छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र : 1000 सवाल, 12 विधेयक और धर्मांतरण कानून पर घमासान तय
News Affair Team
Sat, Feb 21, 2026
रायपुर.
23 फरवरी से छत्तीसगढ़ की राजनीति का पारा चढ़ने वाला है। वजह—विधानसभा का बजट सत्र।
20 मार्च तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। लेकिन असली हलचल सिर्फ बजट को लेकर नहीं है। 1000 से ज्यादा सवाल, 12 से अधिक विधेयक और सबसे चर्चित—धर्मांतरण संशोधन विधेयक।
यानि सदन में सिर्फ आंकड़े नहीं, वैचारिक बहस भी होगी।

सियासी तैयारी: दोनों दल अलर्ट
बजट सत्र शुरू होने से पहले सियासी बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय जनता पार्टी ने 23 फरवरी को विधायक दल की बैठक बुलाई है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत उसी दिन राजीव भवन में कांग्रेस विधायक दल के साथ रणनीति बैठक करेंगे। स्पष्ट है—सदन में टकराव की तैयारी दोनों तरफ से है।
धर्मांतरण संशोधन विधेयक: क्या बदलेगा?
सबसे ज्यादा चर्चा जिस विधेयक को लेकर है, वह है प्रस्तावित धर्मांतरण संशोधन विधेयक। निर्माण कमेटी के सदस्यों के अनुसार, राज्य में धर्मांतरण को लेकर बढ़ते विवादों को देखते हुए गृहमंत्री Vijay Sharma के नेतृत्व में नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए 52 बैठकों में चर्चा हुई। सरकार का तर्क है—धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया स्पष्ट और कानूनी हो, ताकि विवाद न बढ़ें।
प्रस्तावित नियम क्या कहते हैं?
ड्राफ्ट के मुताबिक:
धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले जिला प्रशासन को फॉर्म भरकर सूचना देना अनिवार्य
प्रशासन पुलिस को सूचना देगा और कारणों की जांच होगी
प्रक्रिया का पालन न होने पर धर्मांतरण अमान्य माना जाएगा
धर्म परिवर्तन के बाद भी 60 दिन के भीतर डिक्लेरेशन देना होगा
जिला प्रशासन के सामने पेश होकर सत्यापन अनिवार्य
अगर कोई व्यक्ति लालच, दबाव, विवाह या धोखाधड़ी के आधार पर धर्म परिवर्तन कराता है, तो यह अवैध माना जाएगा। महिलाओं, नाबालिगों और SC/ST समुदाय के अवैध धर्मांतरण पर 2 से 10 साल तक की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना प्रस्तावित है।
सामूहिक धर्मांतरण पर 3 से 10 साल की जेल और 50 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। कोर्ट पीड़ित को 5 लाख रुपये तक मुआवजा देने का आदेश दे सकता है। सबसे अहम—धर्म परिवर्तन वैध है या नहीं, यह साबित करने की जिम्मेदारी धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति की होगी।
छत्तीसगढ़ में कानून की जरूरत क्यों बताई जा रही?
सरकार का कहना है कि बस्तर, जशपुर और रायगढ़ जैसे आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण को लेकर तनाव बढ़ा है। नारायणपुर क्षेत्र में तो यह विवाद गुटीय संघर्ष में बदल चुका है।
फिलहाल राज्य में धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला स्पष्ट नियम नहीं है। अक्सर लोग किसी धार्मिक प्रभाव में आकर धर्म अपनाते हैं और खुद को उस धर्म का अनुयायी घोषित कर देते हैं। सरकार का तर्क है कि स्पष्ट कानून से विवाद कम होंगे और कानून-व्यवस्था बेहतर रहेगी।
किन राज्यों के कानून की स्टडी?
गृह विभाग ने अन्य राज्यों के धर्मांतरण कानूनों का अध्ययन किया है। इनमें शामिल हैं:
ओडिशा
झारखंड
मध्य प्रदेश
उत्तराखंड
अरुणाचल प्रदेश
उत्तर प्रदेश
गुजरात
कर्नाटक
हिमाचल प्रदेश
इन राज्यों के प्रावधानों को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ के लिए ड्राफ्ट तैयार किया गया है।
धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम क्या कहता है?
भारत में हर व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार है। धर्म की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल अधिकार है। लेकिन जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कानूनन अपराध माना जा सकता है—इसी आधार पर प्रस्तावित कानून तैयार किया जा रहा है।
राज्य में चर्चों की स्थिति
छत्तीसगढ़ में लगभग 727 चर्च पंजीकृत बताए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ें तो संख्या 900 के पार मानी जाती है।
जशपुर के कुनकुरी में स्थित Cathedral of Our Lady of the Rosary एशिया के बड़े रोमन कैथोलिक कैथेड्रल में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1979 में हुई थी।
वहीं विश्रामपुर का City of Rest Church 1868 में बना था और राज्य के सबसे पुराने चर्चों में माना जाता है।
जनगणना के आंकड़े क्या कहते हैं?
2011 की जनगणना के मुताबिक छत्तीसगढ़ की धार्मिक संरचना इस प्रकार है:
93.25% हिंदू
1.92% ईसाई
2.02% मुस्लिम
0.27% सिख
0.27% बौद्ध
1.94% अन्य धर्म
0.09% कोई धर्म नहीं
साक्षरता दर में भी धर्म आधारित अंतर दिखता है। उदाहरण के लिए ईसाई समुदाय की औसत साक्षरता दर 77.85% दर्ज की गई थी, जबकि हिंदू समुदाय में यह 69.79% थी।
विपक्ष क्या कह सकता है?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल संभवतः इस विधेयक को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़कर सवाल उठा सकते हैं।
क्या यह कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर असर डालेगा? क्या प्रशासनिक प्रक्रिया ज्यादा जटिल होगी? या क्या यह सिर्फ कानून-व्यवस्था सुधारने का प्रयास है? ये सवाल सदन में गूंज सकते हैं।
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