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निकाह पढ़ाने के लिए मौलवियों की फीस तय : छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का नया आदेश; अब 1100 रुपए से ज़्यादा नहीं ले सकेंगे रकम

News Affair Team

Tue, Jun 3, 2025

रायपुर.

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने एक अहम फैसला लेते हुए इमामों और मौलवियों द्वारा निकाह पढ़ाने के लिए ली जाने वाली राशि की अधिकतम सीमा 1100 रुपए तय कर दी है। यह आदेश सभी वक्फ संस्थाओं – मस्जिद, मदरसा और दरगाह के मुतवल्लियों को भेजा गया है।

राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने बताया कि यह कदम लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें मौलवियों द्वारा ज़्यादा नजराना मांगे जाने की बात सामने आई थी।

क्या है आदेश का मुख्य बिंदु?

  • अब निकाह के लिए इमाम/मौलाना 1100 रुपए से अधिक का नजराना नहीं ले सकेंगे।

  • आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

  • यह फैसला मौलवियों द्वारा 5100 रुपए न मिलने पर निकाह से इनकार करने की शिकायत के बाद लिया गया है।

शरीयत के अनुसार निकाह की प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज बताते हैं कि, “शरीयत कहती है कि निकाह को आसान बनाया जाए। ऐसे में मौलाना अगर मनमानी नजराना मांगेंगे तो यह गलत है। पूरे प्रदेश में लगभग 800 से अधिक मौलाना निकाह पढ़ाते हैं। अब अगर कोई आदेश का उल्लंघन करता है, तो उस पर कार्रवाई होगी।”

  • निकाह एक सामाजिक समझौता है, जिसमें लड़का-लड़की की रज़ामंदी ज़रूरी होती है।

  • लड़की को मेहर (सुरक्षा और अधिकार) दिया जाता है।

  • शरीयत निकाह को सादा और आसान बनाने पर ज़ोर देती है।

  • इस्लाम में बहुविवाह की अनुमति है, लेकिन वह ज़रूरत और ज़िम्मेदारी की शर्तों पर आधारित है।

क्यों लिया गया यह निर्णय?

  • कई जगहों से ऐसी शिकायतें मिली थीं कि मौलवी बिना नजराना मिले निकाह पढ़ाने से मना कर रहे हैं।

  • एक मौलाना ने 5100 रुपए न मिलने पर निकाह बीच में छोड़कर चला गया था।

  • ऐसे मामलों ने धार्मिक व्यवस्था और गरीब मुस्लिम परिवारों के बीच असंतोष पैदा किया था।

आदेश के उल्लंघन पर क्या होगा?

यदि कोई इमाम या मौलवी आदेश के विरुद्ध नजराना मांगता है और शिकायत मिलती है,
तो वक्फ बोर्ड उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। यह आदेश प्रदेश की सभी वक्फ संस्थाओं में लागू किया गया है।

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