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21st July 2026

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मालदीव 150 साल में बना इस्लामिक राष्ट्र : 2500 साल पुरानी विरासत, 1200 द्वीपों में बसा; 75 साल में समुद्र में डूबने का खतरा

News Affair Team

Fri, Jul 25, 2025

माले.

हिंद महासागर में बसे 1200 से अधिक द्वीपों का समूह मालदीव, दक्षिण एशिया का सबसे छोटा देश है, जिसका कुल क्षेत्रफल मात्र 298 वर्ग किलोमीटर हैजो दिल्ली से भी पांच गुना छोटा है। यहां की जनसंख्या लगभग 5 लाख है, जिसमें से लगभग 40% लोग राजधानी माले में निवास करते हैं।

मालदीव एक मुस्लिम बहुल देश है, जहां की 98.4% आबादी इस्लाम धर्म को मानती है। देश की आधिकारिक भाषा धिवेही है, जो श्रीलंका की सिंहली भाषा से मिलती-जुलती है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्ध देश

मालदीव का इतिहास करीब 2500 साल पुराना है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार यहां सबसे पहले बसने वाले लोग भारत के उड़ीसा (प्राचीन कलिंग) और दक्षिण भारत से आए थे। एक मान्यता के अनुसार, बौद्ध राजा श्री सूरुदासरुण आदित्य, जो कलिंग के राजा ब्रह्मदित्य के पुत्र थे, ने मालदीव में पहली संगठित सत्ता की नींव रखी थी।

उनके शासनकाल में बौद्ध धर्म ने मालदीव में प्रवेश किया, और 1000 वर्षों तक यह प्रमुख धर्म बना रहा। इसी दौर में धिवेही लिपि, संस्कृति और स्थापत्य कला का विकास हुआ। मालदीव के कई द्वीपों पर आज भी बौद्ध स्तूपों और मठों के अवशेष मिलते हैं जिन्हें हवित्ता या उस्तुबु कहा जाता है।

जब राजा ने इस्लाम अपनाया

9वीं-10वीं शताब्दी के दौरान अरब व्यापारियों के माध्यम से इस्लाम का प्रभाव मालदीव में बढ़ा। 1153 ईस्वी में अंतिम बौद्ध राजा धोवेमी ने इस्लाम धर्म स्वीकार किया और उनका नाम बदलकर सुल्तान मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह रखा गया। इस परिवर्तन की सबसे चर्चित कहानी एक लोककथा से जुड़ी है।

उस समय मालदीव में एक समुद्री राक्षस रन्नामारी का आतंक था, जिसके लिए हर महीने एक कुंवारी कन्या की बलि दी जाती थी। एक बार अबु अल-बरकात यूसुफ अल-बरबरी, एक इस्लामी विद्वान ने उस बलि की जगह खुद मीनार में रात बिताई और कुरान की आयतें पढ़ीं, जिससे राक्षस भाग गया।

राजा ने वचन दिया था कि यदि राक्षस हमेशा के लिए भाग गया, तो वे पूरे देश को इस्लाम में धर्मांतरित कर देंगे। रन्नामारी फिर कभी नहीं लौटा, और मालदीव एक इस्लामी देश बन गया।

6 इस्लामी राजवंशों का 800 वर्षों तक शासन

इस्लाम अपनाने के बाद मालदीव में छह इस्लामी राजवंशों ने शासन किया जो 1968 तक चला। 2008 में नए संविधान के तहत इस्लाम को आधिकारिक धर्म घोषित कर दिया गया और यह अनिवार्य कर दिया गया कि मालदीव की नागरिकता केवल मुस्लिम व्यक्ति को ही मिल सकती है।

1965 में पूर्ण स्वतंत्रता मिली

मालदीव का इतिहास विदेशी हस्तक्षेपों से भी भरा रहा है। 1558 में पुर्तगालियों ने माले पर कब्जा किया जो 15 साल तक चला। 1573 में पुर्तगालियों को खदेड़ दिया गया।

इसके बाद 1887 में मालदीव ने ब्रिटिश शासन से एक समझौता किया, जिसके तहत आंतरिक प्रशासन स्थानीय शासन के हाथ में रहा लेकिन विदेश नीति और रक्षा ब्रिटेन के नियंत्रण में चला गया।

26 जुलाई 1965 को मालदीव को पूर्ण स्वतंत्रता मिली और 21 सितंबर 1965 को संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बना।

आधुनिक इस्लामी गणराज्य

1968 में राजशाही समाप्त कर गणतंत्र की स्थापना की गई। तब से मालदीव एक लोकतांत्रिक इस्लामी गणराज्य है। यहां की राजनीति, संविधान और समाज व्यवस्था सभी इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित हैं।

पर्यटन: ट्रॉपिकल स्वर्ग की पहचान

मालदीव आज स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और लक्ज़री रिज़ॉर्ट्स के लिए दुनियाभर में मशहूर है। पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। भारत समेत कई देशों के पर्यटक इसे एक ट्रॉपिकल पैराडाइज़ मानते हैं।

हालांकि हाल के वर्षों में राजनीतिक विवादों औरबॉयकॉट मालदीवअभियान ने भारत से आने वाले पर्यटकों की संख्या को प्रभावित किया।

वैज्ञानिकों की रिपोर्ट: 2100 तक देश डूब सकता है

मालदीव आज जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा शिकार बनता जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर ग्लोबल वार्मिंग की यही गति रही तो:

  • 2050 तक 80% द्वीप रहने लायक नहीं रहेंगे

  • 2100 तक पूरा देश समुद्र में समा सकता है

  • IPCC की रिपोर्ट कहती है समुद्र का स्तर 59 सेंटीमीटर से 1 मीटर तक बढ़ सकता है

  • मालदीव की औसत ऊंचाई सिर्फ 1.5 मीटर और अधिकतम 2.4 मीटर है

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक:

  • 90% द्वीपों में जमीन का कटाव बढ़ गया है

  • 97% द्वीपों में पीने के पानी की समस्या है

इसका मतलब है कि अगले 75 सालों में पूरा देश जलमग्न हो सकता है। यह संकट केवल मालदीव के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है।

मालदीव पहुंचे PM नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत...

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