इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी बाहुबलियों की ‘क्राइम कुंडली’ : 50+ नेताओं पर रिपोर्ट तलब, गन लाइसेंस और सुरक्षा की भी होगी जांच
News Affair Team
Sun, May 24, 2026
प्रयागराज.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों और आपराधिक छवि वाले लोगों को जारी हथियार लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने यूपी सरकार से राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह समेत 50 से ज्यादा बाहुबलियों की पूरी “क्राइम कुंडली” तलब की है।
कोर्ट ने गृह विभाग को आदेश दिया है कि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें दिए गए गन लाइसेंस, सरकारी सुरक्षा और लंबित मामलों की विस्तृत रिपोर्ट 26 मई तक पेश की जाए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गृह विभाग के अफसरों को फटकार लगाते हुए कहा कि हथियारों का खुला प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है।
संतकबीरनगर की याचिका पर सख्त हुई अदालत
यह मामला संतकबीरनगर निवासी जयशंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका पर सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश में गन लाइसेंस जारी करने में नियमों की अनदेखी हो रही है और आपराधिक मामलों में घिरे लोगों को भी आसानी से लाइसेंस मिल रहे हैं।
18 मई को जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने मामले की सुनवाई की थी। आदेश की कॉपी 20 मई को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुई।
कोर्ट बोला- जानकारी छिपाई तो अफसर जिम्मेदार होंगे
हाईकोर्ट ने गृह विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस कप्तानों और कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नरों से लिखित अंडरटेकिंग भी मांगी गई है कि रिपोर्ट में कोई जानकारी छिपाई नहीं गई है।
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर तथ्य छिपाए गए तो संबंधित अधिकारी खुद जिम्मेदार माने जाएंगे।
सरकार के हलफनामे पर कोर्ट ने जताई हैरानी
सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश में इस समय 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस जारी हैं।
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि:
23 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित हैं
6 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं
करीब 21 हजार परिवारों के पास एक से ज्यादा हथियार लाइसेंस हैं
लाइसेंस विवाद से जुड़ी 1738 अपीलें अब भी लंबित हैं
इन आंकड़ों पर कोर्ट ने चिंता जताई।
इन बाहुबलियों की रिपोर्ट तलब
हाईकोर्ट ने जिन प्रमुख नामों की आपराधिक रिपोर्ट मांगी है, उनमें रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह, विजय मिश्रा, अब्बास अंसारी, हाजी याकूब कुरैशी, मदन भैया, राजन तिवारी समेत कई चर्चित बाहुबली शामिल हैं।
कोर्ट ने नोएडा, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर और आगरा जोन से भी जोनवार सूची तलब की है।
‘हथियार सुरक्षा नहीं, डर का माहौल बनाते हैं’
जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हथियार रखने को अक्सर आत्मरक्षा के नाम पर सही ठहराया जाता है, लेकिन जब उनका इस्तेमाल दबदबा बनाने और लोगों को डराने के लिए होने लगे तो यह समाज के लिए खतरनाक स्थिति बन जाती है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा माहौल समाज में भाईचारे और सुरक्षा की भावना को कमजोर करता है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय और जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि किन आधारों पर आपराधिक छवि वाले लोगों को हथियार लाइसेंस और सुरक्षा दी गई।
माना जा रहा है कि कोर्ट की अगली सुनवाई में कई जिलों की पुलिस और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ सकते हैं।
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