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"मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझा लेंगे" : नवारो बोले- रूसी तेल पर भारत की आलोचना की तो सोशल मीडिया पर मिली गालियां

News Affair Team

Wed, Aug 12, 2026

वॉशिंगटन.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने दावा किया है कि रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना करने पर उन्हें सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स की तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा। नवारो ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही।

नवारो ने बताया कि उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत की ऊर्जा नीति पर एक लेख लिखा था। इसमें उन्होंने भारत के रूसी कच्चे तेल खरीदने की आलोचना की थी। लेख प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स ने उन्हें निशाना बनाया और गालियां दीं।

रूसी तेल को लेकर भारत-अमेरिका में मतभेद

नवारो का बयान ऐसे समय आया है, जब रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद बने हुए हैं। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने कच्चा तेल अपेक्षाकृत कम कीमत पर बेचना शुरू किया था। इसके बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल खरीद में तेजी की।

अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों का तर्क है कि भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद से रूस को राजस्व मिलता है, जिसका इस्तेमाल वह युद्ध में कर सकता है। नवारो पहले भी भारत की तेल खरीद नीति पर सवाल उठाते रहे हैं।

उनका आरोप रहा है कि भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे अपनी रिफाइनरियों में पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों में बदलता है और फिर इनका निर्यात दूसरे देशों में करता है।

वहीं, भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा खरीद देश की जरूरतों, उपलब्धता और राष्ट्रीय हित के आधार पर होती है। सरकार का जोर लोगों को पर्याप्त और किफायती ईंधन उपलब्ध कराने पर है।

नवारो बोले- मोदी और ट्रम्प सुलझा लेंगे टैरिफ का मुद्दा

पीटर नवारो ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच अच्छे संबंध हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े प्रस्तावित टैरिफ के मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझा लेंगे।

दरअसल, 31 जुलाई को अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से रूस से जुड़े देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले एक विधेयक को मंजूरी दी थी। इसमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, यह अभी कानून नहीं बना है और इसे आगे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया से गुजरना है।

पहले 500% टैरिफ का था प्रस्ताव

रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव को लेकर इससे पहले 500% तक टैरिफ की बात सामने आई थी। बाद में प्रस्तावित अधिकतम दर को घटाकर 100% किए जाने की जानकारी सामने आई।

इस कदम का मकसद रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली कमाई को प्रभावित करना और उसकी युद्ध क्षमता पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया गया है।

जून में रूस से भारत ने खरीदा रिकॉर्ड तेल

आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में भारत ने रूस से करीब 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 52.4% था। यानी जून में भारत के आयात किए गए हर दो बैरल कच्चे तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया।

मई की तुलना में जून में रूस से भारत के कच्चे तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ रूस भारत के लिए लगातार सबसे बड़ा कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

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