राहुल बोले- 18 साल का सार्थक CBI से तेज : सिस्टम की खामियां पकड़ लेता है, लेकिन संस्थाएं नहीं; CBSE छात्र सार्थक से की मुलाकात
नईदिल्ली.
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को CBSE बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को लेकर सवाल उठाने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत के साथ अपनी बातचीत का वीडियो साझा किया। करीब आठ मिनट के इस वीडियो में दोनों ने परीक्षा मूल्यांकन, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
रांची निवासी 18 वर्षीय सार्थक सिद्धांत हाल के दिनों में CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने के कारण चर्चा में रहे हैं। राहुल गांधी ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि एक युवा छात्र ने उन कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, जिन्हें बड़ी संस्थाएं समय रहते नहीं पहचान सकीं।
कम अंक आने के बाद शुरू की पड़ताल
सार्थक ने इस वर्ष CBSE की 12वीं की परीक्षा दी थी। परिणाम आने के बाद अपेक्षा से कम अंक मिलने पर उन्होंने अपनी स्कैन की गई उत्तरपुस्तिकाएं मंगाईं। दस्तावेजों की जांच के दौरान उन्हें मूल्यांकन और स्कैनिंग प्रक्रिया से जुड़े कुछ सवाल नजर आए।
इसके बाद उन्होंने विभिन्न दस्तावेजों, टेंडर रिकॉर्ड और उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं का अध्ययन किया। सार्थक का कहना है कि उन्होंने मूल्यांकन प्रणाली को समझने और उसमें संभावित कमियों की पड़ताल करने का प्रयास किया।
राहुल ने पूछा- बड़ी संस्थाएं खामियां क्यों नहीं पकड़ पातीं?
वीडियो में राहुल गांधी ने सवाल किया कि यदि एक छात्र कुछ समय में संभावित खामियां तलाश सकता है, तो संबंधित संस्थाएं और निगरानी तंत्र ऐसा क्यों नहीं कर पाते।
इसके जवाब में सार्थक ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। उनका कहना था कि यदि किसी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए जाने चाहिए।
सार्थक ने यह भी कहा कि उन्होंने विभिन्न टेंडर दस्तावेजों और सार्वजनिक रिकॉर्ड का अध्ययन कर मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ी जानकारी जुटाई।
शिक्षा व्यवस्था में जिज्ञासा पर भी हुई चर्चा
बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में जिज्ञासा और शोध की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। इस पर सार्थक ने कहा कि विद्यार्थियों को सवाल पूछने और तथ्यों की जांच करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि तकनीकी विषयों में रुचि और पारिवारिक माहौल के कारण उन्हें विभिन्न दस्तावेजों का विश्लेषण करने की प्रेरणा मिली।
पहले भी छात्रों से मिले थे राहुल गांधी
इससे पहले 1 जून को राहुल गांधी ने कुछ CBSE छात्रों से मुलाकात की थी। उस दौरान भी छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैनिंग, री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया और पोर्टल से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा की थी।
कुछ छात्रों ने दावा किया था कि उन्हें उत्तरपुस्तिका देखने के दौरान तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर भी कई छात्रों ने स्कैनिंग और मूल्यांकन से जुड़े सवाल उठाए थे।
OSM प्रणाली क्या है?
CBSE ने इस वर्ष कई विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है। परीक्षक ऑनलाइन माध्यम से कॉपियां जांचते हैं और अंक दर्ज करते हैं।
बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था से मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक तेज, व्यवस्थित और त्रुटिरहित बनाने में मदद मिलती है। हालांकि परिणाम जारी होने के बाद कुछ छात्रों ने स्कैनिंग, कॉपी मिलान और री-इवैल्यूएशन से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं।
CBSE ने आरोपों को बताया भ्रामक
CBSE पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि मूल्यांकन और कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया में सभी निर्धारित नियमों और सरकारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। बोर्ड ने कहा है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और मानवीय त्रुटियों को कम करना है।
बोर्ड के अनुसार, छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा रहा है और जिन मामलों में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, वहां आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस
राहुल गांधी और सार्थक सिद्धांत की बातचीत के बाद एक बार फिर परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल शिक्षा प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित मूल्यांकन व्यवस्था में निरंतर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।
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