छत्तीसगढ़ की नेशनल गेम्स की मेजबानी पर नजर : रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी; पंडरापाठ में 25 करोड़ तक का सेंटर
News Affair Team
Sun, Sep 13, 2026
रायपुर.
छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को गांव और वनांचल से निकालकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। शनिवार को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में हुई छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी और जनरल काउंसिल की बैठक में खेल सुविधाओं के विस्तार से लेकर खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और खेल संघों की समस्याओं के समाधान तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में बताया कि रायपुर में 60 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी बनाई जा रही है। वहीं जशपुर के पंडरापाठ में 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से एक और आर्चरी अकादमी तैयार की जा रही है। सरकार का फोकस आधुनिक सुविधाओं और प्रशिक्षण के जरिए प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर है।

40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए कोशिश
बैठक में 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के लिए प्रयास तेज करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि प्रदेश को मेजबानी मिलती है तो खेलों के कुछ आयोजन बस्तर में कराने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
इससे बस्तर के खिलाड़ियों को अपने ही क्षेत्र में बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलने के साथ प्रदेश के पर्यटन और खेल अधोसंरचना को भी बढ़ावा मिल सकता है।
रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
मुख्यमंत्री ने बताया कि रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं। रायपुर की आर्चरी अकादमी में खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीक और बेहतर कोचिंग उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार की कोशिश है कि केवल बड़े शहरों तक सीमित प्रतिभाओं के बजाय गांव और वनांचल के खिलाड़ियों को भी समान सुविधाएं मिलें।
पंडरापाठ में तीरंदाजी को मिलेगा नया ठिकाना
जशपुर के पंडरापाठ में बनने वाली आर्चरी अकादमी को वनांचल की पारंपरिक खेल प्रतिभाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के युवाओं में तीरंदाजी की स्वाभाविक प्रतिभा है। पहाड़ी कोरवा समुदाय में तो तीरंदाजी लंबे समय से परंपरा का हिस्सा रही है। अकादमी बनने के बाद जशपुर और आसपास के इलाकों के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
बस्तर और सरगुजा ओलंपिक से गांवों तक पहुंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिल रहा है। बस्तर ओलंपिक का आयोजन हर साल कराने की बात भी कही गई। साय ने कहा कि बस्तर के युवाओं में खेल प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और सही दिशा देने की है।
खेल उत्कर्ष मिशन में होगी प्रतिभाओं की तलाश
सरकार खेल उत्कर्ष मिशन के जरिए प्रदेशभर में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं देने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ी चाहे बड़े शहर से हो या किसी दूरस्थ गांव अथवा वनांचल से, उसे आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए।
उद्योगों से जोड़े जाएंगे खेल संघ
खेलों के लिए सरकारी संसाधनों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की भी तैयारी है। मुख्यमंत्री ने खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने के निर्देश दिए। योजना के तहत अलग-अलग उद्योग समूहों को अलग-अलग खेलों और खेल संघों से जोड़ा जाएगा। इससे खिलाड़ियों को उपकरण, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए अतिरिक्त संसाधन मिल सकेंगे।
खेल अलंकरण फिर शुरू, खिलाड़ियों को सम्मान के साथ आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद खेल अलंकरण समारोह फिर शुरू किया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मान के साथ आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
केदार कश्यप बोले- वनांचल में तीरंदाजी और मलखंब की प्रतिभाएं
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचल में तीरंदाजी के साथ-साथ अन्य खेलों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासी युवा मलखंब में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन देने की जरूरत बताई।
जिलों में भी बनेंगे ओलंपिक संघ
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने बैठक में संघ की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। बैठक में विभिन्न खेल संघों की समस्याओं, आगामी प्रतियोगिताओं और नेशनल गेम्स की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।
प्रदेश के अन्य जिलों में जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाने पर भी सहमति बनी। बैठक में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि और सदस्य मौजूद रहे।
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