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26th May 2026

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प्रेमानंद महाराज बोले- हम मिलें न मिलें, चिंता मत करना : वीडियो जारी कर कहा- हम आपके मन में रहेंगे; 9 दिन से बंद है पदयात्रा

मथुरा.

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों और शिष्यों के लिए एक भावुक संदेश जारी किया है। रविवार को केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए 1 मिनट 19 सेकेंड के वीडियो में उन्होंने कहा-

बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं।

वीडियो सामने आने के बाद उनके लाखों अनुयायियों के बीच भावुक माहौल बन गया। पिछले 9 दिनों से प्रेमानंद महाराज की रात्रि पदयात्रा बंद है। स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे न तो पदयात्रा कर रहे हैं और न ही भक्तों से एकांतिक मुलाकात कर रहे हैं।

महाराज ने वीडियो में कहा-

न ये चिंता करनी है कि हमारा उत्थान कैसे होगा। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में हम रहेंगे। खूब नाम जप करो, भजन करो और निश्चिंत रहो।

उन्होंने आगे कहा कि उनका एकांतवास भक्तों के लिए है, अपने लिए नहीं।

हमारा जो कुछ होना था, वो हो गया। अब जो कुछ हो रहा है, वह आप सबके लिए हो रहा है। प्रसन्न रहो, सुखी रहो और भगवान के आश्रित रहो।

दोनों किडनी खराब, हफ्ते में कई बार डायलिसिस

प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक उनकी दोनों किडनी खराब हैं और उन्हें सप्ताह में 2 से 3 बार डायलिसिस करानी पड़ती है। इसी वजह से 17 मई से उनकी प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा स्थगित कर दी गई है।

17 मई की रात बड़ी संख्या में भक्त उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे। रोज की तरह तड़के 3 बजे महाराज के निकलने का इंतजार किया जा रहा था, लेकिन उनकी जगह शिष्यों ने पहुंचकर स्वास्थ्य खराब होने की जानकारी दी।

लाउडस्पीकर से भक्तों से कहा गया-

महाराज जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए पदयात्रा अगले आदेश तक स्थगित की जा रही है। कृपया भीड़ न लगाएं।

यह सुनते ही कई भक्त मायूस होकर लौट गए।

3 दिन पहले गुरु दर्शन के लिए पहुंचे थे वराह घाट

हालांकि स्वास्थ्य खराब होने के बीच तीन दिन पहले प्रेमानंद महाराज केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपने गुरु संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन किए।

उनकी इस छोटी यात्रा के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थीं। भक्तों ने इसे उनके स्वास्थ्य में सुधार का संकेत माना था।

डेढ़ किलोमीटर पैदल करते थे पदयात्रा

स्वास्थ्य बिगड़ने से पहले प्रेमानंद महाराज रोज तड़के 3 बजे केली कुंज आश्रम से सौभरी वन तक पदयात्रा करते थे। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी इस यात्रा में हजारों भक्त शामिल होते थे।

सामान्य दिनों में करीब 20 हजार श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचते थे। वीकेंड और त्योहारों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी।

13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर

प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। तीन भाइयों में वह मंझले हैं।

बताया जाता है कि बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर था। कक्षा 8 तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और काशी पहुंच गए।

13 साल की उम्र में उन्होंने ब्रह्मचर्य का मार्ग अपनाया। शुरुआती दिनों में उनका नाम ‘आरयन ब्रह्मचारी’ रखा गया। बाद में गुरु गौरी शरण जी महाराज से दीक्षा लेने के बाद वह वृंदावन पहुंचे।

कैसे बने राधावल्लभी संत

वृंदावन पहुंचने के बाद प्रेमानंद महाराज नियमित रूप से बांके बिहारी मंदिर जाने लगे। धीरे-धीरे उनका झुकाव राधावल्लभ संप्रदाय की ओर बढ़ा।

कहा जाता है कि एक दिन परिक्रमा के दौरान उन्होंने एक सखी को राधारससुधानिधि का श्लोक गाते सुना। उस श्लोक का भाव उनके मन में इतना उतर गया कि उन्होंने संन्यास मार्ग छोड़कर राधावल्लभ परंपरा को अपना लिया।

आज प्रेमानंद महाराज देश के सबसे चर्चित संतों में गिने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनके करोड़ों अनुयायी हैं और विराट कोहली-अनुष्का शर्मा समेत कई सेलिब्रिटी भी उनके शिष्य माने जाते हैं।

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