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13th September 2026

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एशियन गेम्स टीम से बाहर हुईं दिव्यांशी; रोते हुए बोलीं- ‘मां-पापा माफ करना, ये मेरा आखिरी वीडियो’

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जर्सी मिली, चयन हुआ... फिर आखिरी वक्त पर सपना टूटा : एशियन गेम्स टीम से बाहर हुईं दिव्यांशी; रोते हुए बोलीं- ‘मां-पापा माफ करना, ये मेरा आखिरी वीडियो’

News Affair Team

Sat, Sep 12, 2026

कोटा.

भारतीय वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी ने एशियन गेम्स में देश के लिए खेलने का सपना देखा था। टीम में चयन हुआ तो उन्हें भारतीय टीम की किट मिली, सेरेमनी हुई और जापान जाने की तैयारी शुरू हो गई। लेकिन एशियन गेम्स शुरू होने से ठीक पहले उनका नाम टीम से हटा दिया गया। उनकी जगह दो बार एशियन गेम्स मेडल जीत चुकीं रोशीबीना देवी को टीम में शामिल कर लिया गया।

टीम से बाहर किए जाने के बाद दिव्यांशी का करीब 9 मिनट का वीडियो सामने आया है। वीडियो में वह रोती हुई नजर आ रही हैं। उन्होंने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्होंने फाइनल ट्रायल में रोशीबीना को हराया था और टीम में उनका चयन हो चुका था, तो आखिरी वक्त पर उनका नाम क्यों काट दिया गया।

वीडियो के अंत में दिव्यांशी ने अपने माता-पिता से माफी मांगी और खुद को नुकसान पहुंचाने की बात कही। इसके बाद वह कैमरा घर की छत की तरफ कर देती हैं और वीडियो खत्म कर देती हैं।

‘मां-पापा माफ करना...’, रोते हुए बोलीं दिव्यांशी

वीडियो में दिव्यांशी बेहद भावुक दिखाई देती हैं। वह अपने माता-पिता से माफी मांगती हैं और कहती हैं कि उन्होंने कभी ऐसा कदम उठाने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन अब वह खुद को बहुत परेशान महसूस कर रही हैं।

उन्होंने अपनी टीम किट भी दिखाई और कहा कि एशियन गेम्स के लिए उनका चयन हो चुका था। भारतीय जर्सी और किट मिलने के बाद उन्हें भरोसा था कि वह जापान में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। लेकिन आखिरी समय में टीम बदल दी गई।

फाइनल ट्रायल में रोशीबीना को हराने का दावा

दिव्यांशी का कहना है कि जून में हुए एशियन गेम्स के फाइनल सिलेक्शन ट्रायल में उन्होंने 60 किलो वर्ग में रोशीबीना देवी को हराया था। उनके मुताबिक ट्रायल में बेहतर प्रदर्शन करने के बाद भी उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। दिव्यांशी का सवाल है कि अगर फाइनल ट्रायल में उन्होंने रोशीबीना को हराया था, तो फिर उन्हें एशियन गेम्स में खेलने का मौका क्यों नहीं दिया गया।

फेडरेशन का जवाब- चोट के कारण नहीं भेजा

वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने दिव्यांशी के आरोपों पर कहा कि खिलाड़ी चोटिल थीं। उनके मुताबिक एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर पूरी तरह फिट खिलाड़ी को ही भेजा जा सकता है।

फेडरेशन का कहना है कि दिव्यांशी जिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर खुद को फिट बता रही हैं, वह निजी डॉक्टर की रिपोर्ट है। वहीं SAI की मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें पूरी तरह फिट नहीं बताया गया था। फेडरेशन अध्यक्ष ने कहा कि एशियन गेम्स में मेडल जीतना प्राथमिकता है, इसलिए अनफिट खिलाड़ी को टीम में भेजने का फैसला नहीं किया जा सकता।

श्रीनगर कैंप में कंधे में लगी थी चोट

दिव्यांशी के मुताबिक एशियन गेम्स की तैयारी के दौरान श्रीनगर में लगे 10 दिन के कैंप में रोशीबीना के साथ मुकाबले के दौरान उनके कंधे में चोट लगी थी।

उन्होंने बताया कि चोट के बाद 4-5 दिन अभ्यास नहीं किया, लेकिन इसके बाद रिकवर होकर फिर ट्रेनिंग शुरू कर दी। उन्होंने डॉक्टर से जांच कराई और टेपिंग के साथ खेलने की अनुमति मिलने का दावा किया। दिव्यांशी के मुताबिक उनकी MRI रिपोर्ट और डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन कोच और फेडरेशन के पास भी था।

पिता बोले- बेटी का चयन हो चुका था, किट और सेरेमनी भी हुई

दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार सुंडा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हुए फाइनल चयन ट्रायल में उनकी बेटी पहले स्थान पर रही थी। इसके बाद वह करीब तीन महीने तक SAI के भारतीय वुशु टीम कैंप में तैयारी करती रही। पिता का दावा है कि श्रीनगर में चोट लगने के बावजूद दिव्यांशी ने चीन में इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेला और सिल्वर मेडल जीता।

उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स के लिए बेटी का चयन हो चुका था। उसे टीम की किट दी गई, सेरेमनी हुई और जापान के लिए अंतिम एंट्री भी कन्फर्म थी। इसके बाद आखिरी समय में उसका नाम हटाकर रोशीबीना को टीम में शामिल कर लिया गया।

फेडरेशन ने कहा- वुशु में चोट लगना सामान्य

दिव्यांशी और उनके पिता ने श्रीनगर कैंप में रोशीबीना देवी पर जानबूझकर चोट पहुंचाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि फेडरेशन ने इस आरोप से इनकार किया है। फेडरेशन अध्यक्ष का कहना है कि वुशु मार्शल आर्ट का खेल है। मुकाबले के दौरान चोट लगना संभव है। इसलिए इसे जानबूझकर किया गया हमला बताना उचित नहीं है। उन्होंने रोशीबीना के अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। रोशीबीना पहले एशियन गेम्स में पदक जीत चुकी हैं।

जूनियर वर्ल्ड में ब्रॉन्ज, चीन में सिल्वर जीत चुकी हैं दिव्यांशी

कोटा की दिव्यांशी 60 किलो वर्ग में सांदा की खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। जून 2026 में चीन में हुए इंटरनेशनल वुशु टूर्नामेंट में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया। वह 2017 से कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में ट्रेनिंग कर रही हैं। राजस्थान के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं में वह 12 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।

19 सितंबर से जापान में एशियन गेम्स

20वें एशियन गेम्स का आयोजन जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होगा। वुशु के मुकाबले 20 से 24 सितंबर तक होंगे। भारतीय वुशु टीम में अब 7 खिलाड़ी हैं। इनमें पुरुष वर्ग में सूरज सिंह मायांगलंबम, आर्यन और विक्रांत बलियान हैं। महिला टीम में न्येमान वांगसू, अपर्णा, रोशीबीना देवी और लैंगलेंटोम्बी देवी हंजाबम शामिल हैं।

दिव्यांशी को टीम से बाहर किए जाने के बाद चयन प्रक्रिया और मेडिकल रिपोर्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ खिलाड़ी और उसका परिवार चयन के बाद आखिरी समय में नाम हटाए जाने का आरोप लगा रहा है, वहीं फेडरेशन इसे मेडिकल फिटनेस का मामला बता रहा है।

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