राम मंदिर चढ़ावा चोरी में 3 शिकायतें, पर FIR नहीं : अखिलेश यादव बोले- भगवान की FIR बड़ी होगी; SIT दूसरे दिन भी जांच में जुटी
News Affair Team
Tue, Jun 16, 2026
लखनऊ.
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े राजनीतिक, धार्मिक और कानूनी मुद्दे का रूप लेता जा रहा है। मंगलवार को इस मामले में तीन अलग-अलग शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं, जबकि विशेष जांच दल (SIT) लगातार दूसरे दिन भी मंदिर परिसर में जांच करता रहा। हालांकि, अब तक किसी भी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे, यूपी युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला और करणी सेना की ओर से पुलिस को अलग-अलग शिकायतें दी गई हैं। सभी ने चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

इस बीच, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एफआईआर दर्ज न होने पर तंज कसते हुए कहा,
भगवान की FIR बड़ी होगी, हम-आप जो कानून वाली FIR करवाते हैं, उसका क्या करोगे?
राम मंदिर पहुंची SIT, दूसरे दिन भी जारी रही पूछताछ
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे SIT की टीम राम मंदिर परिसर पहुंची। जांच दल के साथ अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर भी मौजूद रहे। टीम ने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।
सूत्रों के मुताबिक, जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि दान राशि की गिनती से जुड़े कर्मचारियों की मंदिर में प्रवेश और निकास के समय किस तरह की सुरक्षा जांच होती थी। प्रारंभिक पूछताछ में कुछ अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों की एंट्री के समय तो चेकिंग होती थी, लेकिन बाहर निकलते समय तलाशी की कोई नियमित व्यवस्था नहीं थी।

जांच टीम सोमवार को भी करीब सात घंटे तक मंदिर परिसर में रही थी। इस दौरान ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य गोपाल राव समेत 42 कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ की गई थी।
अब तक दो करोड़ रुपए की बरामदगी, पांच नाम जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, मामले में अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन लोगों की निशानदेही पर लगभग दो करोड़ रुपए की राशि बरामद की जा चुकी है।

बताया जा रहा है कि सभी आरोपी किसी न किसी रूप में दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कार्यों में शामिल थे। लवकुश और अनुकल्प को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच जारी है।
करणी सेना बोली- दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो होगा आंदोलन
करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अभिनव सिंह ने मामले को करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा बताते हुए कहा कि यदि जल्द मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा।
उन्होंने कहा,
आम मामलों में पुलिस तुरंत गिरफ्तारी करती है, लेकिन यहां आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास पर चोट है।
राजनीति गरमाई, विपक्ष ने सरकार को घेरा
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है।
अखिलेश यादव ने उठाए बड़े सवाल

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, मामला केवल चढ़ावे की चोरी तक सीमित नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जांच चढ़ावे से आगे बढ़कर चंदे, जमीन और मंदिर आंदोलन से जुड़ी बहुमूल्य संपत्तियों तक पहुंचनी चाहिए।
अखिलेश ने सवाल उठाया कि आखिर अयोध्या के इस कथित "महाघोटाले" के पीछे कौन लोग हैं और उनकी जवाबदेही क्यों तय नहीं हो रही।
डिंपल यादव ने स्वतंत्र जांच की मांग की

मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने कहा,
केवल चढ़ावे की जांच काफी नहीं है। सरकार जहां-जहां मंदिर कॉरिडोर और धार्मिक परियोजनाएं बना रही है, वहां भी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अवधेश प्रसाद बोले- सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच

अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा,
मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित SIT ही उचित होगी।
भाजपा का जवाब- जांच पूरी होने दें

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा,
मंदिर ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से जांच की मांग की थी। उसी आधार पर SIT का गठन किया गया है। जिन लोगों ने कभी राम मंदिर आंदोलन का समर्थन नहीं किया, वे आज इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
ट्रस्ट कर्मचारी टिन्नू यादव ने दी सफाई

आरोपों के घेरे में आए रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने वीडियो जारी कर अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है।
उन्होंने कहा कि वे 1993 से विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हुए हैं और उनकी संपत्ति मंदिर निर्माण से पहले की है। उन्होंने दावा किया कि उनका काम केवल मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं संभालना था और दान राशि की गिनती से उनका कोई लेना-देना नहीं था।

पूर्व कैंप इंचार्ज ने बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व कैंप ऑफिस प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि शुरुआती जानकारी के आधार पर ट्रस्ट के कर्मचारियों से ज्यादा संदेह उन लोगों पर जाता है जिन्हें दान राशि गिनने के लिए बाहरी तौर पर लगाया जाता था।
उनका दावा है कि कई बार वास्तविक बैंक कर्मचारियों के बजाय दैनिक भुगतान पर काम करने वाले लोगों को गिनती में लगाया गया, जिससे अनियमितताओं की संभावना बढ़ गई।
1989 की रामशिलाओं का मुद्दा भी फिर चर्चा में

धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने अपनी शिकायत में एक और बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश और विदेश से आईं सोने, चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की करीब 1250 पूजित रामशिलाओं का आज कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
दुबे का कहना है कि ये शिलाएं वर्ष 2002 तक कारसेवकपुरम में सुरक्षित थीं, लेकिन बाद में उनका कोई सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान चढ़ावा विवाद के साथ इन शिलाओं की भी जांच की जाए।

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला
राम मंदिर देश की सबसे बड़ी धार्मिक परियोजनाओं में से एक है। मंदिर निर्माण और दर्शन व्यवस्था से जुड़े हर निर्णय पर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की नजर रहती है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों ने स्वाभाविक रूप से लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
संतों और धार्मिक संगठनों का कहना है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

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