बिजली संकट पर योगी बोले- सप्लाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : ऊर्जा मंत्री और राज्यमंत्री फील्ड में उतरें; गांव से शहर तक बाधित ना हो आपूर्ति
News Affair Team
Sun, May 24, 2026
लखनऊ.
भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली कटौती के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि बिजली सप्लाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कहीं चूक हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।
रविवार को ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को फील्ड में उतरकर कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सेंटर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
उपभोक्ताओं को समय पर जानकारी देने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केवल शिकायत दर्ज करना काफी नहीं है। अगर बिजली सप्लाई बाधित होती है तो लोगों को यह भी बताया जाए कि समस्या कब तक ठीक होगी। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने समय पर सही बिल जारी करने और बिलिंग व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया।
ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर तुरंत कार्रवाई
सीएम योगी ने कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। आंधी-तूफान और भीषण गर्मी जैसी परिस्थितियों में भी फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए।
उन्होंने अंडरग्राउंड केबल वाले क्षेत्रों में खुदाई से पहले अनुमति लेने के निर्देश भी दिए, ताकि बिजली सप्लाई प्रभावित न हो।
स्मार्ट मीटर को लेकर दिए नए निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लोगों के लिए आसान और फायदेमंद बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बिजली सिर्फ तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि किसानों की सिंचाई, व्यापार, उद्योग और आम लोगों के जीवन से जुड़ा मुद्दा है।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच बिल जारी किए जाएंगे। बिल एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए भी भेजे जाएंगे।
गर्मी बढ़ी तो रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची बिजली की मांग
अफसरों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस बार अप्रैल और मई में गर्मी ज्यादा पड़ने से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच प्रदेश की औसत बिजली खपत 501 मिलियन यूनिट से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट हो गई। वहीं अधिकतम मांग 30,339 मेगावाट तक पहुंची।
20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश का दूसरा सबसे ज्यादा बिजली खपत वाला राज्य रहा।
सड़कों पर उतरा लोगों का गुस्सा
प्रदेश में बिजली संकट को लेकर कई जिलों में लोगों की नाराजगी भी सामने आई। लखनऊ में देर रात बिजली कटौती से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन किया। फैजुल्लागंज की श्याम विहार कॉलोनी में लोगों ने हंगामा किया, जबकि BKT क्षेत्र में बिजली उपकेंद्रों के बाहर पुलिस तैनात करनी पड़ी।
वाराणसी में बिजली कटौती से परेशान एक युवक बिस्तर लेकर पावर हाउस पहुंच गया और वहीं सोने की जिद पर अड़ गया। कानपुर में समाजवादी पार्टी नेताओं ने ‘स्वर्गीय बिजली व्यवस्था’ लिखे पोस्टर पर फूल चढ़ाकर विरोध प्रदर्शन किया।
दो इंजीनियर सस्पेंड
बिजली संकट के बीच यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने बड़ी कार्रवाई भी की है। गाजियाबाद और मेरठ के अधिशासी अभियंताओं को सस्पेंड कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि लापरवाही करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
अखिलेश और सरकार के बीच जुबानी जंग
बिजली संकट को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार और बिजली विभाग पर निशाना साधते हुए ‘महा विद्युत आपदा’ करार दिया। इसके जवाब में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबा जवाब देते हुए सपा सरकार के समय की बिजली व्यवस्था का जिक्र किया।
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