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सीएम धामी ने रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर दी श्रद्धांजलि : कहा- रामपुर तिराहा गोलीकांड राज्य आंदोलन का सबसे क्रूर अध्याय; री-डेवलपमेंट मास्टर प्लान की घोषणा

News Affair Team

Thu, Oct 2, 2025

मुजफ्फरनगर/देहरादून.

उत्तराखंड राज्य आंदोलन की स्मृतियों को जीवित रखने और शहीदों के बलिदान को सम्मानित करने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजयदशमी के अवसर पर रामपुर तिराहा शहीद स्थल, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में श्रद्धांजलि अर्पित की।

2 अक्टूबर 1994 के काले अध्याय को याद करते हुए सीएम धामी ने कहा कि रामपुर तिराहा गोलीकांड (Rampur Tiraha Firing Case) राज्य आंदोलन का सबसे क्रूर अध्याय था। उस दिन निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोलियां बरसाई गईं, महिलाओं के साथ अत्याचार हुए और कई लोगों की जान गई।

उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के संघर्ष और शहादत की बदौलत ही उत्तराखंड राज्य (Uttarakhand Statehood) का निर्माण संभव हो सका। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक के पुनर्विकास (Redevelopment of Shaheed Sthal) का मास्टर प्लान तैयार करने की घोषणा की, जिसमें संग्रहालय, कैंटीन और बस स्टॉपेज की सुविधा शामिल होगी।

शहीदों की स्मृति में होगा भव्य संग्रहालय

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि रामपुर तिराहा शहीद स्थल को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण बनाया जाएगा। यहां एक भव्य संग्रहालय बनाया जाएगा, जिसमें राज्य आंदोलन से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें और स्मृतियां संजोई जाएंगी।

स्थल पर आने वाले लोगों के लिए एक कैंटीन और विश्राम सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों के लिए इस स्थल पर स्टॉपेज बनाया जाएगा ताकि आम जनता आसानी से यहां पहुंच सके।

शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों को पेंशन और आरक्षण

सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों और उनके परिवारों की भलाई के लिए लगातार प्रयास कर रही है। शहीद परिवारों को ₹3000 मासिक पेंशन दी जा रही है। जेल गए और घायल आंदोलनकारियों को ₹6000 प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। सक्रिय आंदोलनकारियों को ₹4500 मासिक पेंशन दी जा रही है। आंदोलनकारियों को सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा और पहचान पत्र दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं के योगदान को भी कभी नहीं भूलेगी। इसी दिशा में प्रदेश की सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30% क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है।

शहीद स्मारक में महावीर शर्मा की प्रतिमा

सीएम धामी ने बताया कि रामपुर, सिसौना, मेघपुर और बागोंवाली में जनमिलन केंद्र बनाए गए हैं। वहीं, शहीद स्मारक में भूमि दान करने वाले स्वर्गीय महावीर शर्मा की प्रतिमा स्थापित की गई है।

नकल विरोधी और धर्मांतरण विरोधी कानून पर सख्ती

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य की कानून व्यवस्था और विकास योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code in Uttarakhand) लागू करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। नकल विरोधी कानून (Anti-Copying Law Uttarakhand) को सख्ती से लागू किया गया है ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में ईमानदारी सुनिश्चित हो सके। प्रदेश में दंगारोधी और धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किए गए हैं। मदरसा बोर्ड समाप्त कर दिया गया है और अब केवल सरकारी पाठ्यक्रम वाले मदरसे ही संचालित होंगे। सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए सरकार ऑपरेशन कालनेमि जैसे अभियान चला रही है।

महिला आंदोलनकारियों की भूमिका का सम्मान

सीएम धामी ने राज्य आंदोलन में महिलाओं के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि चाहे रामपुर तिराहा आंदोलन हो या फिर देहरादून, मसूरी और अल्मोड़ा के आंदोलन, महिलाओं ने मोर्चे की अगुवाई की और साहसिक भूमिका निभाई।

राज्य आंदोलन की याद और वर्तमान पीढ़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि उत्तराखंड राज्य आसानी से नहीं मिला, बल्कि हजारों आंदोलनकारियों के बलिदान और संघर्ष के बाद यह सपना साकार हुआ।

उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर बनने वाला संग्रहालय और स्मारक युवाओं को राज्य आंदोलन के इतिहास और बलिदान की गाथा बताएगा।

इस अवसर पर उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, पूर्व सांसद सजीव बालियान, विधायक प्रदीप बत्रा, उमेश कुमार, विरेंद्र जाति, दर्जाधारी मधु भट्ट, सचिव युगल किशोर पंत, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल, राज्य आंदोलनकारी और अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

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