एक फोन कॉल लीक बदली थाईलैंड-कंबोडिया जंग में : ‘एमराल्ड ट्रायंगल’ की मामूली मुठभेड़ के बाद बने दोस्त से दुश्मन; 33 की मौत, 2 लाख से ज्यादा बेघर
बैंकॉक/नोम पेन्ह
28 मई 2025 को दक्षिण-पूर्व एशिया की तीन सीमाओं (थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस) से सटे "एमराल्ड ट्रायंगल" क्षेत्र में एक मामूली मुठभेड़ ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया। अब तक 33 लोगों की मौत हो चुकी है, 200,000 से अधिक लोग अपने घरों से पलायन कर चुके हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है कि यह संघर्ष पूरे आसियान क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है।
इस घटना के बाद थाईलैंड और कंबोडिया ने सीमा पर और ज्यादा सैनिक तैनात कर दिए। इसे शांत करने के लिए थाईलैंड की तत्कालीन पीएम पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने 15 जून को कंबोडिया के पूर्व पीएम हुन सेन को फोन लगाया।
दोनों नेताओं के बीच 17 मिनट बात हुई जो कि लीक हो गई। इससे थाईलैंड की सियासत में भूचाल आ गया और शिनवात्रा को महज 15 दिन में इस्तीफा देना पड़ा और आखिर में 24 जुलाई को थाईलैंड और कंबोडिया के बीच संघर्ष शुरू हो गया। अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि उनकी मध्यस्थता से दोनों देश सीजफायर वार्ता को तैयार हो गए हैं।
इस स्टोरी में जानिए क्या है मंदिरों का विवाद, दुश्मनी में कैसे बदल गई दो देशों की दोस्ती और फोन कॉल लीक में ऐसा क्या, जिसने करा दी जंग…
अध्याय 1: संघर्ष की पृष्ठभूमि - 118 वर्षों की असहमति

प्राचीन विरासत पर खिंची सीमा
1907 में जब कंबोडिया फ्रांसीसी उपनिवेश था, फ्रांस ने थाईलैंड के साथ एक समझौते के तहत 817 किलोमीटर लंबी सीमा निर्धारित की। इस सीमा रेखा में दो ऐसे मंदिर - प्रीह विहियर और ता मुएन थॉम - थे, जिनकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत दोनों देश साझा करते थे। यही दोनों मंदिर आज 2025 के संघर्ष के मूल में हैं।
प्रीह विहियर मंदिर विवाद
2008 से लेकर 2011 तक थाईलैंड और कंबोडिया के बीच इस मंदिर को लेकर कई झड़पें हो चुकी हैं। 2013 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना, लेकिन थाई सेना और बौद्ध संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया।
अध्याय 2: दोस्ती से दुश्मनी - शिनवात्रा और हुन सेन

1990 का दशक : निवेश से मित्रता तक
थाई कारोबारी थाकसिन शिनवात्रा ने 1990 के दशक में कंबोडिया में निवेश करना शुरू किया। यह संबंध धीरे-धीरे व्यक्तिगत मित्रता में बदला और जब 2001 में थाकसिन थाईलैंड के प्रधानमंत्री बने, तो हुन सेन पहले से ही कंबोडिया में सत्ता के केंद्र में थे।
2006 का तख्तापलट और शरण
थाई सेना ने 2006 में तख्तापलट कर थाकसिन को सत्ता से हटा दिया। उन्होंने कंबोडिया में शरण ली और 2009 में हुन सेन ने उन्हें अपना आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया।
अगली पीढ़ी: पाइतोंग्तार्न और हुन मैनेट
2023 में जब हुन सेन ने प्रधानमंत्री पद अपने बेटे हुन मैनेट को सौंपा और थाकसिन की बेटी पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा थाई प्रधानमंत्री बनीं, तो सभी को लगा कि मित्रता आगे भी कायम रहेगी। लेकिन 2025 में सब कुछ बदल गया।
अध्याय 3: 28 मई की सुबह - एमराल्ड ट्रायंगल में टकराव

