उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाले पर 1 साल का बैन : बिक्री से लेकर गोदाम में स्टॉक रखने तक रोक; दुकानदार बोले- घर कैसे चलाएंगे?
News Affair Team
Wed, Oct 14, 2026
देहरादून.
उत्तराखंड में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला और संबंधित खाद्य उत्पादों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को इसका आदेश जारी किया। प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। इसके दायरे में केवल बिक्री ही नहीं, बल्कि निर्माण, भंडारण और वितरण भी शामिल हैं।
सरकार के फैसले से जहां जनस्वास्थ्य के लिहाज से प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता रोकने की चुनौती होगी, वहीं इनकी बिक्री से परिवार चलाने वाले छोटे दुकानदारों के सामने रोजगार का सवाल भी खड़ा हो गया है। देहरादून में पान मसाला बेचने वाले एक दुकानदार ने कहा कि उन्हें प्रतिबंध की जानकारी तक नहीं थी। उनका कहना है कि इसी कारोबार से घर का खर्च चलता है और कमाई बंद हुई तो बच्चों का पालन-पोषण मुश्किल हो जाएगा।

दुकानदार बोले- इसी कमाई से चलता है घर
देहरादून में पान मसाले की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने कहा कि उन्हें सरकार के फैसले के बारे में पहली बार बातचीत के दौरान पता चला। उन्होंने कहा, “हमें तो इस बात की जानकारी भी नहीं थी, हमें आपसे ही पता लगा है। हालांकि सरकार ऐसा करती है तो हमारे लिए तो दिक्कत हो जाएगी, हमारी तो रोजी-रोटी ही इससे है।”
छोटे दुकानदारों की चिंता इस बात को लेकर है कि प्रतिबंध लागू होने के बाद उनकी रोजाना की कमाई पर असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री जारी रखने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे कारोबारियों के सामने अब दूसरे उत्पादों की बिक्री बढ़ाने या कारोबार का विकल्प तलाशने की चुनौती रहेगी।
13 अक्टूबर 2027 तक लागू रहेगा प्रतिबंध
आदेश 13 अक्टूबर 2026 से एक साल की अवधि के लिए जारी किया गया है। इसके तहत तंबाकू या निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला और संबंधित खाद्य उत्पाद किसी भी नाम से बेचे जाएं, वे प्रतिबंध के दायरे में आ सकते हैं। यह रोक पूरे उत्तराखंड में लागू है।
आदेश की प्रतियां मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशक, सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को भेजी गई हैं। आदेश को राजकीय गजट में प्रकाशित कराने के लिए भी भेजा गया है।
दुकानों से लेकर गोदामों तक हो सकती है जांच
प्रतिबंध का दायरा खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है। प्रतिबंधित उत्पादों का निर्माण करने वाली इकाइयों, थोक कारोबारियों, वितरकों और स्टॉक रखने वालों पर भी लागू नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी संबंधित दुकानों और गोदामों का निरीक्षण कर सकते हैं। प्रतिबंधित उत्पाद मिलने पर कानून के अनुसार जब्ती या अन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, कार्रवाई का स्वरूप मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
नियम तोड़ने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में असुरक्षित खाद्य पदार्थों से जुड़े अपराधों के लिए सजा और जुर्माने के प्रावधान हैं। लेकिन किसी दुकानदार या कारोबारी के मामले में कौन-सा प्रावधान लागू होगा, यह उल्लंघन की प्रकृति और कानूनी जांच के बाद तय होगा। केवल प्रतिबंध का आदेश जारी होने से हर मामले में एक जैसी सजा अपने आप लागू नहीं हो जाती।
खाद्य कारोबार के लाइसेंस से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लागू प्रावधानों के तहत लाइसेंस के निलंबन या रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा।

जिलों में लागू कराने की जिम्मेदारी प्रशासन पर
प्रतिबंध को जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन की होगी। आदेश संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों और जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को भेजा गया है। अब निगरानी, बाजारों में उपलब्ध प्रतिबंधित उत्पादों की जांच और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई अहम होगी।
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