छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले को लेकर ED की बड़ी रेड : रामगोपाल अग्रवाल के रायपुर-धमतरी ठिकानों पर 9 घंटे जांच; दुर्ग में बिल्डरों के घर भी दबिश
News Affair Team
Thu, Aug 20, 2026
रायपुर.
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह रायपुर, धमतरी और दुर्ग में कई ठिकानों पर दबिश दी। एजेंसी की टीमें कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, कारोबारी अनूप अग्रवाल और दुर्ग के बिल्डर सजल जैन व विश्वास गुप्ता से जुड़े परिसरों में पहुंचीं।
टीमों ने अलग-अलग ठिकानों पर दस्तावेज, कारोबारी लेन-देन और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले। हालांकि, ED की ओर से अभी तक कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

रामगोपाल के घर 9 घंटे चली जांच, दस्तावेज साथ ले गई टीम
रायपुर के अनुपम नगर स्थित रामगोपाल अग्रवाल के निवास और धमतरी के सिहावा रोड स्थित उनके घर पर ED ने कार्रवाई की। धमतरी में करीब 9 घंटे तक जांच चली। सूत्रों के मुताबिक, टीम अपने साथ कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी लेकर गई है।
रामगोपाल अग्रवाल का नाम कथित शराब घोटाले के अलावा कोल लेवी और कस्टम मिलिंग से जुड़े मामलों की जांच में भी सामने आया है। करीब आठ दिन पहले ED ने उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर कोर्ट में पेश किया था।


धमतरी में ED की कार्रवाई का कांग्रेस ने किया विरोध
रामगोपाल अग्रवाल के धमतरी स्थित घर पर ED की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने धरना देकर ED और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि रामगोपाल अग्रवाल पहले से ED की हिरासत में हैं, ऐसे में उनके परिवार के घर कार्रवाई कर परिजनों को परेशान करना उचित नहीं है।
विधायक ओंकार साहू और जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर समेत कई नेता मौके पर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया और प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी दी।
रायपुर में रामगोपाल के करीबी कारोबारी के घर भी रेड
रायपुर के रवि नगर स्थित कारोबारी अनूप अग्रवाल के घर भी ED की टीम पहुंची। उन्हें रामगोपाल अग्रवाल का करीबी बताया जाता है। टीम घर के अंदर वित्तीय दस्तावेज और कारोबारी रिकॉर्ड की जांच कर रही है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई।

दुर्ग में बिल्डर सजल जैन और विश्वास गुप्ता के ठिकानों पर दबिश
दुर्ग में ED की कार्रवाई सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई। सजल जैन और विश्वास गुप्ता से जुड़े परिसरों में करीब सात अधिकारियों की टीम जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, गांधी चौक स्थित जय आनंद परिसर, जैन गली, डॉक्टर ताम्रकार के पास सजल जैन से जुड़े परिसरों और शनिचरी बाजार स्थित श्रीराम हार्डवेयर में भी जांच की गई। सजल जैन का संबंध रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स से बताया जाता है। विश्वास गुप्ता भी इसी बिल्डर समूह से जुड़े रहे हैं। दोनों को रामगोपाल अग्रवाल का करीबी बताया जा रहा है।
इन कारोबारियों के रियल एस्टेट कारोबार में कुछ अधिकारियों के कथित निवेश की चर्चा भी है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सांसद विजय बघेल बोले- भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई जरूरी
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा-
अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां उपलब्ध सूचनाओं और लिंक के आधार पर कार्रवाई करती हैं। यदि किसी गतिविधि से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है तो ऐसी कार्रवाई जरूरी है।
हालांकि, ED की मौजूदा कार्रवाई किन वित्तीय लेन-देन या किस विशेष मामले से जुड़ी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

रामगोपाल अग्रवाल कौन हैं?
रामगोपाल अग्रवाल लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं। 1980 के दशक में पार्टी से जुड़े और बाद में AICC के सदस्य बने। वर्ष 2013 में उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा और संगठन में सक्रिय रहे। फरवरी 2023 और जुलाई 2023 में भी ED उनके रायपुर स्थित ठिकानों पर कार्रवाई कर चुकी है।
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच में कई नाम
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट के जरिए अवैध शराब बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
ED और EOW की जांच में करीब 3,200 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का दावा किया गया है। मामले में अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कोल लेवी और कस्टम मिलिंग केस भी जांच के दायरे में
छत्तीसगढ़ का कथित कोल लेवी मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से जुड़ी कथित अवैध वसूली से संबंधित है। जांच एजेंसियों ने करीब 540 करोड़ रुपए की कथित अवैध लेवी का दावा किया है।
वहीं कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले में EOW ने वर्ष 2015 से 2023 के बीच नियमों में कथित अनियमितताओं और चुनिंदा राइस मिलर्स को लाभ पहुंचाने की जांच की है। एजेंसी के अनुसार इसमें करीब 127 करोड़ रुपए की कथित अनियमितता सामने आई है। इन दोनों मामलों में भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
कस्टम मिलिंग केस में अब तक क्या हुआ?
अक्टूबर 2023: ED को कथित कस्टम मिलिंग वसूली मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली।
23 अक्टूबर 2023: रायपुर में मनोज सोनी और राइस मिलर्स से जुड़े ठिकानों पर ED की कार्रवाई।
29 जनवरी 2024: EOW ने मामले में FIR दर्ज की।
1 फरवरी 2024: EOW ने करीब 3500 पन्नों का पहला चालान पेश किया।
अप्रैल 2024: मनोज सोनी और रोशन चंद्राकर की गिरफ्तारी।
मई 2024: ED ने रोशन चंद्राकर को कोर्ट में पेश किया।
फरवरी 2025: EOW ने मामले में चालान पेश किया।
जुलाई 2025: अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर से पूछताछ की कार्रवाई आगे बढ़ी।
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