TMC के 20 सांसदों ने पार्टी छोटी : NCPI में विलय का किया ऐलान; बागी बोले- NDA के साथ करेंगे काम
News Affair Team
Tue, Jun 16, 2026
नई दिल्ली/कोलकाता.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों ने खुद को पार्टी से अलग बताते हुए नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा किया है। इसके साथ ही बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था और अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
इस घटनाक्रम के बाद अब बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर बागी सांसद खुद को दो-तिहाई बहुमत वाला गुट बता रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी खेमे ने इस दावे को चुनौती देते हुए लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की है।

कौन है NCPI, जो अचानक सुर्खियों में आ गई
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का नाम अब तक राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा चर्चित नहीं रहा था। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी का गठन वर्ष 2023 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा निवासी उत्तिया कुंडू और उनकी पत्नी शेउली कुंडू ने किया था।
पार्टी के दस्तावेजों में उत्तिया कुंडू अध्यक्ष और शेउली कुंडू कोषाध्यक्ष के रूप में दर्ज हैं। हावड़ा के बानीपुर क्षेत्र में पार्टी का कार्यालय है। पार्टी चुनाव आयोग में पंजीकृत है, लेकिन उसे मान्यता प्राप्त दल का दर्जा हासिल नहीं है।

त्रिपुरा चुनाव से हुई थी शुरुआत
NCPI ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पहली बार किस्मत आजमाई थी। पार्टी ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली।
चुनाव आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पार्टी को कुल मिलाकर करीब 1,200 वोट मिले थे। कई सीटों पर उसके उम्मीदवारों को NOTA के आसपास या उससे थोड़ा अधिक मत प्राप्त हुए थे। चुनाव के बाद पार्टी की गतिविधियां लगभग ठप पड़ गई थीं।

बागी सांसदों का दावा- NDA के साथ करेंगे काम
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसदों की ओर से कहा गया कि समूह के पास TMC के दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है और वे संसद में अलग पहचान चाहते हैं।
बागी गुट की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि वे संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ सहयोग की भूमिका में काम कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय और संसदीय मान्यता की प्रक्रिया अभी बाकी है।
ममता से अलग हुए 20 बागी सांसदों के नाम
लोकसभा सीट | सांसद | लोकसभा सीट | सांसद |
|---|---|---|---|
बारासात | काकोली घोष दस्तीदार | घाटाल | दीपक अधिकारी (देव) |
कूचबिहार | जगदीश चंद्र बसुनिया | झाड़ग्राम | कालीपद सोरेन |
जांगीपुर | खलीलुर रहमान | मेदिनीपुर | जून मालिया |
बहरामपुर | यूसुफ पठान | बांकुड़ा | अरूप चक्रवर्ती |
मुर्शिदाबाद | अबू ताहेर खान | बर्धमान पूर्व | डॉ. शर्मिला सरकार |
बैरकपुर | पार्थ भौमिक | हावड़ा | प्रसून बंधोपाध्याय |
मथुरापुर | बापी हलदार | बोलपुर | असित कुमार माल |
जादवपुर | सायोनी घोष | बीरभूम | शताब्दी रॉय |
कोलकाता दक्षिण | माला रॉय | हुगली | रचना बनर्जी |
आरामबाग | मिताली बाग | कोलकाता उत्तर | सुदीप बंद्योपाध्याय |
TMC ने उठाए सवाल
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम पर आपत्ति जताई है। पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर बागी गुट को अलग मान्यता नहीं देने की मांग की गई है।
पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक पहचान और संगठनात्मक अधिकारों से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
संसद से अदालत तक जा सकता है मामला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बागी सांसदों का दावा बरकरार रहता है तो आने वाले दिनों में मामला केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद भी खड़ा हो सकता है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लोकसभा अध्यक्ष बागी सांसदों की मांग पर क्या फैसला लेते हैं और क्या उन्हें अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता मिलती है या नहीं।
बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा असर
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में सांसदों का अलग होना औपचारिक रूप से मान्य होता है, तो इसका असर राज्य की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
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