2047 की दिल्ली होगी ग्लोबल सिटी : 695 किमी मेट्रो और 24 घंटे एक्टिव शहर; लुटियन के बाहर गगनचुंबी इमारतों की राह साफ
मास्टर प्लान में अगले 20 साल का खाका; डेटा सेंटर, साइबर हब और टेक पार्क के लिए जगह, यमुना फ्लड प्लेन में निर्माण पर रोक
नई दिल्ली.
देश की राजधानी अगले दो दशकों में एक नए शहरी स्वरूप में नजर आएगी। केंद्र सरकार ने गुरुवार को मास्टर प्लान दिल्ली-2047 जारी कर राजधानी के विकास का रोडमैप सामने रखा। लक्ष्य दिल्ली को 2047 तक करीब 3.2 करोड़ आबादी वाले ग्लोबल सिटी के रूप में विकसित करना है।
प्लान में करीब 40 लाख नए घर, मेट्रो नेटवर्क को मौजूदा 416 किमी से बढ़ाकर करीब 695 किमी करने और 6 RRTS कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली को 24 घंटे सक्रिय शहर बनाने के लिए चुनिंदा इलाकों में नाइट मार्केट, नाइट वॉक, रेस्टोरेंट, रिटेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को देर रात तक संचालित करने का प्रस्ताव है।

लुटियन दिल्ली के बाहर ऊंची इमारतों को बढ़ावा
मास्टर प्लान में दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में ज्यादा ऊंचाई वाले विकास को जगह दी गई है। लुटियन दिल्ली के विशेष क्षेत्र को छोड़कर अन्य निर्धारित इलाकों में गगनचुंबी इमारतों और हाई-डेंसिटी डेवलपमेंट की संभावनाएं बढ़ेंगी।
डेटा सेंटर, IT और साइबर हब के साथ टेक पार्क के लिए भी जगह तय की गई है। बड़े निर्धारित प्लॉट पर डेटा सेंटर के निर्माण में ऊंचाई की पाबंदी नहीं रखने का प्रावधान किया गया है।
मेट्रो-रेल के आसपास बनेगा ट्रांजिट हब
मेट्रो, RRTS और रेलवे स्टेशनों के आसपास घर, ऑफिस, बाजार और सार्वजनिक सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की योजना है। करीब 200 वर्ग किमी क्षेत्र में Transit Oriented Development (TOD) को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे लोगों को घर से काम और सार्वजनिक परिवहन तक कम दूरी में पहुंच उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
40 लाख नए घर, नए इलाकों में स्कूल-बाजार भी
लैंड पूलिंग के जरिए विकसित होने वाले नए क्षेत्रों में सिर्फ आवासीय कॉलोनियां नहीं होंगी। यहां स्कूल, बाजार, रोजगार केंद्र, मनोरंजन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को भी साथ विकसित करने का प्रावधान है। करीब 20 वर्ग किमी के हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में आवास के साथ वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल गतिविधियों को जगह देने की योजना है।
इंडस्ट्रियल प्लॉट पर कुछ शर्तों के साथ बन सकेंगे घर
मास्टर प्लान में कुछ औद्योगिक भूखंडों को निर्धारित शर्तों के साथ ग्रुप हाउसिंग में बदलने की अनुमति का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य मौजूदा जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर राजधानी में आवास की बढ़ती जरूरत पूरी करना है। पुराने और कम इस्तेमाल वाले इलाकों को भी दोबारा विकसित करने की योजना है। सुविधाएं बढ़ाकर इन क्षेत्रों में नियोजित तरीके से घनत्व बढ़ाया जाएगा।

दिल्ली के चुनिंदा इलाके रातभर रहेंगे एक्टिव
पूरी दिल्ली को 24 घंटे खुला रखने की योजना नहीं है। चुनिंदा कमर्शियल और कल्चरल सर्किट को 24 घंटे की अर्थव्यवस्था के लिए विकसित किया जाएगा। इन इलाकों में नाइट मार्केट, नाइट वॉक, रेस्टोरेंट, रिटेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात तक चल सकेंगे। ऐसे क्षेत्रों में 24 घंटे मेट्रो सेवा का प्रस्ताव भी रखा गया है।
पुरानी दिल्ली में इमारतें नहीं टूटेंगी, बदलेगा इस्तेमाल
पुरानी दिल्ली की विरासत इमारतों को संरक्षित करते हुए उनके Adaptive Reuse का प्रावधान किया गया है। यानी पुरानी इमारतों को गिराने के बजाय उनमें म्यूजियम, कैफे, गैलरी, क्राफ्ट शॉप, बुटीक होटल और सांस्कृतिक केंद्र जैसी गतिविधियां शुरू की जा सकेंगी। इससे विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा देने की योजना है।
रिज से यमुना तक बनेगा 200 किमी साइकिलिंग नेटवर्क
मास्टर प्लान में पर्यावरण और सार्वजनिक परिवहन के साथ साइकिलिंग और पैदल आवागमन पर भी जोर दिया गया है। रिज से यमुना तक करीब 200 किमी का साइकिलिंग नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें यमुना फ्लड प्लेन के किनारे करीब 52 किमी का हिस्सा शामिल होगा। इसके साथ वॉकिंग ट्रेल, ग्रीनवे और पार्कों का नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा।
यमुना फ्लड प्लेन में निर्माण नहीं, होगा रेस्टोरेशन
यमुना के करीब 1,700 हेक्टेयर फ्लड प्लेन में रेस्टोरेशन और वेटलैंड्स के पुनर्जीवन की योजना है। सक्रिय फ्लड प्लेन को निर्माण क्षेत्र से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है। पार्कों को भी खाली जमीन मानकर उन पर अनियंत्रित निर्माण की अनुमति नहीं होगी। प्राकृतिक क्षेत्रों की सुरक्षा को मास्टर प्लान में खास महत्व दिया गया है।
रोजगार के नए केंद्र बनेंगे
राजधानी में नए रोजगार और कारोबार के लिए डेवलपमेंट सेंटर, को-वर्किंग स्पेस और इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा क्लाउड किचन और ई-कॉमर्स डिलीवरी सेंटर जैसी नई अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों को भी जगह दी जाएगी।
यानी 2047 की दिल्ली सिर्फ ज्यादा ऊंची इमारतों वाली राजधानी नहीं होगी, बल्कि मेट्रो-कनेक्टेड, डिजिटल, मिश्रित उपयोग वाले इलाकों और 24 घंटे सक्रिय चुनिंदा कारोबारी क्षेत्रों वाली ग्लोबल सिटी के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
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