मेढ़की में ‘चुगली टैक्स’ लागू : कान भरोगे तो 5 हजार भरोगे; शराब पर पहले से 10 हजार का डंडा
News Affair Team
Sat, Feb 21, 2026
रायपुर.
गांव की चौपाल। चार लोग बैठे। बात शुरू हुई मौसम से… पहुंची सीधे पड़ोसी तक। फिर वही—“सुना है उसने ये कहा…”
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मेढ़की गांव ने तय कर लिया है—अब ऐसी ‘सुना है’ वाली राजनीति महंगी पड़ेगी।
ग्राम समिति की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला हुआ है कि किसी के खिलाफ चुगली करते पकड़े गए तो 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। चाहे सार्वजनिक मंच हो या निजी बातचीत, अगर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की—सीधा फाइन।

कहां है मामला?
यह पूरा घटनाक्रम छत्तीसगढ़ के Chhattisgarh के बालोद जिले के मेढ़की गांव का है, जो जिला मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर दूर है।
कुछ हफ्ते पहले गांव में दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। वजह—चौक-चौराहों पर बैठकर की गई आपसी टिप्पणियां और एक-दूसरे के खिलाफ फैलायी गई बातें।
तनाव बढ़ा तो ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक बुलाई। चर्चा लंबी चली। नतीजा साफ निकला—“गांव में मनमुटाव की जड़ चुगली है।”
फैसला: चुगली पर 5 हजार का फाइन
ग्रामसभा ने तय किया:
किसी भी चौक-चौराहे पर
सार्वजनिक स्थल पर
धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में
अगर कोई व्यक्ति किसी के खिलाफ चुगली करता पाया गया, तो उस पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम गांव में शांति, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

शराब पर पहले से सख्ती
वैसे मेढ़की में ‘डंडा नीति’ नई नहीं है।
गांव में पहले से नियम है:
शराब बेचने पर 10,000 रुपए जुर्माना
सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने पर 10,000 रुपए जुर्माना
इतना ही नहीं, शराब बेचने या पीने की सूचना देने वालों को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित भी किया जाता है।
अब इस बैठक में एक और नियम जुड़ा—धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में शराब पीकर आने पर 5,000 रुपए का जुर्माना।
गांव का तर्क: माहौल खराब नहीं होना चाहिए
गांव की सरपंच मंजूलता परस साहू, ग्राम पटेल होरी लाल गजपाल, ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव, समाजसेवी धनराज साहू और चंद्रेश हिरवानी का कहना है—
“कुछ लोग एक-दूसरे की चुगली कर विवाद की स्थिति पैदा कर रहे थे। इससे गांव का वातावरण प्रभावित हो रहा था। इसलिए सामूहिक सहमति से नियम बनाया गया है।”
उनका कहना है कि गांव में भाईचारा और आपसी सामंजस्य बनाए रखना प्राथमिकता है।
जुर्माने का पैसा कहां जाएगा?
गांव वालों ने तय किया है कि जुर्माने से मिली राशि जनहित के विकास कार्यों में खर्च होगी।
हर महीने बैठक कर नियमों की समीक्षा भी की जाती है। यानी गांव का अपना ‘लोकल गवर्नेंस मॉडल’ चल रहा है।
प्रशासन क्या कहता है?
इस पहल पर बालोद के अपर कलेक्टर अजय किशोर ने कहा कि ग्रामीणों ने गांव की बेहतरी और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से निर्णय लिया होगा।
उन्होंने साफ किया कि यह ग्राम समिति का अपना नियम है और प्रशासन इस पर टिप्पणी नहीं करेगा।
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