेश्वर सिंह विधायक और पूर्व ईडी अधिकारी; भाभी लक्ष्मी सिंह गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर।
राजीव कृष्ण की पहली तैनाती बतौर प्रशिक्षु आईपीएस प्रयागराज में हुई थी। वे बरेली, कानपुर, अलीगढ़, मथुरा, लखनऊ, आगरा, गौतमबुद्धनगर जैसे बड़े जिलों में एसएसपी रह चुके हैं। वह मेरठ रेंज के आईजी, लखनऊ जोन व आगरा जोन के एडीजी भी रह चुके हैं। 2012 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद 2017 में वे वापस यूपी लौटे।
प्रशांत कुमार का विदाई संदेश
रिटायरमेंट के बाद प्रशांत कुमार ने रात करीब साढ़े 10 बजे X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने लिखा-
“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभारी हूं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की पुलिस का नेतृत्व करने का अवसर दिया। मैंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से यह जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की।”

प्रशांत कुमार मूलतः बिहार के सीवान के निवासी हैं और यूपी कैडर में आने से पहले तमिलनाडु कैडर में थे। उन्होंने MSc, MPhil और MBA जैसी डिग्रियां हासिल की हैं।
अखिलेश यादव का निशाना
राजीव कृष्ण की नियुक्ति पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर लिखा-
"अगर व्यक्ति की जगह संविधान और विधान के प्रति निष्ठा होती, तो शायद खुद की नजर में सम्मान पाते। दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई का खामियाजा यूपी की जनता क्यों भुगते?"
DGP की नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यवाहक की वजह
राजीव कृष्ण UP IPS कैडर लिस्ट में 12वें नंबर पर हैं। ऐसे में UPSC से फिलहाल उन्हें स्थायी डीजीपी के रूप में मान्यता नहीं मिल सकती। उन्हें मार्च तक इंतजार करना होगा, जब कई अन्य वरिष्ठ अफसर रिटायर हो जाएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 महीने पहले नई DGP चयन नियमावली बनाई थी, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। इसमें हाईकोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति DGP का चयन करती है। तब तक कार्यवाहक की परंपरा जारी है।
DGP पद के अन्य दावेदार कौन थे?
तिलोत्मा वर्मा: काफी समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहीं, आखिरी फील्ड पोस्टिंग 2000 में थी।
बीके मौर्य: 1990 बैच के अधिकारी, जुलाई में रिटायर हो रहे हैं।
दलजीत चौधरी: वर्तमान में BSF में डीजी, अमित शाह के करीबी माने जाते हैं।
राजीव कृष्ण: अफसरों के परिवार से
राजीव कृष्ण के परिवार में दो पीढ़ियों से आईपीएस, आईआरएस और राजनीति में सक्रिय सदस्य हैं। साले राजेश्वर सिंह, पूर्व ईडी अधिकारी, अब सरोजनीनगर से भाजपा विधायक हैं। राजेश्वर की पत्नी लक्ष्मी सिंह नोएडा की पुलिस आयुक्त हैं। उनके ससुर भी डीआईजी रह चुके हैं।
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