ट्विशा शर्मा मौत केस : अब डिजीटल सबूतों पर जांच;रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर आज सुनवाई
News Affair Team
Wed, May 27, 2026
भोपाल.
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में उनकी सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। मध्य प्रदेश शासन और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने कोर्ट में जमानत पर आपत्ति दर्ज कराई है।
पिछली सुनवाई 25 मई को हुई थी, जहां गिरिबाला सिंह के वकील मृगेंद्र सिंह ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। कोर्ट ने उन्हें दो दिन का समय दिया था। मामले में आज विस्तृत जवाब पेश किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत में कहा था कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि याचिका से जुड़े दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण जवाब दाखिल नहीं किया जा सका।

जांच अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित
ट्विशा मौत मामले की जांच अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित हो गई है। मंगलवार को पुलिस ने भोपाल जिला अदालत को बताया कि घटना से जुड़े मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन सुरक्षित रखने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को पत्र भेजे गए हैं।
ट्विशा के परिवार ने अदालत में दावा किया है कि मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने 46 अलग-अलग नंबरों पर कॉल किए थे। इनमें कुछ नंबर न्यायिक अधिकारियों और जांच एजेंसियों से जुड़े लोगों के बताए जा रहे हैं। इसी आधार पर परिवार ने CDR सुरक्षित रखने की मांग की थी।
12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा शर्मा का शव फंदे पर लटका मिला था। इसके तीन दिन बाद 15 मई को गिरिबाला सिंह ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। वहीं 22 मई को उनके बेटे समर्थ सिंह को जबलपुर कोर्ट से गिरफ्तार किया गया।
CBI ने गिरिबाला और परिवार से की पूछताछ
मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद CBI की टीम मंगलवार को भोपाल पहुंची। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह से कई घंटे पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया। इसके बाद टीम 3 EME सेंटर पहुंची, जहां ट्विशा के परिजनों से भी जानकारी जुटाई गई।
CBI की दूसरी टीम पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंची और पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से केस की प्रगति की जानकारी ली। एजेंसी ने SIT से केस डायरी भी मांगी। शुरुआती जांच में केस डायरी अधूरी पाए जाने पर उसे पूरा कर दोबारा सौंपने के निर्देश दिए गए। देर रात SIT ने संशोधित केस डायरी CBI को सौंप दी।
SIT बोली- CDR सुरक्षित रखने कंपनियों को भेजा पत्र
भोपाल जिला कोर्ट में मंगलवार को CDR और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। SIT ने अदालत में बताया कि 12 से 20 मई के बीच की पूरी कॉल डिटेल सुरक्षित रखने के लिए संबंधित कंपनियों को पत्र भेजे जा चुके हैं।
SIT ने कहा कि कंपनियों से जानकारी मिलते ही उसे केस डायरी का हिस्सा बनाकर अदालत के सामने पेश किया जाएगा। दूसरी ओर गिरिबाला सिंह की तरफ से भी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के लिए आवेदन दायर किया गया है, जिस पर आज सुनवाई होनी है।
FIR में दहेज मांगने का आरोप भी शामिल
CBI ने सोमवार देर रात गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी। FIR में दहेज के लिए पैसों की मांग और मानसिक प्रताड़ना जैसे आरोप भी शामिल किए गए हैं।
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, अब मामले में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, मेडिकल रिकॉर्ड और CCTV फुटेज की फोरेंसिक जांच पर फोकस किया जा रहा है।

समर्थ बोला- रिश्ता तनावपूर्ण था, हिंसा नहीं की
पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह ने स्वीकार किया कि उसका और ट्विशा का रिश्ता पिछले कुछ महीनों से तनावपूर्ण था, लेकिन उसने किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा से इनकार किया।
समर्थ ने कहा कि शादी के शुरुआती महीनों तक सब सामान्य था, लेकिन ट्विशा के भाई की शादी के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे। जांचकर्ताओं ने उससे शादी से पहले की दोस्ती, वैवाहिक जीवन और पांच महीने के भीतर रिश्ते में आए बदलावों को लेकर सवाल पूछे।
पुलिस ने यह भी जानने की कोशिश की कि ट्विशा कितनी बार मायके गईं और क्या वह घरेलू विवादों के बाद घर छोड़ती थीं।
गर्भावस्था और मानसिक इलाज पर भी सवाल
मामले की जांच में ट्विशा की गर्भावस्था और कथित मानसिक इलाज अहम बिंदु बनकर सामने आए हैं। वॉट्सऐप चैट के आधार पर दावा किया गया है कि समर्थ ने गर्भ में पल रहे बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाए थे।
हालांकि समर्थ ने पुलिस को बताया कि वह और उसकी मां बच्चा चाहते थे, लेकिन गर्भधारण के बाद ट्विशा तनाव में रहने लगी थीं। उसने दावा किया कि डॉक्टर की सलाह पर उन्हें नींद की गोलियां और इलाज दिया जा रहा था।
ट्विशा के परिवार का आरोप है कि गर्भावस्था से जुड़े विवाद के बाद ही उनका मानसिक उपचार शुरू हुआ और इस दौरान उनका वजन तेजी से घटा। अब CBI यह जांच करेगी कि इलाज चिकित्सकीय रूप से उचित था या नहीं और क्या ट्विशा की सहमति ली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई चिंता
मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई को स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि मीडिया को मामले में संयम बरतना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया था कि गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं। चीफ जस्टिस ने कहा था कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठना दुखद है।
मौत के 12 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार
24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद भदभदा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा ने मुखाग्नि दी।
12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके वालों ने पति और ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया है।
CDR और CCTV सुरक्षित रखने को लेकर कोर्ट में दो आवेदन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन