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नेता प्रतिपक्ष बोले- ये अंग्रेजों के मुखबिर : महिला सशक्तीकरण पर बवाल; रायपुर निगम की सभा में हंगामा

News Affair Team

Mon, Apr 27, 2026

रायपुर.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नगर निगम की विशेष सामान्य सभा सोमवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। महिला सशक्तीकरण जैसे अहम विषय पर चर्चा के लिए बुलाई गई इस बैठक में भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ देर के लिए सभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ, जब नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने अपने संबोधन के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि “ये लोग अंग्रेजों के मुखबिर थे।” इस बयान के बाद भाजपा पार्षद भड़क उठे और अपनी सीटों से उठकर विरोध जताने लगे। देखते ही देखते माहौल गरमा गया और नारेबाजी शुरू हो गई।

‘मुखबिर’ टिप्पणी से भड़का विवाद

नेता प्रतिपक्ष के बयान के बाद भाजपा पार्षदों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। कई पार्षद अपनी कुर्सियां छोड़कर आकाश तिवारी के पास पहुंच गए और नारे लगाने लगे। इस दौरान कुछ पार्षदों ने माइक छीनने की कोशिश की, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ देर तक सदन में अफरा-तफरी जैसी स्थिति रही। पार्षदों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे बैठक का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया। हंगामे को देखते हुए सभापति को कार्यवाही अस्थायी रूप से स्थगित करनी पड़ी।

‘परिसीमन’ बनाम ‘परमिशन’ पर भी तकरार

इस हंगामे से पहले ही सभा में एक और विवाद सामने आ चुका था। महिला सशक्तिकरण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद अर्जुमन एजाज ढेबर ने अपने भाषण में ‘परिसीमन’ शब्द की जगह ‘परमिशन’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया।

इस पर भाजपा पार्षद कृतिका जैन ने अपने वक्तव्य में तंज कसते हुए इस गलती को मुद्दा बना दिया। इसके बाद दोनों महिला पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। मामला इतना बढ़ा कि अन्य पार्षदों को बीच-बचाव करना पड़ा।

सभापति की समझाइश से थमा विवाद

स्थिति को बिगड़ता देख सभापति सूर्यकांत राठौड़ ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों पार्षदों को शांत कराते हुए कहा कि “हम सभी यहां सीखने आए हैं, यह हमारी पहली पाठशाला है। नए सदस्य कई बार शब्दों का गलत इस्तेमाल कर देते हैं, इसे व्यक्तिगत मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।”

सभापति की इस समझाइश के बाद माहौल कुछ हद तक शांत हुआ और बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।

जल संकट पर चर्चा नहीं, विपक्ष नाराज

बैठक के दौरान विपक्ष ने शहर में बढ़ते जल संकट के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग भी उठाई। हालांकि, सभापति ने स्पष्ट कर दिया कि इस विषय पर पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई है, इसलिए इस पर चर्चा संभव नहीं है।

इस फैसले से विपक्ष के पार्षद नाराज नजर आए और उन्होंने इसे जनहित के मुद्दों की अनदेखी बताया।

बैठक से पहले ही गरमाया था माहौल

विशेष सामान्य सभा शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया था। भाजपा पार्षदों ने निगम परिसर में ‘कांग्रेस शर्म करो’ के नारे लगाए और कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया।

वहीं विरोध दर्ज कराने के लिए महापौर और भाजपा पार्षद काले कपड़े पहनकर बैठक में पहुंचे। इसे भाजपा ने प्रतीकात्मक विरोध बताया। इस दौरान दोनों दलों के पार्षद आमने-सामने नजर आए।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

संभावित हंगामे को देखते हुए नगर निगम परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

इसके बावजूद सदन के भीतर जिस तरह की स्थिति बनी, उसने यह साफ कर दिया कि राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है।

महिला सशक्तिकरण का मुद्दा पीछे छूटा

यह बैठक महिला सशक्तिकरण से जुड़े जनजागरूकता अभियान को लेकर बुलाई गई थी, लेकिन पूरे घटनाक्रम के दौरान यह मुद्दा पीछे छूटता नजर आया। आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी के बीच मूल विषय पर गंभीर चर्चा नहीं हो सकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हंगामे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को प्रभावित करते हैं और जनहित के मुद्दे हाशिए पर चले जाते हैं।

पिछली बैठक में भी हुआ था विवाद

इससे पहले 9 अप्रैल को हुई सामान्य सभा में भी कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली थी। उस बैठक में 14 एजेंडों पर चर्चा की गई थी।

सिटी कोतवाली चौक का नाम ‘जैन स्तंभ’ रखने के प्रस्ताव पर जमकर विवाद हुआ था। विपक्ष के विरोध के चलते यह प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया था। हालांकि, अन्य एजेंडे बहुमत से पारित हो गए थे।

किरण बिल्डिंग परिसर में दुकानों के व्यवस्थापन से जुड़े मुद्दे पर शासन से मार्गदर्शन लेने का निर्णय लिया गया था।

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