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CM विष्णुदेव साय ने की गौरी-गणेश पूजा : हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में पारंपरिक त्योहारों की शुरुआत; प्रदर्शनी में दिखी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत

News Affair Team

Fri, Jul 25, 2025

रायपुर.

छत्तीसगढ़ का पहला पारंपरिक पर्व हरेली गुरुवार को पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया गया। राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भी धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पर्व की भव्य शुरुआत हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर गौरी-गणेश, नवग्रह और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और परंपरागत कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा कर किसानों की समृद्धि और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

मंत्रियों की उपस्थिति में हुआ पारंपरिक आयोजन

इस शुभ अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी मौजूद रहे। सभी ने रापा, कुदाल, नांगर और अन्य कृषि यंत्रों की पूजा कर हरेली महोत्सव में भागीदारी निभाई।

पशुधन संरक्षण और पर्यावरण का संदेश

मुख्यमंत्री साय ने गाय और बछड़े को लोंदी और हरा चारा खिलाकर पशुधन संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा- "हरेली केवल किसानों का नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन से हमारे जुड़ाव का उत्सव है।"

साय ने कहा कि इस पर्व से धरती, जीव-जंतुओं और कृषि परंपरा के प्रति आदरभाव और सह-अस्तित्व की भावना मजबूत होती है।

प्रदर्शनी में दिखी समृद्ध विरासत

मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी लोक रंग में सजाया गया था। पारंपरिक परिधान में लोक कलाकारों और आमजन की उपस्थिति ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

इस मौके पर पारंपरिक और आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें

  • काठा, खुमरी, झांपी, कांसी की डोरी, तुतारी जैसे ऐतिहासिक कृषि उपकरणों

  • और रोटावेटर, बीज ड्रिल, पावर टिलर, स्प्रेयर जैसे आधुनिक यंत्रों का प्रदर्शन हुआ।

मुख्यमंत्री साय ने पूरे प्रदर्शनी स्थल का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा को सराहा। 

उत्सव में झलका ग्रामीण सौंदर्य

पूरे आयोजन स्थल पर ग्रामीण परिवेश और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिली। हरेली पर्व ने प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों, कृषि जीवनशैली और प्रकृति प्रेम को एक बार फिर उकेर दिया।

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