छत्तीसगढ़ में कारोबार शुरू करना अब आसान : ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम लागू; 15 दिन में निर्णय नहीं तो ‘डीम्ड अप्रूवल’
News Affair Team
Tue, Sep 1, 2026
रायपुर.
छत्तीसगढ़ में नया कारोबार शुरू करने या मौजूदा व्यवसाय को संचालित करने के लिए अलग-अलग सरकारी मंजूरियां लेने की प्रक्रिया अब आसान और समयबद्ध होगी। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू कर दिया है। नए कानून के तहत विभिन्न विभागों से मिलने वाली कारोबारी सेवाओं के लिए समय-सीमा तय की गई है।
सबसे अहम प्रावधान यह है कि निर्धारित समय में सक्षम अधिकारी ने आवेदन पर निर्णय नहीं लिया तो उसे मंजूर माना जाएगा। यानी कारोबारियों को फाइल आगे बढ़ाने के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। बिल्डिंग परमिशन, फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस और पानी के कनेक्शन जैसी सेवाओं में समयबद्धता लागू होगी।
8 विभागों की सेवाएं कानून के दायरे में
अधिनियम में फिलहाल आवास एवं पर्यावरण, संस्कृति, गृह, आबकारी, नगरीय प्रशासन, वाणिज्य एवं उद्योग, लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग से संबंधित सेवाओं को शामिल किया गया है।
नगरीय निकायों के स्तर पर ट्रेड लाइसेंस, पानी का कनेक्शन और मोबाइल टावर लगाने की अनुमति जैसी सेवाएं भी इसके दायरे में आएंगी। आबकारी विभाग से जुड़ी सेवाओं में क्लब लाइसेंस, पर्यटन बोर्ड एवं एयरपोर्ट रेस्तरां बार लाइसेंस और विदेशी मदिरा के लेबल पंजीयन जैसी मंजूरियां शामिल हैं।
देरी हुई तो ऑनलाइन शिकायत
किसी सेवा में अनावश्यक देरी, जरूरत से ज्यादा दस्तावेज मांगने या प्रमाणन से इनकार जैसी स्थिति में कारोबारी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने और शिकायतों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था बनेगी।
जोखिम के हिसाब से तय होगी मंजूरी की प्रक्रिया
नए कानून की एक खासियत सेवाओं और गतिविधियों का जोखिम के आधार पर वर्गीकरण है। इन्हें कम, मध्यम और उच्च जोखिम वाली श्रेणियों में बांटा गया है।
कम जोखिम वाली गतिविधियों में सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर बिना पूर्व भौतिक निरीक्षण के 15 दिन के भीतर मंजूरी देने का प्रावधान है। मध्यम जोखिम वाली सेवाओं में थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं उच्च जोखिम वाली गतिविधियों में निर्धारित मानकों के अनुसार जांच के बाद ही मंजूरी मिलेगी।
महीनों अटकने वाली फाइलों से मिलेगी राहत
सरकारी विभागों में जटिल प्रक्रियाओं, अलग-अलग अनुमतियों और फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने से कारोबारियों को परेशानी होती रही है। खासकर नए उद्योग लगाने वाले निवेशकों के लिए मंजूरियों में लगने वाला समय परियोजना की लागत और शुरुआत की समय-सीमा दोनों को प्रभावित करता है।
नए कानून में तय समय के भीतर फैसला नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल यानी स्वतः मंजूरी का प्रावधान इसी समस्या को दूर करने के लिए किया गया है। इससे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी और आवेदनों को अनिश्चित समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी।
निवेश और MSME को बढ़ावा देने पर जोर
राज्य में नए उद्योग और निवेश आकर्षित करने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने के लिए कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में है। इसी उद्देश्य से मंजूरियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है।
देश के कई राज्यों में पहले से ऑनलाइन क्लियरेंस और निर्धारित समय-सीमा में डीम्ड अप्रूवल जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। छत्तीसगढ़ के नए कानून में इसके साथ रिस्क-बेस्ड अप्रूवल, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन को जोड़ा गया है। यही प्रावधान इसे पारंपरिक अनुमति व्यवस्था से अलग बनाते हैं।
नए कानून का सीधा असर: कम कागजी कार्रवाई, तय समय में निर्णय, कम जोखिम वाले कारोबार में निरीक्षण से राहत और देरी होने पर जवाबदेही—इन प्रावधानों से छत्तीसगढ़ में कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन