ट्विशा शर्मा डेथ केस : CBI ने 80 किलो की डमी से किया सीन रीक्रिएट; पूर्व जज और बेटे समर्थ को लेकर पहुंची घटनास्थल
News Affair Team
Mon, Jun 1, 2026
भोपाल.
बहुचर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच में जुटी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को मामले की तह तक पहुंचने के लिए घटनास्थल पर रीक्रिएशन किया। जांच टीम पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को साथ लेकर उनके घर पहुंची, जहां लगभग दो घंटे तक घटना से जुड़ी परिस्थितियों को दोहराने का प्रयास किया गया।
CBI अधिकारियों ने ट्विशा के वजन के बराबर लगभग 80 किलो की डमी तैयार कर उसे फंदे पर लटकाने और नीचे उतारने की प्रक्रिया को दोहराया। डमी का वजन वास्तविकता के करीब लाने के लिए उसके अंदर रेत भरी गई और पैरों में लोहे के डंबल बांधे गए। अधिकारियों का उद्देश्य यह समझना था कि घटना के समय परिस्थितियां कैसी रही होंगी और अब तक जुटाए गए साक्ष्य घटनास्थल के तथ्यों से कितना मेल खाते हैं।

FIR के बाद तीन दिन भोपाल में रहा समर्थ
जांच के दौरान CBI को जानकारी मिली है कि 15 मई को मामला दर्ज होने के बाद समर्थ तत्काल भोपाल से बाहर नहीं गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह करीब तीन दिन तक शहर में ही मौजूद रहा। इसके बाद वह जबलपुर पहुंचा, जहां उसने लगभग पांच दिन बिताए।
एजेंसी अब इस अवधि के दौरान उसके ठिकानों, संपर्कों और उन लोगों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसकी मदद की हो सकती है। इसके लिए मोबाइल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और डिजिटल चैट का विश्लेषण किया जा रहा है।
गर्भपात की सलाह देने वाले डॉक्टर से भी होगी पूछताछ
मामले के एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू की जांच करते हुए CBI ने उस डॉक्टर को भी पूछताछ के लिए बुलाया है, जिसने ट्विशा को गर्भपात की सलाह दी थी। जांचकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि गर्भपात के बाद ट्विशा की शारीरिक और मानसिक स्थिति कैसी थी।
साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मौत के बाद सबसे पहले शव किसने देखा, फंदे से किसने उतारा और अस्पताल पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया कैसे हुई।
आत्महत्या या हत्या, दोनों पहलुओं पर जांच
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से ही यह मामला आत्महत्या और हत्या के बीच उलझा हुआ है। समर्थ लगातार इसे आत्महत्या बता रहा है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने वह अब तक ऐसे ठोस कारण स्पष्ट नहीं कर पाया है जो इस दावे को पूरी तरह पुष्ट कर सकें।
उसका कहना है कि गर्भपात के बाद ट्विशा मानसिक तनाव और अवसाद में थी। वहीं CBI इस दावे की भी जांच कर रही है कि क्या घटनास्थल के हालात और फॉरेंसिक साक्ष्य इस कथन का समर्थन करते हैं या नहीं।
फरारी में मदद करने वालों पर भी नजर
CBI की जांच अब उन लोगों तक भी पहुंच रही है जिन्होंने FIR दर्ज होने के बाद समर्थ को शरण, संसाधन या अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई हो। एजेंसी मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की भूमिका फरारी में सहयोग देने की पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
घटनास्थल से अस्पताल तक तैयार हो रही टाइमलाइन
जांच एजेंसी समर्थ से लगातार पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि उसने ट्विशा को पहली बार किस स्थिति में देखा था। घर में उस समय कौन-कौन मौजूद था, फंदे से उतारने की प्रक्रिया कैसे हुई और अस्पताल पहुंचने तक घटनाक्रम में क्या-क्या हुआ।
CBI इन बयानों का मिलान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल रिकॉर्ड से कर रही है ताकि घटना की सटीक टाइमलाइन तैयार की जा सके। इसके साथ ही मौत से पहले संभावित मारपीट, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और घटनास्थल की परिस्थितियों से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच जारी है।
मामले में अब रीक्रिएशन, डिजिटल विश्लेषण और गवाहों के बयानों के आधार पर CBI अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि सभी तथ्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कर मौत के वास्तविक कारणों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
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