‘लायन की दहाड़’ और 400 मिसाइलों का जवाब : इजराइल-ईरान जंग में मिडिल ईस्ट जल उठा; अमेरिका भी मैदान में
इंटरनेशनल डेस्क.
मिडिल ईस्ट, एक बार फिर वही इलाका, जहां से पूरी दुनिया की धड़कनें तेज हो जाती हैं।
शनिवार सुबह, जब भारत में लोग अपनी दिनचर्या शुरू कर रहे थे, उसी वक्त इजराइल के फाइटर जेट ईरान के आसमान में गूंज रहे थे। टारगेट था—तेहरान। ईरान की राजधानी। सत्ता का दिल।
इजराइल ने ईरान के रक्षा मंत्रालय, खुफिया मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा संगठन और यहां तक कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस को निशाना बनाया।
इसके जवाब में ईरान ने जो किया, उसने इस संघर्ष को जंग में बदल दिया। करीब 400 मिसाइलें। एक साथ। सीधे इजराइल की तरफ।
‘ऑपरेशन लायनस् रोर’: इजराइल का सबसे बड़ा हमला?
इजराइल ने इस पूरे अभियान को नाम दिया—‘ऑपरेशन लायनस् रोर’, यानी शेर की दहाड़।मैसेज साफ था—ये सिर्फ हमला नहीं, ताकत का प्रदर्शन था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन का मकसद ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को कमजोर करना था।
हमले इतने सटीक थे कि ईरान को अपने सुप्रीम लीडर खामेनेई को तुरंत सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करना पड़ा।
यानी, खतरा सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं था—बल्कि सत्ता के शीर्ष तक पहुंच गया था।
ईरान का जवाब: सिर्फ इजराइल नहीं, पूरे क्षेत्र को निशाना
इजराइल के हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने पलटवार शुरू कर दिया। लेकिन ये पलटवार सिर्फ इजराइल तक सीमित नहीं था।
ईरान ने—
इजराइल पर मिसाइलें दागीं
कतर, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया
UAE के सबसे बड़े शहर दुबई पर भी हमला किया
मतलब, ये सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रही। अब इसमें अमेरिका और पूरा खाड़ी क्षेत्र शामिल हो गया है।
क्या अमेरिका भी इस जंग में शामिल है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही ईरान को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था—“अमेरिका अपने लोगों और हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अपने ऑपरेशन को नाम दिया- ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’, यानी जबरदस्त गुस्सा। अमेरिका का दावा है कि उसका मकसद ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करना है।
यानी, ये सिर्फ इजराइल और ईरान की लड़ाई नहीं—बल्कि अमेरिका बनाम ईरान का टकराव भी बन चुका है।
परमाणु कार्यक्रम: इस जंग की असली जड़
इस पूरे संघर्ष की असली वजह है—ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम।अमेरिका और इजराइल चाहते हैं कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम को सीमित करे।
लेकिन ईरान ने साफ कह दिया है—
“ये हमारी रेड लाइन है। हम अपनी रक्षा क्षमता से समझौता नहीं करेंगे।”
ईरान का तर्क है कि अगर उसके पास मिसाइलें नहीं होतीं, तो वह खुद को बचा नहीं पाता।
बड़ी मौतें, बड़े नुकसान
इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर को मार गिराया है।
वहीं ईरान की सरकारी एजेंसी के मुताबिक, इजराइली हमले में एक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें 5 छात्राओं की मौत हो गई।
UAE में मिसाइल के टुकड़े गिरने से एक नागरिक की मौत हुई। यानी, इस जंग की कीमत आम लोग भी चुका रहे हैं।
आसमान खाली: एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द कीं
जंग का असर सिर्फ जमीन पर नहीं, आसमान में भी दिख रहा है। Air India, Lufthansa, Qatar Airways, Air France, British Airways समेत 12 से ज्यादा एयरलाइंस ने इस क्षेत्र की उड़ानें रद्द कर दी हैं।
ब्रिटिश एयरवेज ने साफ कहा—“यात्रियों की सुरक्षा सबसे जरूरी है।” तेहरान में लोगों को शहर छोड़ने की सलाह दी गई है।
दुनिया भर में चिंता, भारत ने भी जारी की एडवाइजरी
भारत ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने और गैर जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और स्विट्जरलैंड ने भी चिंता जताई है। सबका एक ही संदेश है—स्थिति खतरनाक है।
क्या ये तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है?
ये सवाल अब सिर्फ विशेषज्ञ ही नहीं, आम लोग भी पूछ रहे हैं।
क्योंकि—
इजराइल शामिल है
ईरान शामिल है
अमेरिका शामिल है
खाड़ी देश शामिल हो रहे हैं
अगर ये संघर्ष बढ़ा, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा—तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक।
फिलहाल स्थिति: जंग रुकी नहीं है
ईरान ने साफ कहा है—जो भी देश अमेरिका या इजराइल का साथ देगा, वह उसका टारगेट होगा।
इजराइल ने भी संकेत दिए हैं कि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। मतलब, ये सिर्फ शुरुआत हो सकती है।
मिडिल ईस्ट फिर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां से या तो शांति की राह निकलेगी—या इतिहास की सबसे बड़ी जंग शुरू होगी।
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