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21st October 2026

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40% कंपनियां अब मांग रही AI स्किल्स : पारंपरिक डिग्रियों पर संकट; चीन में 1200 यूनिवर्सिटी प्रोग्राम बंद, कर्नाटक ने 1300 से ज्यादा सीटें घटाईं

News Affair Team

Tue, Jun 16, 2026

नई दिल्ली.

देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने IT, कॉमर्स, लॉ, डिजाइन, ट्रांसलेशन और लाइब्रेरी साइंस जैसे पारंपरिक कोर्सेज की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस काम के लिए लाखों छात्र हर साल डिग्री लेकर निकलते हैं, वही काम अब AI टूल्स तेजी से ऑटोमेट कर रहे हैं या उनका दायरा सीमित कर रहे हैं।

HR कंपनी टीमलीज के मुताबिक अब करीब 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल्स’ को प्राथमिकता दे रही हैं, यानी डिग्री के साथ AI टूल्स का ज्ञान अनिवार्य होता जा रहा है। वहीं नैस्कॉम की 2024 रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 82% BCA और MCA ग्रेजुएट्स के पास AI की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है।

2030 तक बदल सकता है जॉब मार्केट

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार आने वाले वर्षों में वही प्रोफेशनल टिके रहेंगे जो AI की मदद से अपनी प्रोडक्टिविटी 40% तक बढ़ा सकें। IBM इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है कि

AI इंसानों की जगह नहीं लेगा, लेकिन AI इस्तेमाल करने वाले लोग उन लोगों की जगह ले लेंगे जो इसका उपयोग नहीं करेंगे।

फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 के मुताबिक 2030 तक करीब 22% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

किन कोर्सेज पर सबसे ज्यादा असर?

AI के बढ़ते उपयोग से कई पारंपरिक कोर्सेज की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे है-

  • ट्रांसलेशन (BA/MA): जोखिम 88%

  • BCA/MCA: 82%

  • ग्राफिक्स डिजाइन डिप्लोमा: 79%

  • लॉ (LLB/BA-LLB): 70%

  • कॉमर्स (B.Com/M.Com): 61%

  • लाइब्रेरी साइंस: 55%

कुल मिलाकर करीब 70-80 लाख छात्रों की पढ़ाई और करियर स्ट्रक्चर पर असर की संभावना जताई जा रही है।

“डिग्री नहीं, स्किल्स बनेंगी असली पहचान”

एक्सपर्ट्स का कहना है कि पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप बदल रहा है। अब केवल थ्योरी आधारित शिक्षा की जगह प्रैक्टिकल और AI-इंटीग्रेटेड स्किल्स की मांग बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार छात्रों को लाइव प्रोजेक्ट्स, AI टूल्स की ट्रेनिंग और इंडस्ट्री-लेवल अनुभव पर फोकस करना होगा।

फ्रेशर्स और जॉब मार्केट पर असर

आईटी सेक्टर में शुरुआती हायरिंग पर दबाव देखा जा रहा है। Infosys, Wipro और TCS जैसी कंपनियों ने कुछ समय के लिए फ्रेशर्स भर्ती में सतर्कता दिखाई है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शॉर्ट-टर्म ट्रेंड है और लॉन्ग टर्म में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

चीन और भारत की रणनीति में बदलाव

चीन ने 2021 से 2025 के बीच 12,200 से अधिक यूनिवर्सिटी प्रोग्राम बंद किए हैं और AI, रोबोटिक्स व सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में नए कोर्स शुरू किए हैं।

भारत में भी कर्नाटक सरकार ने 1,300 से ज्यादा कोर्स सीटें घटाई हैं और कई BA, BSc व BCom कॉम्बिनेशन्स बंद किए गए हैं।

क्या है आगे का रास्ता?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में “10x प्रोफेशनल” यानी ऐसे लोग सबसे आगे रहेंगे जो AI की मदद से 10 लोगों जितना काम अकेले कर सकें। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) भी भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं और AI स्किल्ड युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

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