दो दिन रहेगी भाद्रपद अमावस्या : 10 सितंबर को कुशग्रहणी, 11 को स्नान-दान; जानें पितरों के लिए क्या करें
News Affair Team
Tue, Sep 8, 2026
धर्म डेस्क.
इस साल भाद्रपद मास की अमावस्या दो दिन रहेगी। अमावस्या तिथि 10 सितंबर की सुबह 10:33 बजे शुरू होकर 11 सितंबर की सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। तिथि दो दिन होने की वजह से 10 सितंबर को कुशग्रहणी अमावस्या और 11 सितंबर को स्नान-दान की अमावस्या मनाई जाएगी।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं।
वहीं, कुशग्रहणी अमावस्या पर कुश घास एकत्र करने की परंपरा है। पूजा-पाठ, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक कर्मों में कुशा का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इसके बिना कई धर्म-कर्म अधूरे रहते हैं। पुराने समय में लोग पूरे साल पूजा और श्राद्ध में इस्तेमाल करने के लिए इसी दिन कुशा एकत्र करते थे। इसी वजह से इसे कुशग्रहणी अमावस्या कहा गया।
अमावस्या पर पितरों का करें स्मरण
अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। श्रद्धालु पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें जल अर्पित करते हैं। जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया जाता है।
मान्यता है कि पितरों के निमित्त किए गए इन कर्मों से उन्हें तृप्ति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नदी में स्नान नहीं कर सकते तो घर पर करें उपाय
भाद्रपद अमावस्या पर गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। स्नान के बाद सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित किया जाता है। जो लोग नदी में स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है।
जरूरतमंदों को इन चीजों का कर सकते हैं दान
अमावस्या पर सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन काले तिल, सरसों का तेल, कपड़े, अनाज, भोजन, जूते-चप्पल, छाता और कंबल जैसी उपयोगी चीजें दान की जा सकती हैं।
पीपल के नीचे दीपक जलाने की परंपरा
अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा भी की जाती है। श्रद्धालु पीपल के नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करते हैं। इसके अलावा गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, इन जीवों को भोजन कराने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
विष्णु-महालक्ष्मी की पूजा करें
भाद्रपद अमावस्या पर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। घर के मंदिर में भगवान का जल और पंचामृत से अभिषेक करने के बाद पीला चंदन, तुलसी और फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जा सकती है।
मछलियों और गायों की सेवा करें
इस दिन किसी तालाब या नदी में मछलियों के लिए आटे की गोलियां डालने की परंपरा है। गोशाला में गायों की देखभाल के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन या जरूरी सामग्री का दान भी किया जा सकता है।
हनुमानजी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ
अमावस्या पर हनुमानजी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है। समय हो तो सुंदरकांड का पाठ भी करने की परंपरा है। इस तरह भाद्रपद अमावस्या पर स्नान, तर्पण, दान, पूजा और सेवा जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में अमावस्या की पूजा और परंपराओं में स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अंतर भी हो सकता है।
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