UNSC में भारत की स्थायी सीट पर रूस का समर्थन : लावरोव बोले- भारत-ब्राजील को मिले जगह; जर्मनी-जापान की दावेदारी का विरोध
न्यूयॉर्क.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को रूस का समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि रूस भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करता है।
लावरोव ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त स्थायी सीटों का विरोध किया। उन्होंने जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए कहा कि दोनों देश सैन्यवाद और बदले की भावना की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह रूस का रुख है; जर्मनी और जापान की UNSC स्थायी सदस्यता की मांग पर अलग-अलग देशों के समर्थन और विरोध की अपनी-अपनी स्थितियां हैं।
रूस बोला- मौजूदा स्थायी सदस्यों के अधिकार बने रहें
लावरोव ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दौरान मौजूदा स्थायी सदस्यों के अधिकार और विशेषाधिकार कमजोर नहीं किए जाने चाहिए। रूस पहले भी UNSC के विस्तार और मौजूदा वीटो व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में अपनी स्थिति रख चुका है।
UNSC में अभी 15 सदस्य
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन 5 स्थायी सदस्य हैं। इनके पास वीटो अधिकार है। बाकी 10 सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।
स्थिति | सदस्य |
|---|---|
स्थायी सदस्य | 5 |
गैर-स्थायी सदस्य | 10 |
कुल सदस्य | 15 |
वीटो अधिकार | 5 स्थायी सदस्यों के पास |
भारत की दावेदारी क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा परिषद 21वीं सदी की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती। विदेश मंत्रालय भी सुरक्षा परिषद में स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार की वकालत करता रहा है।
भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत की GDP 2025 में करीब 3.96 ट्रिलियन डॉलर रही।
भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश होने के साथ संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना गतिविधियों में भी लंबे समय से योगदान देता रहा है। यही वजह है कि UNSC सुधार की बहस में भारत की भूमिका लगातार चर्चा में रहती है।

2023 के सर्वे में भारत को लेकर क्या अनुमान था?
Atlantic Council के Global Foresight 2023 सर्वे में 149 विशेषज्ञों से पूछा गया था कि अगले 10 साल में अगर UNSC में नई स्थायी सीटें जुड़ती हैं तो कौन से देश उनमें शामिल हो सकते हैं।
इस सर्वे में 26% उत्तरदाताओं ने भारत का नाम लिया था। इसके बाद जापान 11%, ब्राजील 9% और जर्मनी 7% पर थे। हालांकि, यह 2023 का विशेषज्ञ सर्वे था और इसे वर्तमान समय में भारत की सदस्यता की कोई आधिकारिक संभावना या पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता।
भारत की मांग कब से चल रही है?
भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग 1990 के दशक में भी संयुक्त राष्ट्र की बहसों में प्रमुखता से उठी थी। 2008 में सुरक्षा परिषद सुधार पर औपचारिक अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) शुरू हुई। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 सितंबर 2008 को इस प्रक्रिया की शुरुआत का फैसला किया था।
इसके बाद 2005 में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने G4 के रूप में UNSC सुधार और स्थायी सीटों के विस्तार के लिए साझा पहल की। G4 का प्रस्ताव सुरक्षा परिषद की सदस्य संख्या बढ़ाने से जुड़ा था।
2026 में भी इस मुद्दे पर अंतर-सरकारी वार्ता जारी है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 80वें सत्र में भी UNSC सुधार पर वार्ता जारी रखने का फैसला किया गया है।

UNSC का विस्तार इतना मुश्किल क्यों?
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108 के तहत चार्टर में संशोधन के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सदस्य देशों के दो-तिहाई हिस्से की पुष्टि जरूरी है। इसमें सभी मौजूदा स्थायी सदस्यों की पुष्टि भी शामिल है। यानी UNSC के ढांचे में बदलाव के लिए मौजूदा पांचों स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी होगी।
क्या भारत ने कभी चीन की UNSC सीट का समर्थन किया था?
इतिहास में भारत और चीन की UNSC सदस्यता को लेकर एक दिलचस्प प्रसंग भी रहा है। 1955 में संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि भारत को UNSC की स्थायी सीट देने का कोई औपचारिक या अनौपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला था।
नेहरू ने साथ ही कहा था कि भारत ने चीन को संयुक्त राष्ट्र में उसका उचित स्थान दिलाने का समर्थन किया है। नेहरू आर्काइव में दर्ज 1955 के दस्तावेज में यह बात स्पष्ट रूप से दर्ज है।
हालांकि, अगस्त 1955 के नेहरू के एक दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि अमेरिका की ओर से अनौपचारिक तौर पर ऐसी संभावना का सुझाव दिया गया था कि चीन को संयुक्त राष्ट्र में शामिल किया जाए और UNSC में उसकी जगह भारत ले। नेहरू ने इसे स्वीकार करने से इनकार करते हुए चीन को पहले उसका उचित स्थान दिए जाने की बात कही थी।
अब तस्वीर क्या है?
2026 में रूस ने एक बार फिर भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का खुला समर्थन किया है। दूसरी ओर, UNSC सुधार पर देशों के बीच स्थायी सदस्यों की संख्या, अफ्रीकी प्रतिनिधित्व, वीटो और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों पर अभी भी मतभेद हैं। इसलिए रूस का समर्थन भारत की दावेदारी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान है, लेकिन इससे भारत की स्थायी सदस्यता तय नहीं होती।
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