टेरर फंडिंग : NIA ने 8 राज्यों में 15 जगहों पर मारे छापे, दस्तावेज और डिवाइस जब्त; CRPF जवान की गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई
नई दिल्ली/रायपुर.
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में बड़ी सेंध लगाने के मामले में सीआरपीएफ के जवान मोतीराम जाट की गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को देशभर के 8 राज्यों में 15 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई आतंकी गतिविधियों, टेरर फंडिंग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में की गई है।
NIA की टीमें शनिवार को दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और असम में सक्रिय रहीं। इन राज्यों के कुल 15 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस, मोबाइल फोन, लैपटॉप और संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ी सतर्कता
सूत्रों के मुताबिक, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद NIA को यह आशंका हुई कि पाकिस्तानी एजेंट भारत में बैठे लोगों से खुफिया जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इस सिलसिले में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं लीक करने वाले नेटवर्क की तलाश में यह छापेमारी की गई।

CRPF जवान की गिरफ्तारी से खुला मामला
इस केस में सबसे अहम कड़ी बने हैं CRPF के जवान मोतीराम जाट, जिन्हें 26 मई को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। वह CRPF की 116वीं बटालियन में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) के पद पर तैनात था।
NIA के अनुसार,
“मोतीराम वर्ष 2023 से पाकिस्तान के एजेंटों को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां भेज रहे थे। इसके लिए उन्हें समय-समय पर पैसे भी मिलते थे।”
गिरफ्तारी के बाद मोतीराम को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 6 जून तक NIA की कस्टडी में भेजा गया है।
UAPA, ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत केस दर्ज
NIA ने इस मामले में 20 मई को RC-12/2025/NIA/DLI के तहत मुकदमा दर्ज किया। आरोपियों पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act), UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और BNS की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। फिलहाल NIA अन्य संदिग्धों की पहचान और फंडिंग के स्रोतों की जांच कर रही है।
क्या है मामला?
· पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) से जुड़े एजेंट भारत में सक्रिय हैं।
· ये एजेंट देश के अंदर सुरक्षा बलों के कुछ कर्मचारियों को पैसे देकर खुफिया जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं।
· इन सूचनाओं का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हो रहा है।
· जांच एजेंसियों का मानना है कि मोतीराम इस जासूसी नेटवर्क का अहम हिस्सा था।
NIA का अगला कदम क्या?
· जब्त दस्तावेजों और डिवाइसेस की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
· जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
· जल्दी ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
· इस नेटवर्क का विस्तार देश के और हिस्सों में होने की भी आशंका जताई जा रही है।
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