जयशंकर बोले- आतंकवाद जीरो टॉलरेंस जारी रहेगा : सीमा पार से आतंकी गतिविधियों पर जिम्मेदारी तय होगी; आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करेंगे
नई दिल्ली.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ देश की जीरो टॉलरेंस नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों में कोई सरकार शामिल होती है, तो उसे इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
जयशंकर ने कहा-
"शांति का अर्थ केवल युद्ध का न होना नहीं है। दुनिया लगातार सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा संबंधी दबावों से गुजर रही है। ऐसे हालात में वैश्विक समुदाय को स्थिरता, सुरक्षा और भरोसेमंद व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।"
न्यूयॉर्क में शनिवार को UNGA के आम सत्र को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उनके मुताबिक आतंकवाद और दोस्ती या सद्भावना साथ-साथ नहीं चल सकते और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अपना रवैया बदलना होगा।
पाकिस्तान का नाम लिए बिना दिया कड़ा संदेश
जयशंकर ने अपने भाषण में पाकिस्तान का सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन एक दिन पहले महासभा में दिए गए पाकिस्तानी पक्ष के बयान का संदर्भ देते हुए कहा कि एक ऐसे पक्ष ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया, जो आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिश करता है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य मानने या उसके परिणामों से बचने की कोई कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। जयशंकर ने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर जीरो टॉलरेंस का रुख कमजोर नहीं होना चाहिए।
संघर्ष और टकराव को बताया बड़ी चिंता
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय कई संघर्षों और टकरावों से गुजर रही है। शांति बनाए रखने में असफलता केवल सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आर्थिक प्रगति और वैश्विक स्थिरता पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि युद्धों का असर उन देशों पर भी पड़ रहा है, जो सीधे संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं। उनके मुताबिक जिन देशों का संघर्ष से सीधा संबंध नहीं है, वे भी इसकी कीमत चुका रहे हैं।
खाड़ी में जहाजों और नाविकों पर हमले का मुद्दा उठाया
जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री यात्रियों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा तथा व्यापार के निर्बाध आवागमन को बनाए रखने की अपील की।
इससे पहले UNGA के दौरान भारत और लाइबेरिया ने समुद्री जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग के लिए 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' की पहल भी शुरू की थी। उन्होंने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को भी अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव योगदान देने को तैयार है।
फिलिस्तीन के लिए टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन
पश्चिम एशिया की स्थिति पर जयशंकर ने भारत का पुराना रुख दोहराते हुए टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि स्थायी और दीर्घकालिक शांति के लिए इजराइल और फिलिस्तीन के दो स्वतंत्र राज्यों के समाधान की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है।
एक दिन पहले पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर भी दिया था जवाब
UNGA से इतर एक मीडिया बातचीत में एक पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। जवाब में जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी।
इसके बाद UNGA में अपने भाषण के दौरान उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिशों को खारिज किया।
भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद लंबे समय से प्रमुख मुद्दा
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सीमा पार आतंकवाद लंबे समय से प्रमुख विवादों में रहा है। भारत पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों को समर्थन और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने के आरोप लगाता रहा है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।
जयशंकर का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर मतभेद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सामने आते रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जयशंकर के UNGA संबोधन से एक दिन पहले अपने भाषण में कश्मीर और 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का मुद्दा उठाया था।
जयशंकर के भाषण की प्रमुख बातें
आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी।
सीमा पार आतंकवाद में किसी सरकार की भूमिका होने पर जवाबदेही तय करने की बात।
आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा।
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं।
पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन।
फिलिस्तीनियों के लिए भारत की मानवीय सहायता जारी रखने की बात।
वैश्विक संघर्षों के बीच खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन