पितृ पक्ष की तृतीया कल : पितरों को तर्पण देते समय अंगूठे की तरफ से ही क्यों छोड़ते हैं जल? जानें धूप-ध्यान की सरल विधि
धर्म डेस्क.
29 सितंबर को पितृ पक्ष की तृतीया तिथि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और धूप-ध्यान किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की तृतीया तिथि को हुई हो। पितृ पक्ष में तर्पण यानी पितरों के नाम जल अर्पित करना प्रमुख कर्मों में माना जाता है।
पितरों को तर्पण देते समय जल हथेली में लेकर अंगूठे की तरफ से छोड़ा जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इसके पीछे हथेली के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग तीर्थों से जोड़ने की धार्मिक मान्यता है।
अंगूठे के पास का हिस्सा पितृ तीर्थ माना गया
पं. मनीष शर्मा के अनुसार हथेली में अंगूठे और तर्जनी उंगली के नीचे के बीच का हिस्सा पितृ तीर्थ कहलाता है। धार्मिक मान्यता में इस स्थान को पितरों से संबंधित माना गया है।
इसी वजह से पितरों के नाम तर्पण करते समय हथेली में जल लेकर उसे अंगूठे की ओर से अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस तरह जल पितृ तीर्थ से होकर पितरों तक पहुंचता है और उन्हें तृप्ति मिलती है।
देवताओं को जल अर्पित करने की विधि अलग
पितरों को तर्पण और देवी-देवताओं को जल चढ़ाने की विधि एक जैसी नहीं मानी जाती। धार्मिक परंपरा के अनुसार देव कार्य में हथेली के आगे वाले हिस्से से जल अर्पित किया जाता है। वहीं पितृ कर्म के लिए हथेली के अलग हिस्से का इस्तेमाल बताया गया है। इस तरह तर्पण में जल अर्पित करने का तरीका भी धार्मिक कर्म की प्रकृति के अनुसार अलग रखा गया है।
धूप-ध्यान के लिए ये सामग्री रखें
पितृ पक्ष में धूप-ध्यान करने के लिए आम तौर पर इन चीजों का उपयोग किया जाता है-
गाय के गोबर से बने कंडे
हवन कुंड या धूप देने के लिए उपयुक्त बर्तन
घी
काले तिल
चावल
गुड़
कपूर
जल से भरा तांबे का लोटा
फूल
बैठने के लिए आसन
अगर सभी सामग्री उपलब्ध नहीं है तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण किया जा सकता है।
ऐसे करें धूप-ध्यान
धूप-ध्यान के लिए पहले साफ स्थान पर आसन बिछाकर बैठें। कंडे के अंगारे जलाकर उसमें घी, गुड़, काले तिल और उपलब्ध सामग्री अर्पित करें। इसके बाद अपने पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक तर्पण और प्रार्थना करें। जल अर्पित करते समय पितरों का नाम और उनका स्मरण करना परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

खीर-पूड़ी से भी दे सकते हैं धूप
पितरों के लिए बनाए गए भोजन से भी धूप देने की परंपरा है। इसके लिए खीर-पूड़ी बनाई जा सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा से तैयार किए गए भोजन का पितरों के नाम स्मरण करते हुए धूप में अर्पण किया जाता है।
पितृ पक्ष के कर्मकांडों में सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और स्मरण को माना गया है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में तर्पण एवं श्राद्ध की विधियों में कुछ स्थानीय अंतर भी हो सकते हैं।
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