सुबह 6 बजे एमराल्ड ट्रायंगल क्षेत्र में अचानक गोलीबारी शुरू हुई। दस मिनट की मुठभेड़ में कंबोडियाई सेना के लेफ्टिनेंट सुओन रौन की मौत हो गई। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगाया।
इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर और अधिक सैनिक तैनात कर दिए।
अध्याय 4: 17 मिनट की कॉल - सियासी तूफान की शुरुआत
15 जून को थाईलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने पूर्व कंबोडियाई पीएम हुन सेन को फोन किया। बातचीत की रिकॉर्डिंग 18 जून को लीक हो गई। इसमें पाइतोंग्तार्न सेना प्रमुख के व्यवहार की आलोचना करती सुनाई दीं।
पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा और हुन सेन की कॉल लीक हुई
पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा...
मुझे आपसे सीमा विवाद पर बात करनी है। हम दोनों ही शांति चाहते हैं। 'चाचा' मैं नहीं चाहती कि आप उनकी (सेना) बातें सुनें। वे हमारे विरोधी हैं।
सेना जनरल को बस कूल दिखना हैं। प्लीज अपनी भतीजी के लिए थोड़ी सहानुभूति रखें। आजकल लोग मुझसे कंबोडिया का PM बनने के लिए कह रहे हैं। अगर आपकी कोई डिमांड है तो मुझे बता दीजिए।
हुन सेन...
हम, यही चाहते हैं कि सभी सीमाएं पहले की तरह फिर से खोल दी जाएं। कंबोडिया बस यही चाहता है, और यह पहला कदम है।
पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा...
ठीक है, हम कोशिश करेंगे।
हुन सेन...
हम चाहते हैं सब कुछ पहले जैसा हो जाए, लेकिन थाईलैंड ने अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। थाईलैंड ने ही पहले बॉर्डर बंद की है, उसे ही पहले खोलनी होगी।
पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा...
हम तैयार हैं। हम इसे खोल सकते हैं, लेकिन इसे आपसी सहमति के तौर पर देखा जाना चाहिए। ऐसा नहीं लगे कि मैं कमजोर पड़ रही हूं, क्योंकि अब बात बहुत आगे निकल चुकी है।
हुन सेन...
ठीक है।
पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा...
हां, ठीक है। मैं जल्द ही इस पर कुछ करती हूं।
हुन सेन...
मैं आपके कदम का इंतजार करूंगा।
हुन सेन का दावा
हुन सेन ने कहा कि कॉल रिकॉर्डिंग गलतफहमी से बचने के लिए की गई थी। लेकिन उन्होंने यह रिकॉर्डिंग 80 अधिकारियों को भेजी, जिससे यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
अध्याय 5: जनता का गुस्सा और पाइतोंग्तार्न का पतन

बातचीत लीक होते ही थाईलैंड में पाइतोंग्तार्न के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गए। उन्हें सेना विरोधी बताया गया।
सत्तारूढ़ गठबंधन की दो पार्टियों ने समर्थन वापस ले लिया। सुप्रीम कोर्ट ने 1 जुलाई को उन्हें पद से हटा दिया।
अध्याय 6: शिव मंदिर बना युद्ध का केंद्र
24 जून को 900 साल पुराने प्रासात ता मुएन थॉम मंदिर के पास दोनों देशों की सेनाओं में झड़प हुई। कंबोडिया ने आरोप लगाया कि थाई सैनिकों ने मंदिर को चारों ओर से घेर लिया और ड्रोन छोड़ा। युद्ध अब नियंत्रण से बाहर था।
अध्याय 7: मानवीय संकट
इस युद्ध में अब तक 33 लोगों की मौत हो चुकी है। 100 से अधिक घायल हैं। 2 लाख से ज्यादा लोग सीमावर्ती गांवों से पलायन कर गए हैं।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
UNHCR, रेड क्रॉस और ASEAN मानवाधिकार आयोग ने मानवीय संकट को लेकर चिंता जताई है।
अध्याय 8: अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिका की मध्यस्थता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि उन्होंने दोनों देशों को सीजफायर वार्ता के लिए मना लिया है। लेकिन ASEAN की बैठक में कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया।
चीन की चुप्पी
चीन, जो दोनों देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चला रहा है, अभी तक सार्वजनिक बयान से बचता रहा है।
अध्याय 9: मीडिया की भूमिका
फेसबुक, यूट्यूब और थाई मीडिया में कॉल रिकॉर्डिंग, मंदिर की झड़प, युद्ध की तस्वीरें, और पलायन की स्टोरीज ने लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया है।
सोशल मीडिया पर दोनों देशों के राष्ट्रवादियों के बीच तीखी बहस चल रही है।
अध्याय 10: आगे क्या?
क्या युद्ध रुकेगा?
अब तक कोई स्थायी सीजफायर नहीं हुआ है। ट्रम्प की मध्यस्थता से दोनों देशों ने 3 अगस्त को बातचीत शुरू करने की सहमति दी है। लेकिन ज़मीन पर युद्ध अभी भी जारी है।
थाईलैंड और कंबोडिया की राजनीति पर असर
पाइतोंग्तार्न की विदाई से थाई राजनीति अस्थिर हो गई है। वहीं, कंबोडिया में हुन मैनेट को चुनौती मिल रही है कि वे अपने पिता की विरासत को कैसे संभालें।
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