लव मैरिज से खफा पिता ने बेटी को 2 गोली मारी : सूटकेस में शव भरकर एक्सप्रेसवे पर फेंका; 4 साल बाद मां-बाप को उम्रकैद
News Affair Team
Thu, Aug 20, 2026
लखनऊ.
मथुरा के चर्चित आयुषी यादव हत्याकांड में कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। बेटी की हत्या के दोषी पिता नितेश यादव और मां ब्रजवाला को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने हत्या को ‘अत्यंत क्रूर और वीभत्स’ बताते हुए कहा कि दोषियों के प्रति नरम रुख अपनाने का कोई आधार नहीं है। साथ ही कोर्ट ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया है।
फैसले के दौरान पिता ने अपनी सफाई में सिर्फ इतना कहा कि बेटी की हत्या मैंने की थी, मेरी पत्नी का इसमें दोष नहीं है। इसके बाद वह चुप हो गए। मां सिर झुकाकर खड़ी रही।

राजस्थान के युवक से लव मैरिज की थी, परिवार था नाराज
22 साल की आयुषी दिल्ली के बदरपुर की रहने वाली थी और BCA की पढ़ाई कर रही थी। उसने राजस्थान के भरतपुर निवासी छत्रपाल राजपूत से आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली थी। परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था।
17 नवंबर 2022 को इसी बात को लेकर घर में विवाद हुआ। पुलिस जांच के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर पिता ने लाइसेंसी रिवॉल्वर से आयुषी को गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद शव को पॉलिथीन में लपेटकर सूटकेस में रखा गया। देर रात पिता कार से मां के साथ शव लेकर दिल्ली से करीब 150 किलोमीटर दूर मथुरा पहुंचे और यमुना एक्सप्रेसवे के पास सुनसान जगह पर सूटकेस फेंक दिया।

सूटकेस में मिला था शव, 300 CCTV खंगाले
18 नवंबर की दोपहर राहगीर ने एक्सप्रेसवे के पास संदिग्ध सूटकेस देखा और पुलिस को सूचना दी। सूटकेस खोलने पर युवती का शव मिला।
शुरुआत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव की पहचान थी। इसके लिए पुलिस ने 14 टीमें और करीब 100 पुलिसकर्मी लगाए। घटनास्थल से टोल प्लाजा तक लगभग 300 CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई।
बाद में मुखबिर से दिल्ली के बदरपुर की आयुषी के लापता होने की जानकारी मिली। पुलिस उसकी मां और भाई को मथुरा लेकर आई, जहां उन्होंने शव की पहचान आयुषी के रूप में की।

पूछताछ में पिता ने बताई थी हत्या की वजह
पुलिस पूछताछ में पिता ने बताया था कि बेटी के प्रेम विवाह को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन मां और आयुषी के बीच बहस हुई। इसके बाद मां ने पिता को फोन कर घर बुलाया।
पिता के मुताबिक, आयुषी से बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और गुस्से में उसने बेटी पर गोली चला दी। इसके बाद परिवार ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
मां पर भी शव ठिकाने लगाने में साथ देने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के बाद शव को छिपाने और उसे मथुरा ले जाकर फेंकने में मां ने भी पिता का साथ दिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
सरकारी पक्ष ने कोर्ट में गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी माना।
अंतिम संस्कार में पिता ने ही दी थी मुखाग्नि
हत्या के बाद पुलिस ने माता-पिता को गिरफ्तार किया था। परिवार में छोटा बेटा होने के कारण पुलिस की अनुमति से पिता ने ही 21 नवंबर 2022 को मथुरा में बेटी का अंतिम संस्कार किया था।
अंतिम संस्कार के दौरान पिता के रोने और बेटी की चिता को प्रणाम कर माफी मांगने की तस्वीरें भी सामने आई थीं। चार साल बाद उसी मामले में अदालत ने पिता और मां दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने कहा- समाज में गलत संदेश नहीं जाना चाहिए
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि बेटी की हत्या अत्यंत क्रूर और वीभत्स अपराध है। दोषियों के प्रति नरमी बरतने का कोई आधार नहीं है। यदि ऐसे अपराध में उचित दंड नहीं दिया गया तो समाज में गलत संदेश जाएगा। 17 नवंबर 2022 को हुई हत्या का केस करीब चार साल बाद फैसले तक पहुंचा और अदालत ने आयुषी के माता-पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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