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ट्रम्प ने शेयर किया ओबामा की गिरफ्तारी का AI वीडियो : FBI एजेंट्स ने जमीन पर गिराकर हथकड़ी लगाई; डेमोक्रेट्स बोले- लोकतंत्र के लिए खतरा

admin

Mon, Jul 21, 2025

वॉशिंगटन.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फर्जी AI वीडियो शेयर किया है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को FBI एजेंट्स द्वारा व्हाइट हाउस में गिरफ्तार करते दिखाया गया है। यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया है और इसे लेकर तीखी आलोचनाएं हो रही हैं।

वीडियो की शुरुआत ओबामा के एक पुराने बयान से होती है- "कोई भी, खासकर राष्ट्रपति भी, कानून से ऊपर नहीं है।"

इसके बाद वीडियो में दिखाया गया है कि ओबामा ओवल ऑफिस में ट्रम्प के पास बैठे हैं, तभी तीन एजेंट्स अंदर आते हैं, ओबामा को गिराकर हथकड़ी लगाते हैं और ट्रम्प यह सब देखकर मुस्कुराते हैं। वीडियो के अंत में ओबामा जेल की पोशाक में नजर आते हैं।

ट्रम्प की ओर से कोई सफाई नहीं, आलोचना तेज

ट्रम्प ने इस वीडियो को वास्तविक या काल्पनिक बताने की कोई सफाई नहीं दी है। सोशल मीडिया यूज़र्स, पत्रकारों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे "भड़काऊ और लोकतंत्र विरोधी" बताया है।
कई लोगों का कहना है कि यह वीडियो एपस्टीन केस से ध्यान हटाने की रणनीति हो सकती है।

पुराने आरोप फिर सुर्खियों में

ट्रम्प ने कुछ हफ्ते पहले ओबामा और उनके प्रशासन पर आरोप लगाया था कि 2016 के चुनाव में उन्होंने ट्रम्प को हराने के लिए साजिश रची थी।

पूर्व खुफिया अधिकारी तुलसी गबार्ड ने भी इस पर रिपोर्ट पेश की, जिसमें दावा किया गया कि ओबामा प्रशासन ने रूस के साथ साठगांठ का झूठ फैलाकर तख्तापलट की साजिश की थी।

गबार्ड की रिपोर्ट: 6 बड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप

गबार्ड ने जिन प्रमुख नामों को साजिश में शामिल बताया है, उनमें शामिल हैं:

  • जेम्स क्लैपर (राष्ट्रीय खुफिया निदेशक)

  • जॉन ब्रेनन (CIA निदेशक)

  • जॉन कैरी (विदेश मंत्री)

  • सुजैन राइस (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार)

  • एंड्रयू मैक्केब (FBI डिप्टी डायरेक्टर)

गबार्ड ने कहा कि इन सभी ने मिलकर एक झूठी खुफिया रिपोर्ट तैयार की और उसे मीडिया में लीक करवा कर ट्रम्प के खिलाफ माहौल बनाया।

विशेषज्ञ बोले – AI के जरिए भ्रम फैलाना खतरनाक

विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक उद्देश्य से AI का दुरुपयोग आने वाले समय में लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
ट्रम्प जैसे प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा इस तरह का फर्जी वीडियो साझा करना जनता को गुमराह करने की साजिश है।

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