पहाड़ों पर टैक्सी दौड़ाती हैं सानिया : पिता की मौत के बाद बेटी ने संभाला स्टेयरिंग; परिवार की जिम्मेदारी के साथ चुका रही कर्ज
देहरादून.
पहाड़ों में टैक्सी चलाना आसान काम नहीं माना जाता। घुमावदार सड़कें, लंबी यात्राएं और मौसम की चुनौतियां इस पेशे को और कठिन बना देती हैं। ऐसे में पौड़ी गढ़वाल में चौबट्टाखाल क्षेत्र के गिंवली गांव की सानिया राणा ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो इलाके की कई युवतियों के लिए प्रेरणा बन रही है।
कम उम्र में पिता को खोने के बाद सानिया ने परिवार की जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने अपने पिता की टैक्सी का स्टेयरिंग संभाला और आज रोजाना पहाड़ की सड़कों पर सवारियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही हैं। परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में वह अपने भाई का हाथ बंटा रही हैं।

पिता की सीख बनी ताकत
सानिया के पिता कमलेश सिंह राणा पेशे से टैक्सी चालक थे। उनकी इच्छा थी कि बेटा ही नहीं, बेटी भी वाहन चलाना सीखे और आत्मनिर्भर बने। इसी सोच के साथ उन्होंने सानिया को ड्राइविंग सिखानी शुरू की।
सानिया ने भी पिता की बात को गंभीरता से लिया। बालिग होने के बाद उन्होंने व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया और वाहन चलाने का अभ्यास जारी रखा। उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन यही हुनर परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा बनेगा।
बीमारी ने बदली जिंदगी
इस साल जनवरी में कमलेश सिंह राणा की गंभीर बीमारी का पता चला। परिवार इलाज में जुटा रहा, लेकिन 2 फरवरी को उनका निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। ऐसे समय में सानिया ने हिम्मत दिखाई। तेरहवीं की रस्म पूरी होने के बाद उन्होंने वही कार संभाली, जिसे उनके पिता वर्षों से चलाते थे।
अब खुद चला रही हैं टैक्सी
आज सानिया की टैक्सी चौबट्टाखाल, सतपुली, नौगांवखाल और आसपास के इलाकों की सड़कों पर नियमित रूप से दौड़ती है। जरूरत पड़ने पर वह यात्रियों को लेकर कोटद्वार और देहरादून तक भी जाती हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि शुरुआत में कई लोगों को आश्चर्य होता था कि एक युवती टैक्सी चला रही है, लेकिन अब सानिया की मेहनत और आत्मविश्वास ने लोगों का नजरिया बदल दिया है।
कंप्यूटर सीखना चाहती थीं, पिता ने दी अलग सलाह
सानिया फिलहाल चौबट्टाखाल स्थित राजकीय महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। वह बताती हैं कि एक समय उनकी इच्छा कंप्यूटर प्रशिक्षण लेने की थी और इसके लिए कोटद्वार जाना चाहती थीं।
जब उन्होंने यह बात अपने पिता को बताई तो उन्होंने समझाया कि परिवार के पास पहले से ही एक ऐसा काम है, जिससे रोजगार मिल सकता है। पिता की इस सलाह को सानिया ने गंभीरता से लिया और ड्राइविंग सीखने पर ध्यान दिया।
आज उन्हें महसूस होता है कि पिता का वह सुझाव उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय साबित हुआ।
परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रहीं
सानिया के परिवार में उनकी मां, बड़ी बहन, बड़ा भाई और भाभी हैं। पिता ने वाहन खरीदने के लिए बैंक और निजी वित्तीय संस्था से ऋण लिया था। अब उसकी किस्तें चुकाने की जिम्मेदारी भी परिवार पर है।
सानिया टैक्सी चलाकर होने वाली आय से घर के खर्च में योगदान देने के साथ-साथ ऋण की किस्तें जमा कराने में भी मदद कर रही हैं। परिवार के सदस्य कहते हैं कि उन्होंने मुश्किल समय में जिस तरह जिम्मेदारी संभाली, वह पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है।
इलाके की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
गिंवली गांव की यह कहानी केवल एक बेटी के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और साहस की मिसाल भी है। पहाड़ की सड़कों पर टैक्सी का स्टेयरिंग संभालने वाली सानिया आज उन युवतियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो अपने दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं।
पिता का सपना था कि उनकी बेटी अपने पैरों पर खड़ी हो। सानिया ने न केवल उस सपने को पूरा किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि हौसला हो तो जिम्मेदारियां बोझ नहीं, ताकत बन जाती हैं।
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