अमीर बनने के लिए भतीजी की बलि : मुंगेली में भाई-भाभी ने सो रही 7 साल की बच्ची को उठाकर ले गए, चाकूओं से गोदा; खेत में मिली हड्डियां
News Affair Team
Mon, Jul 28, 2025
मुंगेली.
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी थाना अंतर्गत कोसाबाड़ी गांव की एक रात पूरे राज्य को झकझोर देने वाली बन गई। 11 अप्रैल 2025 की रात करीब 2 बजे, 7 साल की लाली गोस्वामी अपनी मां पुष्पा के साथ घर में सो रही थी। तभी अचानक बच्ची बिस्तर से गायब हो गई।
नींद में उठी मां ने जब देखा कि बच्ची पास नहीं है, तो उसकी चीख निकल पड़ी। रातभर गांव में खोजबीन चली, लेकिन लाली कहीं नहीं मिली।
अगले दिन पुष्पा ने लोरमी थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

लगभग तीन हफ्ते तक कोई सुराग नहीं मिला। फिर 6 मई को गांव के श्मशान घाट के पास खेत में कुछ मजदूरों को मानव खोपड़ी और हड्डियां दिखीं। पुलिस को सूचना दी गई।
DNA टेस्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि ये हड्डियां लापता लाली की थीं। शव पर चाकू से गोदने के गहरे निशान मिले।
झरन पूजा और तंत्र साधना का सच
एसपी भोजराम पटेल और बिलासपुर रेंज के आईजी संजीव शुक्ला के नेतृत्व में बनी विशेष टीम ने जांच शुरू की। गांव वालों और पड़ोसियों से पूछताछ के दौरान एक चश्मदीद ने बताया कि उसने एक बच्ची को रात में किसी के साथ जाते देखा था।
पुलिस ने CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन, साइबर ट्रेसिंग और फॉरेंसिक जांच की मदद ली। संदेह की सुई चिम्मन गोस्वामी और उसकी पत्नी ऋतु गोस्वामी पर टिक गई, जो मृतक लाली के भाई-भाभी हैं।

आरोपियों की पहचान और भूमिका
1. ऋतु गोस्वामी (36 वर्ष):
o मास्टरमाइंड, मृतक की भाभी
o धन की लालच में तांत्रिक झरन पूजा की योजना बनाई
o तंत्र क्रिया में विश्वास, बैगा से संपर्क किया
2. चिम्मन गिरी गोस्वामी (40 वर्ष):
o मृतक का सगा भाई
o पत्नी के साथ साजिश में शामिल
o पूजा के दौरान मौजूद रहा
3. नरेंद्र मार्को (21 वर्ष):
o बच्ची को किडनैप कर लाने वाला
o आरोपी ऋतु से पैसे लेकर वारदात में शामिल हुआ
4. आकाश मरावी (21 वर्ष):
o शव को खेत में दफनाने वाला
o चिम्मन का साथी, दुकान में काम करता था
5. रामरतन निषाद (45 वर्ष):
o बैगा (तांत्रिक), झरन पूजा का सलाहकार
o झाड़-फूंक और बलि के जरिए अमीर बनने की साजिश रची
नार्को टेस्ट में सामने आया रोंगटे खड़े कर देने वाला सच
कई घंटों की पूछताछ के बाद भी जब आरोपी लगातार बयान बदलते रहे, तब पुलिस ने ऋतु और चिम्मन का नार्को टेस्ट, ब्रेन मैपिंग और पॉलिग्राफ टेस्ट कराया।
नार्को टेस्ट में ऋतु ने कबूल किया कि झरन पूजा में ‘मानव बलि’ के लिए एक निर्दोष बच्ची की जरूरत थी। उसने नरेंद्र को 5000 रुपए में लाली को घर से उठाने के लिए कहा। रात 1 बजे नरेंद्र बच्ची को लेकर आया।
इसके बाद ऋतु ने उसे काले कपड़े पहनाए और श्मशान घाट ले जाकर रामरतन के सामने तंत्र क्रिया की शुरुआत की। चाकू से गला रेतकर बच्ची की बलि दी गई और शव को आकाश व चिम्मन ने खेत में गाड़ दिया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुला हत्याकांड का राज
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची की गर्दन और छाती पर धारदार हथियार से गहरे वार किए गए थे। शरीर पर चोट के 15 से ज्यादा निशान थे। मृत्यु अत्यधिक रक्तस्राव और तंत्र क्रिया के समय चाकू से वार के कारण हुई थी।
पुलिस बोली- तकनीकी जांच से आरोपी हुए बेनकाब
मुंगेली एसपी भोजराम पटेल ने प्रेस वार्ता में बताया-
यह मामला इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। पांचों आरोपियों ने तंत्र क्रिया और अमीर बनने की लालसा में एक मासूम बच्ची की बलि दी। हमने DNA, पोस्टमॉर्टम, नार्को, पॉलिग्राफ, ब्रेन मैपिंग सहित सभी तकनीकी जांच की सहायता से आरोपियों को बेनकाब किया है।
झरन पूजा और तांत्रिक अंधविश्वास
'झरन पूजा' आदिवासी इलाकों में की जाने वाली एक रहस्यमय तांत्रिक विधि है, जिसमें देवी या आत्मा को खुश करने के लिए रक्त की आहुति दी जाती है। इस मामले में झरन पूजा के बहाने मानव बलि दी गई।
बैगा रामरतन ने आरोपियों को बताया था कि यदि मासूम की बलि दी जाए तो अकूत धन-संपत्ति, सफलता और सुख-शांति प्राप्त हो सकती है।
पुलिस ने पांचों आरोपियों को हत्या, साजिश, अपहरण, सबूत मिटाने और अंधविश्वास अधिनियम की धाराओं में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
बाल संरक्षण आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान
इस हत्याकांड पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों ने भी इसे “सदियों पुराने अंधविश्वास का वीभत्स चेहरा” बताया।
गांव में पसरा सन्नाटा
गांव कोसाबाड़ी में इस वारदात के बाद लोग स्तब्ध हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि किसी मां की गोद से उसकी बच्ची को निकालकर उसका तांत्रिक बलिदान कर दिया जाएगा।
यह सिर्फ हत्या नहीं, एक चेतावनी है
समाजशास्त्री डॉ. पल्लवी दुबे कहती हैं-
यह मामला दर्शाता है कि शिक्षा और जागरूकता की कितनी जरूरत है। जब तक ग्रामीण समाज में अंधविश्वास के विरुद्ध ठोस अभियान नहीं चलाया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
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