नेपाल में अचानक बाढ़ से 35 घर और 6 पुल बहे : 10 लोग लापता, 341 MW हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का कैंप भी तबाह; बिहार के लिए भी निगरानी जरूरी
काठमांडू/पटना.
नेपाल के गोरखा जिले में रविवार, 11 अक्टूबर की सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने कई बस्तियों को नुकसान पहुंचाया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 35 घर और 6 पुल बह गए, जबकि कम से कम 10 लोग लापता बताए गए हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ की चपेट में 341 मेगावाट की हाइड्रोपावर परियोजना का निर्माण कैंप और वहां रखी मशीनें भी आईं।
सुबह करीब 4 बजे नदी का पानी तेजी से बस्तियों में घुसने लगा। लोगों को घर छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चल रहा है।

भूस्खलन से नदी का रास्ता रुका, फिर अचानक नीचे आया पानी
शुरुआती जानकारी में आशंका जताई गई है कि गोरखा जिले के चुन्चुब्री इलाके में भूस्खलन के कारण नदी या उसकी सहायक धारा का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और रुकावट टूटने या पानी निकलने का रास्ता खुलने पर तेज बहाव नीचे की ओर आया।
हालांकि, बाढ़ के सटीक कारण और नुकसान की पूरी तस्वीर की जांच की जा रही है। नेपाल के अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।


6 पुल बहने से गांवों का संपर्क प्रभावित
बाढ़ में दो मोटर योग्य पुलों और चार झूला पुलों के बहने की सूचना है। कई बस्तियों में पानी घुसा और कुछ मकान पूरी तरह बह गए। इससे स्थानीय आवाजाही और राहत-बचाव कार्यों में चुनौती बढ़ गई है।
341 मेगावाट की हाइड्रोपावर परियोजना का निर्माण कैंप भी प्रभावित हुआ। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, वहां मौजूद उपकरण और मशीनें पानी के साथ बह गईं। नुकसान का अंतिम आकलन अभी बाकी है।
प्रशासन ने SMS भेजकर लोगों को किया अलर्ट
गोरखा जिले के प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा। सिरदिबास, जगत, माछाखोला, सोती और आरुघाट समेत नदी किनारे की बस्तियों में लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने भी अलर्ट जारी करने और लोगों को सूचना देने की कार्रवाई की। सेना और पुलिस की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं।

नेपाल से बिहार तक कैसे पहुंचता है नदी का पानी?
बूढ़ी गंडकी नदी आगे त्रिशूली नदी से जुड़ती है। त्रिशूली और काली गंडकी का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में मिलता है। भारत में यही नदी गंडक के नाम से प्रवेश करती है और आगे गंगा में मिल जाती है।
गंडक नदी बिहार के पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और आसपास के क्षेत्रों के लिए अहम है। नेपाल में बाढ़ आने पर नदी के बहाव और जलस्तर पर नजर रखना जरूरी होता है। हालांकि, इस घटना से बिहार में जलस्तर बढ़ने या बाढ़ आने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संभावित असर को लेकर अनुमान को वास्तविक खतरे या आधिकारिक चेतावनी के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
नेपाल के अधिकारियों ने नदी के निचले इलाकों में सतर्कता बरतने को कहा है। भारत में किसी विशेष जिले के लिए अलर्ट जारी होने की जानकारी प्रकाशित करने से पहले संबंधित प्रशासन या जल संसाधन विभाग की पुष्टि जरूरी होगी।
26 अगस्त की बाढ़ में 1,455 मौतें, 5,285 लोग अब भी लापता
नेपाल इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र में आई भीषण बाढ़ से जूझ चुका है। इस आपदा में घर, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हुई थीं।
5 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल सरकार ने उस आपदा के बाद व्यापक खोज और बचाव अभियान समाप्त कर पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। उस समय तक कम से कम 1,455 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 5,285 लोग लापता थे। करीब 13,795 लोगों को बचाया गया था और 12 जलविद्युत परियोजनाएं तबाह हुई थीं।
अब बूढ़ी गंडकी में आई नई बाढ़ ने गोरखा के गांवों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। राहत दल लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं और नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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