अन्नामलाई की पार्टी में 10 घंटे में 10 लाख लोग जुड़े : BJP छोड़ने के बाद बनाई ‘इधु नम्मा इयक्कम’; 2031 में लड़ेंगे विधानसभा चुनाव
चेन्नई.
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए दावा किया है कि उनकी नवगठित पार्टी ‘इधु नम्मा इयक्कम’ (यह हमारा आंदोलन है) को पहले ही दिन जबरदस्त जनसमर्थन मिला है। अन्नामलाई के मुताबिक, आंदोलन शुरू होने के 10 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों ने इससे जुड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।
भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद अन्नामलाई ने अपनी नई राजनीतिक पहल का ऐलान किया। उन्होंने इसे किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं से जुड़ा आंदोलन बताया। उनका कहना है कि यह तमिलनाडु के भविष्य को लेकर साझा सोच और दीर्घकालिक विजन का मंच बनेगा।
भाजपा छोड़कर बनाई नई राह
अन्नामलाई ने 2 जून को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनकी इस्तीफा चिट्ठी शुक्रवार को सार्वजनिक हुई। इसके बाद 5 जून को उन्होंने नई पार्टी और राजनीतिक आंदोलन की घोषणा कर दी।
सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में अन्नामलाई ने कहा कि उनकी पार्टी 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी। इसके साथ ही उन्होंने ‘We The Leaders’ नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेबसाइट भी लॉन्च की, जिसका उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को राजनीति से जोड़ना बताया गया है।
भाजपा नेताओं का भी मिल रहा साथ
अन्नामलाई के फैसले के बाद भाजपा में हलचल तेज हो गई है। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष करु नागराजन ने भी पार्टी से इस्तीफा देकर अन्नामलाई का समर्थन करने का ऐलान किया है।
नागराजन ने कहा कि राज्य में वैकल्पिक राजनीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है और कई भाजपा नेता भी इस नए आंदोलन के साथ आने को तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अन्नामलाई के प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
परिवारवाद और व्यक्ति पूजा के खिलाफ अभियान
नई पार्टी की विचारधारा स्पष्ट करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि उनका आंदोलन व्यक्ति पूजा और परिवार आधारित राजनीति के खिलाफ है। उनका दावा है कि तमिलनाडु की जनता दशकों से एक जैसी राजनीतिक बहस और परंपरागत दलों की राजनीति से ऊब चुकी है।
उन्होंने कहा कि राजनीति केवल प्रभावशाली परिवारों या आर्थिक रूप से मजबूत लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आम नागरिकों को भी नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। उनका उद्देश्य ऐसी राजनीति को बढ़ावा देना है जिसमें जनता की जरूरतें केंद्र में हों।
भाजपा नेतृत्व से मतभेद की बात स्वीकार की
अन्नामलाई ने स्वीकार किया कि भाजपा नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद थे। उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर उनकी सोच पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से अलग थी। इसी कारण उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।
उनके अनुसार, उन्होंने दिसंबर 2025 में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे के इरादे की जानकारी दे दी थी। लंबे विचार-विमर्श के बाद उन्होंने नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया।
IPS अधिकारी से राजनीतिक चेहरे तक
42 वर्षीय अन्नामलाई का राजनीतिक सफर काफी चर्चित रहा है। इंजीनियरिंग और MBA की पढ़ाई के बाद वे 2011 में कर्नाटक कैडर के IPS अधिकारी बने थे। पुलिस सेवा में रहते हुए उनकी कार्यशैली को काफी सराहा गया।
2019 में उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दिया और अगले वर्ष भाजपा में शामिल हो गए। कम समय में संगठन में मजबूत पहचान बनाने के बाद उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने राज्य में पार्टी के विस्तार और आक्रामक राजनीतिक अभियानों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।
हालांकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उन्हें व्यक्तिगत तौर पर सफलता नहीं मिली। 2021 में विधानसभा और 2024 में लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद वे भाजपा के प्रमुख चेहरों में बने रहे।
चुनावी झटके के बाद बढ़ीं थीं अटकलें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा को उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिली थी। AIADMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली भाजपा केवल एक सीट जीत सकी थी। चुनावी नतीजों के बाद से ही अन्नामलाई के भविष्य को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई पार्टी के गठन से तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण बन सकता है। हालांकि वास्तविक ताकत का आकलन आने वाले वर्षों में संगठन विस्तार और जनाधार के आधार पर ही हो सकेगा।
फिलहाल अन्नामलाई का दावा है कि उनकी नई राजनीतिक पहल को जिस तरह शुरुआती समर्थन मिला है, वह तमिलनाडु में बदलाव की चाहत का संकेत है।
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