‘कांटे’ और ‘काबिल’ के डायरेक्टर संजय गुप्ता का निधन : 57 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा; घर में गिरने से सिर पर लगी थी चोट
मनोरंजन डेस्क.
बॉलीवुड ने अपना एक ऐसा फिल्ममेकर खो दिया, जिसने पर्दे पर मुंबई के अंडरवर्ल्ड, गैंगवार और अपराध की दुनिया को अपने खास अंदाज में पेश किया। ‘कांटे’, ‘जिंदा’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘काबिल’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों के निर्देशक संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने 23 अक्टूबर को ही अपना जन्मदिन मनाया था। 30 अक्टूबर को मुंबई स्थित अपने घर में गिरने से उनके सिर में चोट लगी थी। शनिवार सुबह उनके निधन की खबर सामने आई।
फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर संजय गुप्ता के निधन की पुष्टि की। उन्होंने उन्हें जिंदादिल इंसान और जुनूनी फिल्ममेकर बताते हुए श्रद्धांजलि दी। संजय गुप्ता के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

‘कांटे’ से मिली खास पहचान, ‘काबिल’ ने दिखाई निर्देशन की रेंज
संजय गुप्ता ने 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से बतौर निर्देशक शुरुआत की थी। इस फिल्म में संजय दत्त, आदित्य पंचोली, करिश्मा कपूर और रवीना टंडन जैसे कलाकार नजर आए थे। शुरुआती फिल्मों के बाद उन्होंने अपराध और एक्शन की कहानियों को अपना खास अंदाज दिया।
2002 में रिलीज हुई ‘कांटे’ उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रही। अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, महेश मांजरेकर, कुमार गौरव और लकी अली जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया। फिल्म की शूटिंग के दौरान अमेरिका में 9/11 हमले के कारण भी शेड्यूल प्रभावित हुआ था।
इसके बाद उन्होंने ‘मुसाफिर’, ‘जिंदा’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘जज्बा’, ‘काबिल’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। ऋतिक रोशन और यामी गौतम की फिल्म ‘काबिल’ ने उनके एक्शन-क्राइम सिनेमा से आगे की निर्देशन क्षमता भी दिखाई।
‘कांटे’ की रिलीज के एक हफ्ते बाद हुआ था जानलेवा एक्सीडेंट
संजय गुप्ता की जिंदगी में एक ऐसा हादसा भी आया था, जिसने उनके परिवार और करीबियों को डरा दिया था। ‘कांटे’ 20 दिसंबर 2002 को रिलीज हुई थी। इसके करीब एक हफ्ते बाद, 27 दिसंबर को खंडाला से लौटते समय उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया।
हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। हालत इतनी नाजुक थी कि डॉक्टरों ने शुरुआती 72 घंटे बेहद अहम बताए थे। उन्हें करीब पांच हफ्ते तक अस्पताल में रहना पड़ा। उस वक्त उनकी उम्र महज 35 साल थी।
संजय गुप्ता ने इसी साल जून में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस हादसे को याद किया था। उन्होंने बताया था कि दुर्घटना ने उनकी जिंदगी को किस तरह बदल दिया था।

अंडरवर्ल्ड से मिली थी धमकी, संजय दत्त ने की थी मदद
संजय गुप्ता ने हाल ही में लेखक हुसैन जैदी को दिए एक इंटरव्यू में अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक चौंकाने वाला किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया था कि 1992-93 के दौरान, जब वह अपनी पहली फिल्म ‘आतिश’ बना रहे थे, तब उन्हें अंडरवर्ल्ड से धमकियां मिली थीं।
उनके मुताबिक, एक सुबह घर पर फोन आया। दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने अपना नाम ‘नाना’ बताया। बाद में संजय गुप्ता को पता चला कि फोन छोटा राजन का था। बातचीत के दौरान उन्हें धमकाया गया।
इससे घबराकर उन्होंने संजय दत्त को फोन किया और सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मांगी। संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त की सरकारी गाड़ी उनके घर भिजवाई। संजय गुप्ता के मुताबिक, वह घर के पिछले रास्ते से उस गाड़ी में बैठकर निकल गए थे।
संजय दत्त के साथ बनी हिट जोड़ी, फिर चार साल तक नहीं हुई बात
संजय गुप्ता और संजय दत्त की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई चर्चित फिल्में दीं। दोनों ने ‘आतिश’ से साथ काम करना शुरू किया। इसके बाद ‘खौफ’, ‘जंग’, ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’ और ‘जिंदा’ जैसी फिल्मों में भी साथ नजर आए।
दोनों ने मिलकर प्रोडक्शन कंपनी व्हाइट फेदर फिल्म्स भी शुरू की थी। हालांकि, 2007 में ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ के दौरान तकनीशियनों के भुगतान को लेकर विवाद की खबरें सामने आईं। इसके बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं और उनकी निजी व पेशेवर साझेदारी खत्म हो गई।
2024 में यूट्यूबर सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में संजय गुप्ता ने कहा था कि उनके और संजय दत्त के बीच वास्तव में कोई बड़ी दुश्मनी नहीं थी। उनके आसपास मौजूद लोगों की वजह से गलतफहमियां पैदा हुई थीं।
गुप्ता ने बताया था कि इस विवाद के बाद वह करीब तीन साल तक बेरोजगार रहे। हालात ऐसे हो गए थे कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर खंडाला में होटल का काम संभालने तक के बारे में सोच लिया था।
दोनों ने करीब चार साल तक एक-दूसरे से बात नहीं की। 11 अक्टूबर 2012 को अमिताभ बच्चन की 70वीं बर्थडे पार्टी में उनकी मुलाकात हुई। संजय गुप्ता के मुताबिक, संजय दत्त ने उन्हें आवाज दी। इसके बाद दोनों गले मिले और पुरानी दोस्ती फिर बहाल हो गई।
पोस्ट-प्रोडक्शन से शुरू हुआ था सफर
फिल्म निर्देशन में आने से पहले संजय गुप्ता पोस्ट-प्रोडक्शन और साउंड डिजाइन से जुड़े काम करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और 2001 में अपना प्रोडक्शन हाउस व्हाइट फेदर फिल्म्स शुरू किया।

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